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Shahjahanpur News: श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनकर भावविभोर हुए श्रद्धालु
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गांव दिलीपपुर में कथा सुनाती कथा व्यास रुपाली शुक्ला। संवाद
खुटार। गांव दिलीपपुर में भुंइहार बाबा के स्थान पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास रूपाली शुक्ला ने श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाया।
कथा व्यास ने कंस के जन्म से लेकर श्रीकृष्ण जन्म तक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि मथुरा के राजा उग्रसेन और रानी पवन रेखा के कोई संतान नहीं थी। पवन रेखा से राक्षस ने छल कर सतीत्व भंग कर दिया, इससे कंस का जन्म हुआ था। कंस के अत्याचार से धरती त्राहि-त्राहि कर उठी, तब विष्णु भगवान ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतरित होकर कंस सहित कई राक्षसों का वध कर पृथ्वी पर धर्म की स्थापना की। कथा के बाद आरती कर प्रसाद वितरित किया गया। आयोजन में गांव के कई लोगों का सहयोग रहा। संवाद
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अधर्म का अंत निश्चित, सत्य की होती है विजय
पुवायां। गांव धारा के गांधी पार्क में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास हरिदास कौशल महाराज ने श्रीकृष्ण अवतार प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि अधर्म और अत्याचार कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, उसका अंत निश्चित है और अंततः सत्य व धर्म की विजय होती है।
उन्होंने बताया कि कंस ने आकाशवाणी सुनकर देवकी और वासुदेव को कारागार में बंद कर दिया और उनकी सात संतानों का वध कर दिया। आठवीं संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। कारागार के दरवाजे खुलने पर वासुदेव उन्हें गोकुल में नंद बाबा के घर छोड़ आए। कथा व्यास ने कहा का श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग मनुष्य को अहंकार, अन्याय और अत्याचार से दूर रहकर सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इस दौरान तमाम ग्रामीण मौजूद रहे। संवाद
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ध्रुव का प्रसंग सुनाकर भगवान के प्रति भक्ति को किया प्रेरित
खुदागंज। म्यूना गांव में चल रही श्रीमद्भाभागवत कथा में शनिवार को कथावाचक पंडित शैलेंद्र मिश्रा ने भक्त ध्रुव का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भगवान के प्रति भक्ति के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कथा का सार प्रस्तुत करते हुए कहा कि सच्चे मन से की गई भक्ति में भगवान आयु नहीं, वरन भक्त की भावना को महत्व देते हैं। कथाव्यास ने एक अन्य प्रसंग में भगवान श्रीराम की वंशावली का विवरण दिया। कथा श्रवण में परीक्षित बने आयोजक कल्लू सिंह सहित सुरजीत सिंह, सचिन सिंह, पवन सिंह, प्यारेलाल आदि शामिल रहे। संवाद
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कथा व्यास ने कंस के जन्म से लेकर श्रीकृष्ण जन्म तक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि मथुरा के राजा उग्रसेन और रानी पवन रेखा के कोई संतान नहीं थी। पवन रेखा से राक्षस ने छल कर सतीत्व भंग कर दिया, इससे कंस का जन्म हुआ था। कंस के अत्याचार से धरती त्राहि-त्राहि कर उठी, तब विष्णु भगवान ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतरित होकर कंस सहित कई राक्षसों का वध कर पृथ्वी पर धर्म की स्थापना की। कथा के बाद आरती कर प्रसाद वितरित किया गया। आयोजन में गांव के कई लोगों का सहयोग रहा। संवाद
अधर्म का अंत निश्चित, सत्य की होती है विजय
पुवायां। गांव धारा के गांधी पार्क में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास हरिदास कौशल महाराज ने श्रीकृष्ण अवतार प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि अधर्म और अत्याचार कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, उसका अंत निश्चित है और अंततः सत्य व धर्म की विजय होती है।
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उन्होंने बताया कि कंस ने आकाशवाणी सुनकर देवकी और वासुदेव को कारागार में बंद कर दिया और उनकी सात संतानों का वध कर दिया। आठवीं संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। कारागार के दरवाजे खुलने पर वासुदेव उन्हें गोकुल में नंद बाबा के घर छोड़ आए। कथा व्यास ने कहा का श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग मनुष्य को अहंकार, अन्याय और अत्याचार से दूर रहकर सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इस दौरान तमाम ग्रामीण मौजूद रहे। संवाद
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ध्रुव का प्रसंग सुनाकर भगवान के प्रति भक्ति को किया प्रेरित
खुदागंज। म्यूना गांव में चल रही श्रीमद्भाभागवत कथा में शनिवार को कथावाचक पंडित शैलेंद्र मिश्रा ने भक्त ध्रुव का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भगवान के प्रति भक्ति के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कथा का सार प्रस्तुत करते हुए कहा कि सच्चे मन से की गई भक्ति में भगवान आयु नहीं, वरन भक्त की भावना को महत्व देते हैं। कथाव्यास ने एक अन्य प्रसंग में भगवान श्रीराम की वंशावली का विवरण दिया। कथा श्रवण में परीक्षित बने आयोजक कल्लू सिंह सहित सुरजीत सिंह, सचिन सिंह, पवन सिंह, प्यारेलाल आदि शामिल रहे। संवाद

गांव दिलीपपुर में कथा सुनाती कथा व्यास रुपाली शुक्ला। संवाद

गांव दिलीपपुर में कथा सुनाती कथा व्यास रुपाली शुक्ला। संवाद