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राजनीतिक बयानबाजी में ओछे बयानों से लोग चिंतित

Thu, 24 Feb 2022 12:57 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 24 Feb 2022 12:57 AM IST
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Distressed by petty rhetoric, worried about breaking boundaries
पसियापुर में चुनावी चर्चा करते लोग - फोटो : POWAYAN
पुवायां/बंडा। विधानसभा चुनावों में ओछी बयानबाजी को लोग गलत मानते हैं। लोगों का मानना है कि नेताओं को बयान और भाषण देते समय मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि तमाम युवा नेताओं को अपना आदर्श मानते हैं और उनकी भाषा शैली ही नहीं, पहनावा और सहन सहन तक को अपनी जीवन शैली में उतारने का प्रयास करते हैं।
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मंगलवार को बंडा के मोहल्ला पसियापुर में चौपाल में बैठे लोग कुछ इसी तरह की चर्चा कर रहे थे। प्रदेश में किस दल की सरकार बनेगी, इसको लेकर लोग एक राय नहीं हैं। चौपाल में कोई कमल खिलने का दावा कर रहा था तो कोई सरकार बदलने की बात करता दिखा। पसियापुर निवासी बेचेलाल ने कहा कि चुनाव के दौरान आरोप, प्रत्यारोप में जिस तरह की भाषा का प्रयोग होने लगा है, यह किसी तरह से शुभ नहीं है। बड़े नेता ही भाषा की मर्यादा ताक पर रखकर बोल रहे हैं तो छोटे नेता भी उनके ही नक्शे कदम पर चलेंगे और इससे समाज में द्वेष भावना बढ़ेगी।
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राम अवतार ने कहा कि चुनाव से पूर्व सभी दलों के नेता तमाम वायदे करते हैं, लेकिन सरकार बनने के बाद सबकी करनी एक जैसी हो जाती है। चार साल जनता को याद नहीं किया जाता है और चुनाव वर्ष में योजनाओं और वायदों की झड़ी लग जाती है। मुमताज अली ने कहा कि चुनाव की घोषणा से पूर्व पेट्रोल, डीजल के रेट रोजाना बढ़ रहे थे। सरकार कह रही थी कि कीमतों पर उनका नियंत्रण नहीं है तो अब रेट क्यों नहीं बढ़ रहे हैं, जबकि कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। कोई सरकार बने, महंगाई की मार पड़ना तय है।
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पसियापुर के ही जगदीश बोले कि दस मार्च को पता चल जाएगा, सरकार किसकी बन रही है। नेता विकास की बात कहां कर रहे हैं। हिजाब, बुलडोजर, आतंकवाद, साइकिल बम जैसी बातें हो रही हैं। जो भी सरकार बने वह बिना भेदभाव किए सबका विकास करे। मनोज ने हिजाब के विवाद को गलत बताते हुए कहा कि स्कूल में ड्रेस का पालन होना चाहिए, बाहर जिसे जो पहनना हो पहने, इस पर बहस नहीं होनी चाहिए। सुरेंद्र ने कहा कि अब हर चुनाव आपस में वैमनस्यता पैदा कर जाता है।

पहले प्रधानी आदि के चुनाव में मारामारी होती थी, अब विधानसभा चुनाव में भी लोग एक-दूसरे पर बयानबाजी कर माहौल खराब करते हैं। शेरू, रामनाथ कल्लू, भूरे ने भी भाषण विकास पर केंद्रित रखे जाने की वकालत की।
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