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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   Due to non-availability of new sleepers, there was an obstacle in the reconstruction of the Pantoon bridge.

नए स्लीपर नहीं मिलने से पैंटून पुल के पुनर्निर्माण में पड़ी बाधा

Tue, 04 Jan 2022 12:36 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 04 Jan 2022 12:36 AM IST
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Due to non-availability of new sleepers, there was an obstacle in the reconstruction of the Pantoon bridge.
शाहजहांपुर। जलालाबाद क्षेत्र में कोलाघाट का पक्का पुल टूटने के बाद वहां पुराने स्लीपर के सहारे बनाया गया अस्थायी पैंटून पुल भी क्षतिग्रस्त हो जाने से मिर्जापुर-कलान क्षेत्र का जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क कटने के साथ ही करीब 200 गांवों के लोगों को आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोक निर्माण विभाग ने एक सप्ताह में नए स्लीपर से पुल दोबारा चालू करने का दावा किया, लेकिन सात दिन बाद भी स्लीपर नहीं आ सके।
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अभियंताओं के अनुसार उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ में वन विभाग के अलग-अलग काष्ठ डिपो से स्लीपर आने हैं और उनके यहां पहुंचने के तत्काल बाद उन्हें चार दिन के अंदर पैंटून पर फिट कर पुल जन सामान्य के आवागमन और छोटे वाहनों के यातायात को खोल दिया जाएगा।
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गत 29 नवंबर को सुबह कोलाघाट पुल का सात नंबर पिलर जमीन में धंस जाने से पुल तीन हिस्सों में बटकर टूट गया था। पुल टूटने से केवल जन सामान्य के आवागमन में अवरोध पड़ गया, नौकरीपेशा और कामकाजी लोगों का नियमित कार्य थमने लगा। कटरी क्षेत्र में सब्जियों से लेकर किराना आदि सामान की आवक थमने से व्यापार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। 18 दिसंबर को प्रधानमंत्री की जनसभा का कार्यक्रम तय हुआ तो क्षेत्रवासियों की जिला मुख्यालय तक पहुंच आसान बनाने के लिए लोनिवि के अभियंताओं बरेली, बदायूं आदि स्थानों से पुराने पैंटून और स्लीपर मंगाकर कोलाघाट में रामगंगा पर पैंटून पुल तैयार कराया।
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यह पुल कुछ दिन तक लोगों के काम आता रहा, लेकिन गत मंगलवार को पैंटून के बोल्ट टूटने से कई स्लीपर क्षतिग्रस्त हो गए। नतीजे में पुल पर आवागमन रोककर सभी पुराने स्लीपर हटाकर वहां नए स्लीपर बिछाने का निर्णय किया। इसके लिए लोनिवि अभियंताओं ने बरेली स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय से पत्राचार किया। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार मुख्य अभियंता ने उसी दिन नए स्लीपर की मांग उत्तराखंड के वन अधिकारियों को भेज दी, लेकिन स्लीपर अभी तक नहीं आ सके।
नाव पलटने से अमर उजाला ने किया था आगाह
आखिर जिसका डर था, वही हो गया। बीती 31 दिसंबर को अमर उजाला ने सन 80 के दशक में कोलाघाट के पास छोटी नाव (बोट) के डूबने से कई लोगों की जान चली जाने की घटना याद दिलाते हुए शासन-प्रशासन को आगाह किया था। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने अमर उजाला में प्रकाशित खबर को गंभीरता से नहीं लिया। नतीजे में रविवार को दोबारा नाव पलटने की घटना सबके सामने आ गई। गनीमत तो यह रही कि इस नाव हादसे में किसी की जान नहीं गई, किंतु बाइकों के नदी में डूब जाने से उनमें खराबी आ गई।

जिस माप के नए स्लीपरों की पैंटून पुल के लिए आवश्यकता है, वह पर्याप्त मात्रा में उत्तराखंड वन विभाग के काष्ठ डिपो में उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए वहां के संबंधित अधिकारियों ने रायपुर (छत्तीसगढ़) वन प्रभाग के अधिकारियों को स्लीपर की मांग भेजी है। सूचना मिली है कि स्लीपर का एक ट्रक बीते दिन रायपुर से रवाना हो चुका है, लेकिन दूरी ज्यादा होने से वह मंगलवार दोपहर तक यहां पहुंचेगा। स्लीपर मिलने के बाद चार दिन में पैंटून पुल चालू कर दिया जाएगा, क्योंकि पैंटून पहले से कसे हुए हैं और पुल पर ज्यादा काम नहीं होना है।
-राजेश चौधरी, अधिशासी अभियंता, लोनिवि (निर्माण खंड-1)
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