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Shahjahanpur News: लाखों क्विंटल सरकारी धान हजम कर गए आठ मिल संचालक, होगी कुर्की

Wed, 07 May 2025 12:34 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 07 May 2025 12:34 AM IST
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Eight mill operators have embezzled lakhs of quintals of government rice, confiscation will be done
शाहजहांपुर। जिले की आठ मिलों को खाद्य विभाग ने करीब 2710 टन धान दिया था, जिसे संचालकों नेे हजम कर लिया। एक मिल संचालक ने आरसी कटने पर मूलधन जमा कर दिया है, उस पर केवल ब्याज बाकी है। वहीं सात मिलों ने आरसी कटने के बाद भी धनराशि जमा नहीं की। सातों मिल संचालकों ने मिलें बंद की हुईं हैं। प्रशासन की ओर से अब सातों मिलों की कुर्की प्रक्रिया शुरू होगी।
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मीरानपुर कटरा के रसेवन क्षेत्र में मै. मुरारी राइस मिल को खाद्य विभाग ने वर्ष 2011-12 में 219 टन धान कुटाई के लिए दिया था। मिल पर कुल बकाया सीएमआर की धनराशि 35 लाख 30,000 थी। तीन जनवरी 2015 को वसूली के लिए मिल के खिलाफ आरसी जारी की गई। इसमें राजस्व विभाग द्वारा 16 लाख 12,000 की धनराशि वसूल की गई। बकाया धनराशि 19 लाख 18,000 बकाया है।
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तहसीलदार ने बताया कि बकायेदार के विरुद्ध वसूली कार्यवाही किए जाने के बाद तत्कालीन एडीएम एफआर के आदेश पर 18 मार्च 2015 को बैंक ऑफ बड़ौदा की सुपुर्दगी में दिए जाने के बाद राजस्व निरीक्षक और लेखपाल ने रिपोर्ट दी कि बकायेदार के पास कोई चल-अचल संपत्ति नहीं है। मांग पत्र 31 अगस्त को मूल रूप से वापस किया गया है।
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इसी तरह खुदागंज के मझिया में मै. जय वैष्णों राइस मिल को वर्ष 2012-13 में 535 टन धान कुटाई के लिए दिया गया था। मिल की कुल बकाया धनराशि एक करोड़ 18 लाख 25,000 थी। 24 जनवरी 2014 को वसूली के लिए आरसी काटी गई। 23 जनवरी 2020 को मामले में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई।
तहसीलदार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बकायेदार की चल अचल संपत्ति 4,24,250 रुपये नीलाम होने के बाद राजस्व निरीक्षक और लेखपाल ने आख्या दी कि बाकीदार के पास अब कोई चल-अचल संपत्ति नहीं है। छह सितंबर 2022 को मांग पत्र पास किया जा चुका है।

धनराशि कम होने पर नीलामी हुई निरस्त
तिलहर में मै. गोविंद राइस मिल को खाद्य विभाग की ओर से वर्ष 2020-21 में 848.39960 टन धान कुटाई के लिए दिया गया था। मिल पर कुल बकाया दो करोड़ 62 लाख 32516 रुपये था। इनमें से राजस्व विभाग द्वारा एक करोड़ 15 लाख 08116 रुपये की वसूली की गई थी। एक करोड़ 47 लाख 24400 रुपये धनराशि अवशेष है। नौ सितंबर 2021 को पहली आरसी और एक मई 2025 को दूसरी आरसी काटी गई। तीन सितंबर 2021 को मामले में मिल संचालक के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
तहसीलदार तिलहर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 10 सितंबर 2021 को मांगपत्र प्राप्त होने के बाद 30 सितंबर 2021 को संबंधित के विरुद्ध वारंट जारी किया गया, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हो सकी। हाईकोर्ट के आदेश पर वसूली प्रक्रिया पर रोक लग गई। पांच जनवरी 2022 को चल अचल संपत्ति कुर्क की गई। नीलामी अंकन 16,50,000 रुपये संबंधित विभाग में जमा करा दिए गए। चल-अचल संपत्ति कम होने की वजह से नीलामी निरस्त कर दी गई। इस मामले में कुर्क भूमि कुसुम गुप्ता पत्नी गोविंद गुप्ता ने अंश का दावा करते हुए नीलामी कार्यवाही निरस्त करने की मांग की। अब आपत्ति निस्तारण के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मिल की नीलामी के बाद भी पूरी नहीं हो पाई वसूली
खाद्य विभाग ने वर्ष 2016-17 में अल्हागंज में मै. बाबू कालिका प्रसाद राइस मिल को 459 धान कुटाई के लिए दिया था। मिल ने एक करोड़ 16 लाख 84700 रुपये कीमत का धान गबन कर लिया। वसूली के लिए राजस्व विभाग की ओर से 24 अक्तूबर 2017 को आरसी जारी की गई। 13 नवंबर 2017 को मामले में मिल संचालक के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज की गई थी। तहसीलदार ने जांच में बताया कि बाकीदार से चल-अचल संपत्ति इलाहाबाद बैंक ने नीलाम कराई। कोई और संपत्ति न होने पर मांगपत्र वापस कर दिया गया।

तीन मामले कोर्ट में विचाराधीन

मीरानपुर कटरा में जय गुरु ब्रदर्स को खाद्य विभाग ने वर्ष 2011-12 में 300 टन धान कुटाई के लिए दिया था। इसकी कीमत 58 लाख तीन हजार रुपये थी। इसमें राजस्व विभाग ने 27 लाख 25 हजार रुपये की धनराशि वसूल कर ली। अभी मिल पर 30 लाख 78000 रुपये बकाया है। मामला इलाहाबाद कोर्ट में विचाराधीन है।
इसी तरह से मीरानपुर कटरा में मै. पूर्णागिरि राइस मिल को वर्ष 2011-12 में 188 टन धान कुटाई के लिए दिया था। इसकी कीमत 36 लाख 36,000 रुपये है। इसमें से 10 लाख 10,000 रुपये की वसूली हो गई है। अब भी 26 लाख 26,000 रुपये बकाया हैं। मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
कांट क्षेत्र में एसके इंडस्ट्रीज को खाद्य विभाग ने 2017-18 को करीब 160 टन धान कुटाई के लिए दिया था। इसकी कीमत 48 लाख 60000 रुपये है। 19 सितंबर 2018 को राजस्व विभाग की ओर से आरसी जारी की गई थी। मामला न्यायालय आयुक्त बरेली मंडल में विचाराधीन है।


मिल संचालकों से गबन की गई रकम की वसूली की जाएगी। संचालकों से संबंधित जमीन व मकान को कुर्क करने की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए फिर से मांगपत्र वापस मांगे गए हैं। - अरविंद कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व
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