फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   dap fertiliger

डीएपी पर महंगाई ने किसानों की नींद उड़ाई, उपलब्धता के दावे हवा-हवाई

Tue, 02 Nov 2021 12:28 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 02 Nov 2021 12:28 AM IST
विज्ञापन
dap fertiliger
जैतीपुर के शंकरपुर सोसाइटी के बाहर बैठे काश्तकार - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। धान समेत अन्य खरीफ की फसलों से खाली हुए खेतों में किसानों ने रबी फसलों की बुआई की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन बाजार में अभी से प्रमुख फास्फेटिक उर्वरक डीएपी की मांग बढ़ने के साथ ही उसके दाम चढ़ने लगे हैं। डीएपी की 1200 रुपये वाली बोरी कई क्षेत्रों में ओवररेटिंग कर 1400 रुपये में बेची जा रही है। हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि जनपद में डीएपी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।
विज्ञापन

उनका कहना है कि नकली डीएपी की बिक्री रोकने के लिए जो भी रेलवे रैक मिल रही है, उसका वितरण सहकारी समितियों के माध्यम से कराया जा रहा है। इसके बावजूद उपलब्धता के अधिकारिक दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं, क्योंकि मिर्जापुर समेत कई ब्लॉक के अधिकांश समिति गोदामों पर डीएपी नहीं है और इसका फायदा खुले बाजार के उर्वरक विक्रेता अधिक दाम वसूल कर उठा रहे हैं।
विज्ञापन

बाढ़ आपदा के सताए किसानों को अब ब्लैक में डीएपी खरीदनी पड़ रही है। ब्लॉक की अधिकांश न्याय पंचायतों के साधन सहकारी समिति गोदामों में रबी फसलों की बुवाई के लिए डीएपी उपलब्ध नहीं है। जिन समितियों में पहले से डीएपी का स्टॉक था, वह वहां के कर्मचारियों ने दुकानदारों को ब्लैक में बेच दिया। किसानों का कहना है कि बाढ़ से पहले बोई गई सरसों और आलू की फसलें एक पखवाड़े तक बाढ़ और बारिश में डूबे रहने से पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। अब दूसरी बार बुवाई के लिए न तो डीएपी मिल रही है और न ही सरसों का बीज।
विज्ञापन
विज्ञापन

जैतीपुर। क्षेत्र में डीएपी की मांग बढ़ने के साथ किल्लत भी बढ़ गई है। शंकरपुर पिटरहाई समिति पर खाद है, लेकिन किसानों का आरोप है कि सचिव क्षेत्र के रहने वाले हैं और अपने रिश्तेदारों और खास लोगों को डीएपी दे रहे हैं। छोटे काश्तकारों को टालमटोल कर टहलाया जा रहा है। समिति के सचिव नेत्रपाल से संपर्क करना चाहा, लेकिन उनका फोन स्विच ऑफ रहा।
किसानों की बात
सहकारी समिति के सचिव क्षेत्र के ही रहने वाले हैं और अपने खास लोगों को खाद बांट रहे हैं। सरसों की फसल बोने के लिए डीएपी की सख्त जरूरत है। -लालवीर सिंह, गोगेपुर (जैतीपुर)
सहकारी समिति के गोदाम पर डीएपी है, लेकिन सचिव द्वारा चार दिन से बहाने बनाकर टहलाया जा रहा है। मुझे अभी तक डीएपी नहीं मिल सकी। -भूरेलाल, गोगेपुर (जैतीपुर)
पहले सब कुछ बाढ़ में चला गया। चार बीघा खेत बचा था, उसमें आलू बोना है। अब सहकारी गोदाम से डीएपी गायब है। बिना खाद कुछ होने वाला नहीं है। -विपिन सिंह रघुवंशी, जरीनपुर (मिर्जापुर)
कोई खाद विक्रेता स्टॉक में डीएपी कबूल नहीं कर रहा है, लेकिन एक दुकान पर गोदाम वाली डीएपी की कमी नहीं है। दुकानदार परिचितों को ही खाद दे रहा है। -गिरीश सिंह, शेरपुर कुर्रिया (मिर्जापुर)
अधिकारियों की बात
रबी सीजन की आवश्यकता को देखते अक्तूबर माह में मांग के अनुसार 14000 टन डीएपी प्राप्त हुई और उसका वितरण किया जा रहा है। दो-तीन रैक जल्द मिलने वाली हैं। थोक और फुटकर उर्वरक विक्रेताओं का स्टॉक लगातार देखा जा रहा है। यदि ओवररेटिंग की किसी किसान से शिकायत मिली तो संबंधित विक्रेता के खिलाफ उर्वरक अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. सतीश चंद्र पाठक, जिला कृषि अधिकारी

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बुआई शुरू होने में दस दिन का वक्त लग जाएगा, लेकिन किसान अभी से जरूरत से ज्यादा डीएपी खरीदने लगे हैं। डीएपी को लेकर किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि रविवार को अवकाश के बावजूद सदर, पुवायां आदि क्षेत्रों के समिति गोदामों पर 400 टन डीएपी भेजी गई है। इफको की 3000 टन की एक रैक जल्द मिलने वाली है। शिकायत मिलने पर जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. गणेश गुप्ता, सहायक निबंधक (सहकारी समितियां)
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed