फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   400 prisoners released from Shahjahanpur district jail

Shahjahanpur: लोगों ने चंदा कर भरी जुर्माने की राशि, वकीलों ने नहीं ली फीस, जेल से रिहा हुए 400 बंदी

Sun, 03 Dec 2023 01:49 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर Updated Sun, 03 Dec 2023 01:49 PM IST
सार

शाहजहांपुर जिला जेल से एक साल में करीब 400 बंदी रिहा किए गए हैं। ये बंदी पैरवी के अभाव में जेल में बंद थे। शहर के सामाजिक संगठन, समाजसेवी व व्यापारियों के सहयोग से चंदा जुटाकर जुर्माने की राशि भरी गई। वकीलों ने पैरवी की फीस नहीं ली। इन लोगों की मदद से ये बंदी अब खुली हवा में सांस ले रहे हैं। 

विज्ञापन
400 prisoners released from Shahjahanpur district jail
शाहजहांपुर जिला जेल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शाहजहांपुर में छोटे आपराधिक मामलों में जिला कारागार की सलाखों के पीछे बेबसी की जिंदगी व्यतीत कर रहे 400 बंदियों को खुले में सांस लेकर सामान्य जिंदगी जीने का मौका मिल सका है। यह काम उन बड़े दिल वालों की वजह से संभव हो सका, जिन्होंने बंदियों के प्रति करुणा और दया का भाव रखते हुए हरसंभव मदद की। चंदा कर जुर्माने की राशि भरी और वकीलों ने पैरवी के लिए फीस तक छोड़ दी।

विज्ञापन


जिला कारागार में गत वर्ष करीब 1700 बंदी थे। इनमें 100 से अधिक महिलाएं थीं। कपटपूर्वक कृत्य, चोरी, मारपीट समेत कई छोटे मामलों में पैरवी के अभाव में बंदी जिला कारागार में बंद थे। जेल अधीक्षक मिजाजी लाल ने छोटे अपराधों में निरुद्ध बंदियों को सूचीबद्ध कराया। इसके बाद उनकी रिहाई के प्रयास शुरू किए। अपने शहर के सामाजिक संगठन, समाजसेवी, व्यापारियों से संपर्क साधने के साथ लखनऊ और दूसरे जिले के संपन्न लोगों से बात की।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- UP: प्रेमिका से शादी करने के एक दिन बाद ही दूसरी युवती के साथ ऐसे हाल में मिले दूल्हे राजा, दुल्हन पहुंची थाने
विज्ञापन
विज्ञापन


जेल अधीक्षक मिजाजी लाल बताते हैं कि जेल में बंद 50 बंदी जुर्माना नहीं चुका पाने के चलते रिहा नहीं हो पा रहे थे। उनके लिए पूर्व कुलपति जिल्लुर्रहमान खान के पुत्र नदीम रहमान, पैगामे इंसानियत के पदाधिकारियों, लखनऊ के समाजसेवी, जेल कर्मियों से चंदा एकत्र किया गया। इस बीच जुटाई धनराशि से जुर्माना भरकर बंदियों को रिहा कराया गया।

लोक अदालत से छूटे सबसे ज्यादा बंदी
जिला कारागार में एक महीने में चार बार लोक अदालत लगवाई गई जहां पर छोटे अपराधों में निरुद्ध बंदियों के केसों की सुनवाई हुई। लोक अदालत के जरिये कई बंदियाें को रिहा कराया गया। वहीं बड़े अपराधों में लंबे समय से जेल में निरुद्ध 12 बंदियों को शासन ने रिहा कर दिया। इसमें अधिकतर आजीवन कारावास के बंदी थे। इनके लिए डीएम-एसपी से पैरवी कर अनुमति कराकर शासन को पत्र भिजवाया गया था।

जमानतदारों का कराया इंतजाम
ज्यादातर बंदियों को जमानतदार नहीं मिलने के चलते वे जेल से बाहर नहीं आ पा रहे थे। ऐसे बंदियों के लिए जमानतदार का इंतजाम कराया गया। उनके व्यक्तिगत बांड के आधार पर रिहाई कराई गई। कुछ बंदी वकील की फीस देने की स्थिति में नहीं थे। जेल अधीक्षक ने वकीलों से संपर्क कर सेवाभाव करने की गुजारिश की। वकीलों ने अपनी फीस नहीं ली और पैरवी कर बंदियों को जेल से बाहर निकाला।

जेल अधीक्षक मिजाजी लाल ने बताया कि जिला कारागार में वर्तमान में 1275 बंदी निरुद्ध हैं। एक साल में करीब चार सौ बंदियों को पैरवी, जुर्माने की धनराशि आदि जमा कराकर रिहा कराया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed