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Shahjahanpur News: बारिश के मौसम में कान का दर्द व फंगल इंफेक्शन कर रहा परेशान
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मेडिकल कॉलेज में मरीज के कान की जांच करती डॉ. प्रगति गुप्ता। संवाद
शाहजहांपुर। बारिश के मौसम में नमी और संक्रमण के कारण कान में दर्द, खुजली और फंगल इंफेक्शन की समस्या बढ़ गई है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में पहले की अपेक्षा ऐसे मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है।
कान में खुजली और दर्द की शिकायत लेकर मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। रोजाना 200-250 की ओपीडी हो रही है। पहले यह संख्या करीब डेढ़ सौ थी। ईएनटी विभाग की अध्यक्ष डॉ.पूनम ओमर ने बताया कि इन दिनों ओपीडी में कान से जुड़ी समस्याओं वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इलाज में देरी के कारण संक्रमण गंभीर हो जाता है।
कान के पर्दे को भी नुकसान पहुंचा सकता है। कान में खुजली, दर्द या पानी आने पर लोग डाॅक्टर के पास जाने के बजाय घरेलू नुस्खे अपनाते हैं। इससे कान के भीतर नमी बढ़ जाती है। डॉक्टर की सलाह से दवा लें। डॉ. प्रगति गुप्ता ने बताया कि माचिस की तीली या नुकीली वस्तु से कान साफ न करें। तेज आवाज में लंबे समय तक ईयर फोन का इस्तेमाल न करें।
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ये हैं लक्षण
- कान बंद होने जैसा महसूस होना
- दुर्गंध आना
- गंभीर स्थिति में कान का पर्दा प्रभावित होना
- कान में लगातार खुजली होना
- दर्द या जलन महसूस होना
- कान से पानी, मवाद या काला-सफेद स्राव निकलना
- सुनाई कम देना
(जैसा कि डॉ.पूनम ओमर ने बताया)
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कान में खुजली और दर्द की शिकायत लेकर मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। रोजाना 200-250 की ओपीडी हो रही है। पहले यह संख्या करीब डेढ़ सौ थी। ईएनटी विभाग की अध्यक्ष डॉ.पूनम ओमर ने बताया कि इन दिनों ओपीडी में कान से जुड़ी समस्याओं वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इलाज में देरी के कारण संक्रमण गंभीर हो जाता है।
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कान के पर्दे को भी नुकसान पहुंचा सकता है। कान में खुजली, दर्द या पानी आने पर लोग डाॅक्टर के पास जाने के बजाय घरेलू नुस्खे अपनाते हैं। इससे कान के भीतर नमी बढ़ जाती है। डॉक्टर की सलाह से दवा लें। डॉ. प्रगति गुप्ता ने बताया कि माचिस की तीली या नुकीली वस्तु से कान साफ न करें। तेज आवाज में लंबे समय तक ईयर फोन का इस्तेमाल न करें।
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ये हैं लक्षण
- कान बंद होने जैसा महसूस होना
- दुर्गंध आना
- गंभीर स्थिति में कान का पर्दा प्रभावित होना
- कान में लगातार खुजली होना
- दर्द या जलन महसूस होना
- कान से पानी, मवाद या काला-सफेद स्राव निकलना
- सुनाई कम देना
(जैसा कि डॉ.पूनम ओमर ने बताया)