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मां बोली - अपहरण कर बेटे को मार डाला
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अपनी नवजात बच्ची को लेकर रोती बिलखती मृतक अशीष की पत्नी दीपा और परिवार की अन्य महिलाएं। संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। आशीष की मौत की खबर पर उसकी मां कभी बेसुध हो जाती तो कभी बौखला उठती। पुलिस के सामने उसने चिल्ला चिल्लाकर कहा कि युवती के घरवालों ने उसके बेटे का अपहरण कर हत्या कर दी। उसे पहले भी जान से मारने की धमकी दी गई थी। जाने बचाने के लिए ही वह गांव छोड़कर नोएडा नौकरी करने लगा था।
सुखपाल सिंह और कृष्णपाल सिंह के मकान थोड़ी दूरी पर हैं। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद सुखपाल को पैरालिसिस का अटैक हुआ, जिससे उन्हें बोलने में दिक्कत होती है। बताया जाता है कि सुखपाल सिंह का बेटा आशीष और कृष्णपाल की बेटी बंटी के बीच पिछले चार-पांच साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दो साल पहले बंटी और आशीष की शादी की बात उठी थी, मगर रिश्ता नहीं हो सका था। इसके बाद परिजन ने आशीष की शादी मदनापुर के मझोला गांव की रहने वाली दीपा से करा दी थी।
आशीष के दो बच्चे हुए। एक साल का बेटा रौनक और 15 दिन की बच्ची है। इसके बावजूद आशीष और बंटी के बीच प्रेम प्रसंग चलता रहा। भाई अमन ने बताया कि आशीष ने हाल में ग्राम पंचायत गौटिया अंतू से प्रधानी का चुनाव लड़ा था। उसे 84 वोट मिले थे। चुनाव आशीष हार गया था और सुरेश यादव की पत्नी सरला प्रधान बन गईं थीं। चुनाव के बाद कृष्णपाल ने आशीष को बेटी से प्रेम प्रसंग के चलते धमकी दी थी। परिजन को जब धमकी की बात पता चली तो उन लोगों ने आशीष को खतरे से दूर रखने के लिए काम करने नोएडा भेज दिया था। आशीष तब से गांव नहीं लौटा था। यहां तक कि बेटी के नामकरण संस्कार में भी आशीष को नहीं बुलाया गया था।
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परिजन के मुताबिक तीन दिन से उनका संपर्क आशीष से नहीं हो पा रहा था। आशीष पहले भी काम करने के लिए नोएडा जा चुका था, लेकिन लॉकडाउन के कारण गांव लौट आया था। उन्हें खतरे की आशंका तो थी, लेकिन दूर होने के कारण ऐसे अंजाम का अंदेशा नहीं था। शुक्रवार सुबह जब आशीष का शव मिला तब पता चला कि बंटी की भी हत्या कर दी है। मां कुसुमा, पिता सुखपाल और भाई अमन का रो-रोकर बुरा हाल है। मां कुसुमा कह रही थी कि जब आशीष दूर रह रहा था तो उसकी हत्या क्यों कर दी? अब बहू और उसके दो बच्चों की देखभाल कौन करेगा?
बेटी की मौत से अनजान रहा परिवार
कृष्णपाल की बेटी का गोली लगा शव दूसरी मंजिल पर कमरे में तख्त पर पड़ा था, लेकिन घरवालों को पता ही नहीं चल सका कि उसकी मौत कब और कैसे हुई। मां गुड्डी ने बताया कि रात दो बजे तक तो बेटी ठीक थी, इसके बाद क्या हुआ, यह नहीं मालूम। बंटी के भाई अमन और पवन हरियाणा में काम करते हैं। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि अमन और पवन कुछ दिन पहले गांव में दिखे थे। बंटी बड़े भाई अमन से छोटी थी। आशीष और बंटी दोनों ही हाईस्कूल तक पढ़े हैं। बंटी की शादी की बात चल रही थी। नवरात्र में विवाह की तिथि तय होनी थी।
पीठ पर रगड़ने के निशान
पुलिस को गोली चलने की आवाज परिजन द्वारा न सुना जाना संदिग्ध लग रहा है। पुलिस मां, पिता और भाभी को हिरासत में लेकर गढ़ियारंगीन थाने में पूछताछ की। हालांकि उन्हें पूछताछ के बाद छोड़ दिया है। दोहरे हत्याकांड की सूचना पाकर एसपी एस. आनंद, एसपी ग्रामीण संजीव कुमार वाजपेयी, सीओ तिलहर परमानंद पांडेय जैतीपुर, गढ़ियारंगीन, कटरा और तिलहर थाने के फोर्स समेत मौके पर पहुंचे थे। फोरेंसिक टीम ने पहुंचकर सुबूत जुटाए। माना जा रहा है कि या तो नोएडा से अपहरण कर आशीष की हत्या की गई या फिर आशीष बंटी के बुलाने पर यहां आया था और उसे मार दिया गया। बताया जा रहा है कि आशीष की पीठ में रगड़ने के निशान हैं, जैसे सीढ़ियों से घसीटा गया हो। आशीष जूते-मोजे और कपड़े पहने हुए था। बंटी के शव के पास रक्त मिला है, लेकिन आशीष के शव के पास खून नहीं मिला। बंटी के शव के पैरों के पास भी खून मिला है।
