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बाढ़ आपदा : 66 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मिलेगा बीमित धान का मुआवजा
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जैतीपुर में धान की फसल के खेत में भरा बाढ़ का पानी । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। नदियों में आई बाढ़ अपने आसपास के क्षेत्रों में सैकड़ों हेक्टेयर फसलें भी तबाह कर गई है। जनपद के विभिन्न ब्लॉकों के करीब 350 गांवों में खरीफ की सैकड़ों हेक्टेयर फसलें नष्ट हुई हैं। प्रभावित किसानों को मुआवजा देने के लिए प्रशासन ने कृषि समेत कई विभागों और फसली बीमा योजना की नोडल कंपनी के कर्मचारियों की न्याय पंचायत स्तर पर 124 टीमें गठित की हैं, जो गांव-गांव जाकर क्षति का आकलन कर रही हैं।
बाढ़ उतरने के बावजूद तटवर्ती निचले खेतों में पानी अभी तक ठहरा हुआ है, इसलिए कर्मचारियों को सर्वे करने में बाधा पड़ रही है। अधिकारियों का कहना है कि 30 प्रतिशत या इससे अधिक फसली नुकसान होने पर ही आपदा राहत के तहत मुआवजे का प्रावधान है, लेकिन जिन किसानों ने धान की फसल का बीमा कराया है, उन्हें बोई गई किस्म के अनुसार प्रशासन से लागू वित्तमान के आधार पर 61 से 66 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक मुआवजा दिया जाएगा।
जिले के 4.09 लाख किसानों ने इस वर्ष खरीफ सीजन में 2.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में विभिन्न फसलों की बुआई की है। इसमें 2.06 लाख हेक्टेयर रकबा धान की विभिन्न किस्मों से आच्छादित है। भारी वर्षा और बाढ़ से मक्का, ज्वार, बाजरा, उर्द, तिल, मूंगफली आदि फसलें भी खराब हुई हैं, लेकिन मिर्जापुर, कलान, अल्हागंज, जलालाबाद, जैतीपुर, तिलहर, खुदागंज और ददरौल विकास खंड में सबसे ज्यादा नुकसान धान की फसल को हुआ है।
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शासन ने खरीफ सीजन में 50 प्रतिशत कृषि रकबा बीमा योजना में शामिल करने का लक्ष्य दिया था, लेकिन बाद में यह योजना स्वैच्छिक कर दिए जाने से तमाम किसानों ने प्रीमियम राशि जमा नहीं की। करीब एक लाख ऋणी किसान बीमा योजना के दायरे में आ रहे हैं, लेकिन वित्तमान पर आधारित फसली मुआवजा उन्हीं किसानों को मिल सकेगा, जो प्रीमियम राशि जमा कर चुके हैं।
जैतीपुर। क्षेत्र के बिहारीपुर, बंडिया खुर्द, हिम्मतपुर, रामनगर, केसीनगला, खूबपुर, अचिंतपुर, धुबला करीमनगर, घसा कल्याणपुर, रामपुर, अमरेड़ी, नगला देहात माली, अंतू गौटिया, जगतियापुर, सरसवां, लोहरगढ़ी, मरेना बस्ती, नगला डभौरा, रुदपुर, अजमाबाद, छेदा पट्टी, पहाड़पुर, सिमरा गौंटिया, शिवराजपुर, खेड़ा बझेड़ा, खमरिया, धर्मपुर कंकलिया, गोविंदपुर, निजामपुर नगरिया, दना गौंटिया, मदरुआ, सुल्तानपुर, सुरजूपुर, गौहावर, जगत, कुलुआबोझ, बमिहाना, सलेमपुर पहरा, अमईपुर, बिलगरी, कटहा, बकैनिया, शंकरपुर आदि गांवों में धान समेत कई फसलें खेतों में सड़ रही हैं।
फसलों का वर्तमान वित्तमान (रुपये प्रति हेक्टेयर)
फसल वित्तमान
धान 61000-66000
मक्का 41000-46000
ज्वार 31000-34000
बाजरा 31000-34000
मूंगफली 61000-66000
उर्द व मूंग 33000-35000
आलू 130000-140000
गन्ना 170000-190000
पेड़ी गन्ना 110000-160000
