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सीवीओ से मारपीट: अब विभागीय जांच को मंडलीय कमेटी गठित
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शाहजहांपुर। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) डॉ. आरबी सिंह से अभद्रता और मारपीट के आरोपी पशुपालन विभाग के कनिष्ठ लिपिक इंद्र भूषण गौतम को प्रशासनिक कमेटी की जांच में दोषी पाए जाने के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की जा चुकी है। अब इस मामले की उच्चस्तरीय विभागीय जांच भी होगी। पशुपालन विभाग के अपर निदेशक डॉ. जीवन दत्त गौतम ने तीन सदस्यीय मंडलीय जांच कमेटी गठित कर दी है। इस बीच, आरोपी लिपिक को उनके मूल पद पर पीलीभीत के लिए कार्य मुक्त कर दिया गया है।
लिपिक गौतम ने गत जून माह में अपनी शादी और उससे जुड़े मांगलिक कार्य के लिए सीवीओ को अवकाश प्रार्थना पत्र दिया था। लंबी छुट्टी स्वीकृत करने को सीवीओ ने गौतम को अतिरिक्त पटल का कार्यभार किसी अन्य कर्मचारी को सौंपने के निर्देश दिए। इसी बात को लेकर गत 18 जून की शाम लिपिक गौतम ने सीवीओ पर उनके कक्ष में हमला बोल दिया। सीवीओ ने लिपिक गौतम के खिलाफ अभद्रता एवं मारपीट करने, कार्यालय में तोडफ़ोड़ करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने आदि आरोपों में थाना सदर बाजार कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी।
मामले में गिरफ्तारी को पुलिस ने आरोपी लिपिक के आवास पर दबिश दी, लेकिन वे हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत लेने के बहाने इलाहाबाद चले गए। वहां से लौटकर लिपिक गौतम ने सीडीओ महेंद्र सिंह तंवर को लिखित प्रतिवेदन देकर सीवीओ पर दलित कर्मचारियों को मानसिक प्रताड़ना देने सहित कई गंभीर आरोप लगाते हुए जांच कराने की गुहार की थी। सीवीओ ने डीआरडीए के परियोजना निदेशक/प्रभारी डीडीओ धर्मेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अधिकारियों की तीन सदस्यीय कमेटी गठित की, लेकिन प्रशासनिक जांच में लिपिक गौतम को दोषी पाया गया। अब लिपिक की शिकायत पर अपर निदेशक (पशुपालन) ने मामले की विभागीय जांच कराने का निर्णय किया है।
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कनिष्ठ लिपिक गौतम का व्यवहार शुरू से कर्मचारी आचरण नियमावली के प्रतिकूल रहा। पीलीभीत में तैनाती के दौरान भी उसने अधिकारियों से अभद्रता की और इसी मामले में जांच के दौरान उसे मेरे कार्यालय से संबद्ध किया गया था। अधिकारियों से परामर्श करने के बाद कनिष्ठ लिपिक गौतम को मैंने उसे मूल पद पर पीलीभीत के लिए कार्यमुक्त कर दिया है। अपर निदेशक ने मामले की विभागीय जांच के लिए मंडल के अधिकारियों की कमेटी गठित कर दी है, लेकिन अभी जांच टीम ने मुझसे संपर्क नहीं किया है।
- डॉ. आरबी सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
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लिपिक गौतम ने गत जून माह में अपनी शादी और उससे जुड़े मांगलिक कार्य के लिए सीवीओ को अवकाश प्रार्थना पत्र दिया था। लंबी छुट्टी स्वीकृत करने को सीवीओ ने गौतम को अतिरिक्त पटल का कार्यभार किसी अन्य कर्मचारी को सौंपने के निर्देश दिए। इसी बात को लेकर गत 18 जून की शाम लिपिक गौतम ने सीवीओ पर उनके कक्ष में हमला बोल दिया। सीवीओ ने लिपिक गौतम के खिलाफ अभद्रता एवं मारपीट करने, कार्यालय में तोडफ़ोड़ करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने आदि आरोपों में थाना सदर बाजार कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी।
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मामले में गिरफ्तारी को पुलिस ने आरोपी लिपिक के आवास पर दबिश दी, लेकिन वे हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत लेने के बहाने इलाहाबाद चले गए। वहां से लौटकर लिपिक गौतम ने सीडीओ महेंद्र सिंह तंवर को लिखित प्रतिवेदन देकर सीवीओ पर दलित कर्मचारियों को मानसिक प्रताड़ना देने सहित कई गंभीर आरोप लगाते हुए जांच कराने की गुहार की थी। सीवीओ ने डीआरडीए के परियोजना निदेशक/प्रभारी डीडीओ धर्मेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अधिकारियों की तीन सदस्यीय कमेटी गठित की, लेकिन प्रशासनिक जांच में लिपिक गौतम को दोषी पाया गया। अब लिपिक की शिकायत पर अपर निदेशक (पशुपालन) ने मामले की विभागीय जांच कराने का निर्णय किया है।
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कनिष्ठ लिपिक गौतम का व्यवहार शुरू से कर्मचारी आचरण नियमावली के प्रतिकूल रहा। पीलीभीत में तैनाती के दौरान भी उसने अधिकारियों से अभद्रता की और इसी मामले में जांच के दौरान उसे मेरे कार्यालय से संबद्ध किया गया था। अधिकारियों से परामर्श करने के बाद कनिष्ठ लिपिक गौतम को मैंने उसे मूल पद पर पीलीभीत के लिए कार्यमुक्त कर दिया है। अपर निदेशक ने मामले की विभागीय जांच के लिए मंडल के अधिकारियों की कमेटी गठित कर दी है, लेकिन अभी जांच टीम ने मुझसे संपर्क नहीं किया है।
- डॉ. आरबी सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी