{"_id":"6182dfcdbd9931764b0d5a5b","slug":"deepotsav-shahjahanpur-news-bly4650972130","type":"story","status":"publish","title_hn":"उदासी दूर, उल्लास लेकर आई दिवाली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उदासी दूर, उल्लास लेकर आई दिवाली
विज्ञापन
शाहजहांपुर में दिवाली के लिए श्रीगणेश लक्षमी खरीदती महिलाएं । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शाहजहांपुर। कोरोना की उदासी को दिवाली ने दूर कर दिया। बाजारों की रौनक में लोगों के उत्साह को देखा जा सकता है। बुधवार को नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली पर महिलाओं ने घर के बाहर यम का दीपक जलाया। बच्चों ने पटाखे छोड़कर खुशियां मनाई। आज श्री लक्ष्मी गणेश के पूजन के साथ मनाई जाएगी दिवाली।
कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी कहते हैं। योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध भी इसी दिन किया गया था। इसलिए इस दिन को नरक चतुर्दशी कहते हैं। इसे छोटी दीपावली इसलिए कहा जाता है, क्योंकि दीपावली से एक दिन पहले रात के समय उसी तरह तिमिर (अंधकार) को दीपों के प्रकाश पुंज से दूर भगा दिया जाता है। छोटी दीपावली पर यमराज से अकाल मृत्यु से बचने और जीवन के सकुशल चलने के लिए लोगों ने यम का दीया जलाया।
परंपरा का निर्वहन करते हुए शुक्रवार की देर शाम पुराने दीये में घरों के बाहर दीपदान किया। परिवार के सभी सदस्यों मौजूदगी में जलाये जाने वाले इस दीये को लेकर पौराणिक मान्यता है कि यमराज को दीपक समर्पित करने से वे शांत होते हैं।
विज्ञापन
बाजार में खील-खिलौने व मिठाइयों की हुई खरीदारी
हफ्तों की तैयारियों के बाद सुख-समृद्धि और दीपावली बृहस्पतिवार को मनाई जाएगी। दीपों का पर्व दीपावली को लेकर तैयारियां बुधवार को पूरी हो गई। दिन भर लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों के साथ दीयों, मोमबत्तियों व पूजन सामग्री आदि की दुकानें रात तक गुलजार रहीं। लोगों ने गोवर्धन पूजा की भी खरीदारी की। खील-खिलौने, मिठाई, गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां, रुई आदि की दुकानों पर भारी भीड़ उमड़ी।
विज्ञापन
कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी कहते हैं। योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध भी इसी दिन किया गया था। इसलिए इस दिन को नरक चतुर्दशी कहते हैं। इसे छोटी दीपावली इसलिए कहा जाता है, क्योंकि दीपावली से एक दिन पहले रात के समय उसी तरह तिमिर (अंधकार) को दीपों के प्रकाश पुंज से दूर भगा दिया जाता है। छोटी दीपावली पर यमराज से अकाल मृत्यु से बचने और जीवन के सकुशल चलने के लिए लोगों ने यम का दीया जलाया।
विज्ञापन
परंपरा का निर्वहन करते हुए शुक्रवार की देर शाम पुराने दीये में घरों के बाहर दीपदान किया। परिवार के सभी सदस्यों मौजूदगी में जलाये जाने वाले इस दीये को लेकर पौराणिक मान्यता है कि यमराज को दीपक समर्पित करने से वे शांत होते हैं।
विज्ञापन
बाजार में खील-खिलौने व मिठाइयों की हुई खरीदारी
हफ्तों की तैयारियों के बाद सुख-समृद्धि और दीपावली बृहस्पतिवार को मनाई जाएगी। दीपों का पर्व दीपावली को लेकर तैयारियां बुधवार को पूरी हो गई। दिन भर लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों के साथ दीयों, मोमबत्तियों व पूजन सामग्री आदि की दुकानें रात तक गुलजार रहीं। लोगों ने गोवर्धन पूजा की भी खरीदारी की। खील-खिलौने, मिठाई, गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां, रुई आदि की दुकानों पर भारी भीड़ उमड़ी।