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Shahjahanpur News: ज्योति कलश रथयात्रा का श्रद्धालुओं ने किया स्वागत

Wed, 03 Jun 2026 12:11 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 03 Jun 2026 12:11 AM IST
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Devotees welcomed the Jyoti Kalash Rath Yatra.
सिंधौली में ज्योति कलश रथयात्रा का स्वागत करते श्रद्धालु। स्रोत : आयोजक
शाहजहांपुर। अखिल विश्व गायत्री परिवार की ज्योति कलश रथयात्रा सिंधौली क्षेत्र में दूसरे दिन भी जारी रही। इस दौरान श्रद्धालुओं ने यात्रा का भव्य स्वागत किया।
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रथयात्रा चकनहु, अनावा, नवादा सहित कई गांवों से होकर गुजरी। ग्रामीणों ने आरती उतारकर यात्रा का स्वागत किया। उन्होंने युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के विचार क्रांति अभियान को अपनाने का संकल्प किया। श्रद्धालुओं को सद्साहित्य और पत्रिकाएं वितरित की गईं। रथ सारथी राकेश ने कहा कि ज्योति कलश रथयात्रा का उद्देश्य लोगों में श्रेष्ठ विचारों, सद्भाव और संस्कारों की चेतना जगाना है। सायंकाल यात्रा बड़ावन पहुंची, जहां प्रेमपाल मौर्य ने दीपयज्ञ का आयोजन किया। जिला समन्वयक सूरज वर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दीपयज्ञ संपन्न कराया। संवाद
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दुर्योधन के हठ का प्रसंग सुनाया
कुर्रियाकलां। गांव के शिव मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को नैमिष धाम से आए कथा व्यास पं. संपति कुमार त्रिपाठी ने दुर्योधन के हठ का प्रसंग सुनाया।
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उन्होंने कहा कि वनवास और अज्ञातवास बिताकर वापस आए पांडवों ने दुर्योधन से अपना राजपाट मांगा, लेकिन उसने अज्ञातवास भंग होने की बात कहकर दोबारा वनवास जाने के लिए कहा। भगवान श्रीकृष्ण ने दुर्योधन से पांडवों के लिए पांच गांव मांगे, लेकिन दुर्योधन ने सुई की नोक के बराबर भूमि देने से भी इन्कार कर दिया।
इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने उसे भरी सभा में इसके दुष्परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। क्रोध में दुर्योधन ने भगवान श्रीकृष्ण को बंदी बनाने का आदेश दिया। इस पर भगवान ने अपना विराट रूप धारण कर उसे युद्ध की चेतावनी दी। यह प्रसंग सुनाकर कथा व्यास ने कहा कि पुत्र कितना भी प्यारा हो, उसकी गलत करतूतों को अनदेखा नहीं करना चाहिए। अंत में यजमान ओमप्रकाश ने भगवान की आरती उतारी। कथा श्रवण में संजीव उर्फ हनुमान, सतीश कुमार, श्रवण पांडेय, दीपक आदि शामिल रहे। संवाद

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शुकदेव के जन्म की कथा सुनाई

शाहजहांपुर। ग्राम नौगांव खुलौली में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में व्यास आशीष वाजपेयी ने शुकदेव के जन्म का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा शुकदेव जी 12 वर्षों तक माता के गर्भ में ही रहे। जब व्यास जी ने उन्हें बाहर आने के लिए कहा तो उन्होंने यह शर्त रखी कि यदि बाहर आने पर उन्हें सांसारिक मोह-माया स्पर्श नहीं करेगी, तभी मैं बाहर आऊंगा। भगवान श्रीहरि के आश्वासन के बाद ही वे बाहर आए। कथा श्रवण में तमाम श्रद्धालु मौजूद रहे। संवाद

सिंधौली में ज्योति कलश रथयात्रा का स्वागत करते श्रद्धालु। स्रोत : आयोजक

सिंधौली में ज्योति कलश रथयात्रा का स्वागत करते श्रद्धालु। स्रोत : आयोजक

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