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सुखपाल सिंह और कृष्णपाल सिंह के मकान थोड़ी दूरी पर हैं। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद सुखपाल को पैरालिसिस का अटैक हुआ, जिससे उन्हें बोलने में दिक्कत होती है। बताया जाता है कि सुखपाल सिंह का बेटा आशीष और कृष्णपाल की बेटी बंटी के बीच पिछले चार-पांच साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दो साल पहले बंटी और आशीष की शादी की बात उठी थी, मगर रिश्ता नहीं हो सका था। इसके बाद परिजन ने आशीष की शादी मदनापुर के मझोला गांव की रहने वाली दीपा से करा दी थी।
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आशीष के दो बच्चे हुए। एक साल का बेटा रौनक और 15 दिन की बच्ची है। इसके बावजूद आशीष और बंटी के बीच प्रेम प्रसंग चलता रहा। भाई अमन ने बताया कि आशीष ने हाल में ग्राम पंचायत गौटिया अंतू से प्रधानी का चुनाव लड़ा था। उसे 84 वोट मिले थे। चुनाव आशीष हार गया था और सुरेश यादव की पत्नी सरला प्रधान बन गईं थीं। चुनाव के बाद कृष्णपाल ने आशीष को बेटी से प्रेम प्रसंग के चलते धमकी दी थी। परिजन को जब धमकी की बात पता चली तो उन लोगों ने आशीष को खतरे से दूर रखने के लिए काम करने नोएडा भेज दिया था। आशीष तब से गांव नहीं लौटा था। यहां तक कि बेटी के नामकरण संस्कार में भी आशीष को नहीं बुलाया गया था।
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परिजन के मुताबिक तीन दिन से उनका संपर्क आशीष से नहीं हो पा रहा था। आशीष पहले भी काम करने के लिए नोएडा जा चुका था, लेकिन लॉकडाउन के कारण गांव लौट आया था। उन्हें खतरे की आशंका तो थी, लेकिन दूर होने के कारण ऐसे अंजाम का अंदेशा नहीं था। शुक्रवार सुबह जब आशीष का शव मिला तब पता चला कि बंटी की भी हत्या कर दी है। मां कुसुमा, पिता सुखपाल और भाई अमन का रो-रोकर बुरा हाल है। मां कुसुमा कह रही थी कि जब आशीष दूर रह रहा था तो उसकी हत्या क्यों कर दी? अब बहू और उसके दो बच्चों की देखभाल कौन करेगा?
बेटी की मौत से अनजान रहा परिवार
कृष्णपाल की बेटी का गोली लगा शव दूसरी मंजिल पर कमरे में तख्त पर पड़ा था, लेकिन घरवालों को पता ही नहीं चल सका कि उसकी मौत कब और कैसे हुई। मां गुड्डी ने बताया कि रात दो बजे तक तो बेटी ठीक थी, इसके बाद क्या हुआ, यह नहीं मालूम। बंटी के भाई अमन और पवन हरियाणा में काम करते हैं। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि अमन और पवन कुछ दिन पहले गांव में दिखे थे। बंटी बड़े भाई अमन से छोटी थी। आशीष और बंटी दोनों ही हाईस्कूल तक पढ़े हैं। बंटी की शादी की बात चल रही थी। नवरात्र में विवाह की तिथि तय होनी थी।
पीठ पर रगड़ने के निशान
पुलिस को गोली चलने की आवाज परिजन द्वारा न सुना जाना संदिग्ध लग रहा है। पुलिस मां, पिता और भाभी को हिरासत में लेकर गढ़ियारंगीन थाने में पूछताछ की। हालांकि उन्हें पूछताछ के बाद छोड़ दिया है। दोहरे हत्याकांड की सूचना पाकर एसपी एस. आनंद, एसपी ग्रामीण संजीव कुमार वाजपेयी, सीओ तिलहर परमानंद पांडेय जैतीपुर, गढ़ियारंगीन, कटरा और तिलहर थाने के फोर्स समेत मौके पर पहुंचे थे। फोरेंसिक टीम ने पहुंचकर सुबूत जुटाए। माना जा रहा है कि या तो नोएडा से अपहरण कर आशीष की हत्या की गई या फिर आशीष बंटी के बुलाने पर यहां आया था और उसे मार दिया गया। बताया जा रहा है कि आशीष की पीठ में रगड़ने के निशान हैं, जैसे सीढ़ियों से घसीटा गया हो। आशीष जूते-मोजे और कपड़े पहने हुए था। बंटी के शव के पास रक्त मिला है, लेकिन आशीष के शव के पास खून नहीं मिला। बंटी के शव के पैरों के पास भी खून मिला है।