जिन किसानों ने फसली बीमा योजना में प्रीमियम जमा किया है, उन्हें वर्तमान में लागू वित्तमान के अनुसार आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही गैर बीमित फसलों वाले किसानों को नुकसान के आधार पर शासन से निर्धारित दरों के अनुसार क्षतिपूर्ति की जाएगी। उन ग्रामीणों को भी आर्थिक सहायता दी जाएगी, जिनके कच्चे-पक्के मकानों को क्षति पहुंची है या फिर जिनकी जमीनेें बाढ़ में कटी हैं।
-गिरिजेश कुमार चौधरी, प्रभारी आपदा राहत/एडीएम फाइनेंस
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बाढ़ उतरने के बावजूद तटवर्ती निचले खेतों में पानी अभी तक ठहरा हुआ है, इसलिए कर्मचारियों को सर्वे करने में बाधा पड़ रही है। अधिकारियों का कहना है कि 30 प्रतिशत या इससे अधिक फसली नुकसान होने पर ही आपदा राहत के तहत मुआवजे का प्रावधान है, लेकिन जिन किसानों ने धान की फसल का बीमा कराया है, उन्हें बोई गई किस्म के अनुसार प्रशासन से लागू वित्तमान के आधार पर 61 से 66 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक मुआवजा दिया जाएगा।
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जिले के 4.09 लाख किसानों ने इस वर्ष खरीफ सीजन में 2.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में विभिन्न फसलों की बुआई की है। इसमें 2.06 लाख हेक्टेयर रकबा धान की विभिन्न किस्मों से आच्छादित है। भारी वर्षा और बाढ़ से मक्का, ज्वार, बाजरा, उर्द, तिल, मूंगफली आदि फसलें भी खराब हुई हैं, लेकिन मिर्जापुर, कलान, अल्हागंज, जलालाबाद, जैतीपुर, तिलहर, खुदागंज और ददरौल विकास खंड में सबसे ज्यादा नुकसान धान की फसल को हुआ है।
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शासन ने खरीफ सीजन में 50 प्रतिशत कृषि रकबा बीमा योजना में शामिल करने का लक्ष्य दिया था, लेकिन बाद में यह योजना स्वैच्छिक कर दिए जाने से तमाम किसानों ने प्रीमियम राशि जमा नहीं की। करीब एक लाख ऋणी किसान बीमा योजना के दायरे में आ रहे हैं, लेकिन वित्तमान पर आधारित फसली मुआवजा उन्हीं किसानों को मिल सकेगा, जो प्रीमियम राशि जमा कर चुके हैं।
जैतीपुर। क्षेत्र के बिहारीपुर, बंडिया खुर्द, हिम्मतपुर, रामनगर, केसीनगला, खूबपुर, अचिंतपुर, धुबला करीमनगर, घसा कल्याणपुर, रामपुर, अमरेड़ी, नगला देहात माली, अंतू गौटिया, जगतियापुर, सरसवां, लोहरगढ़ी, मरेना बस्ती, नगला डभौरा, रुदपुर, अजमाबाद, छेदा पट्टी, पहाड़पुर, सिमरा गौंटिया, शिवराजपुर, खेड़ा बझेड़ा, खमरिया, धर्मपुर कंकलिया, गोविंदपुर, निजामपुर नगरिया, दना गौंटिया, मदरुआ, सुल्तानपुर, सुरजूपुर, गौहावर, जगत, कुलुआबोझ, बमिहाना, सलेमपुर पहरा, अमईपुर, बिलगरी, कटहा, बकैनिया, शंकरपुर आदि गांवों में धान समेत कई फसलें खेतों में सड़ रही हैं।
फसलों का वर्तमान वित्तमान (रुपये प्रति हेक्टेयर)
फसल वित्तमान
धान 61000-66000
मक्का 41000-46000
ज्वार 31000-34000
बाजरा 31000-34000
मूंगफली 61000-66000
उर्द व मूंग 33000-35000
आलू 130000-140000
गन्ना 170000-190000
पेड़ी गन्ना 110000-160000
जिन किसानों ने फसली बीमा योजना में प्रीमियम जमा किया है, उन्हें वर्तमान में लागू वित्तमान के अनुसार आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही गैर बीमित फसलों वाले किसानों को नुकसान के आधार पर शासन से निर्धारित दरों के अनुसार क्षतिपूर्ति की जाएगी। उन ग्रामीणों को भी आर्थिक सहायता दी जाएगी, जिनके कच्चे-पक्के मकानों को क्षति पहुंची है या फिर जिनकी जमीनेें बाढ़ में कटी हैं।
-गिरिजेश कुमार चौधरी, प्रभारी आपदा राहत/एडीएम फाइनेंस