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Shahjahanpur News: शहर के रूटों पर दौड़ीं ई-बसें, देहात में रोडवेज बसों ने उठाया चार लाख का फायदा
Sun, 23 Nov 2025 12:56 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 23 Nov 2025 12:56 AM IST
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शाहजहांपुर। नगर निगम की ई-बसों के संचालन का सीमांकन होने के बाद शनिवार को दूसरे दिन शहर के विभिन्न रूटों पर बसें दौड़ाईं गईं। इससे ई-बसों की कमाई 80 से घटकर सात हजार पर आ गई। वहीं रोडवेज की बसों में यात्रियों की संख्या बढ़ गई, साथ ही एक दिन में चार लाख रुपये अतिरिक्त का राजस्व भी कमाया।
नगर निगम के चार्जिंग प्वाइंट से 21 बसों का संचालन होता है। पूर्व में इनमें आठ बसों को शहर के अंदर चलाया जा रहा था जबकि शेष बसें तहसील क्षेत्रों में चलाई जा रहीं थीं। तब ई-बसों को प्रतिदिन करीब 80 हजार रुपये का राजस्व मिलता था। वहीं रोडवेज की बसों की सीटें तक नहीं भर पातीं थीं। ऐसे में परिचालकों का लोड फैक्टर तक पूरा नहीं होता था।
शुक्रवार को ई-बसों को शहर के अंदर चलाने के निर्देश दिए गए थे। उन्हें नगर की सीमा क्षेत्रों में चलाने के लिए कहा गया। ऐसे में भी ई-बसें नगर के रूटों पर दौड़ीं तो इनका राजस्व घटकर काफी नीचे आ गया। शाम तक करीब सात हजार रुपये ही बसों से मिल सका। वहीं दूसरी ओर रोडवेज की बसाें में सवारियों की संख्या बढ़ गई।
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बसों में सवारी बढ़ने के साथ ही राजस्व भी बढ़ गया। आमतौर पर 28 लाख रुपये कमाने वाले निगम को शनिवार को 32 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। ई-बस सेवा के प्रभारी हुमायूं लारी ने बताया कि शहरी क्षेत्र में कुछ नए रूट तय किए जाएंगे। उम्मीद है कि इससे राजस्व में कुछ हद तक वृद्धि होगी।
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ग्रामीण इलाकों में ई-बसें बंद होने व सहालग चलने की वजह से बसों को पर्याप्त सवारियां मिल रहीं हैं। रोडवेज की बसों का राजस्व बढ़ गया है। डग्गामार वाहनों की वजह से राजस्व को नुकसान होता है। - अरुण कुमार, एआरएम
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नगर निगम के चार्जिंग प्वाइंट से 21 बसों का संचालन होता है। पूर्व में इनमें आठ बसों को शहर के अंदर चलाया जा रहा था जबकि शेष बसें तहसील क्षेत्रों में चलाई जा रहीं थीं। तब ई-बसों को प्रतिदिन करीब 80 हजार रुपये का राजस्व मिलता था। वहीं रोडवेज की बसों की सीटें तक नहीं भर पातीं थीं। ऐसे में परिचालकों का लोड फैक्टर तक पूरा नहीं होता था।
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शुक्रवार को ई-बसों को शहर के अंदर चलाने के निर्देश दिए गए थे। उन्हें नगर की सीमा क्षेत्रों में चलाने के लिए कहा गया। ऐसे में भी ई-बसें नगर के रूटों पर दौड़ीं तो इनका राजस्व घटकर काफी नीचे आ गया। शाम तक करीब सात हजार रुपये ही बसों से मिल सका। वहीं दूसरी ओर रोडवेज की बसाें में सवारियों की संख्या बढ़ गई।
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बसों में सवारी बढ़ने के साथ ही राजस्व भी बढ़ गया। आमतौर पर 28 लाख रुपये कमाने वाले निगम को शनिवार को 32 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। ई-बस सेवा के प्रभारी हुमायूं लारी ने बताया कि शहरी क्षेत्र में कुछ नए रूट तय किए जाएंगे। उम्मीद है कि इससे राजस्व में कुछ हद तक वृद्धि होगी।
ग्रामीण इलाकों में ई-बसें बंद होने व सहालग चलने की वजह से बसों को पर्याप्त सवारियां मिल रहीं हैं। रोडवेज की बसों का राजस्व बढ़ गया है। डग्गामार वाहनों की वजह से राजस्व को नुकसान होता है। - अरुण कुमार, एआरएम