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...और हो भूडोल जनता क्रांति के जब गीत गाती
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एक विद्यालय में आयोजित प्रवाह साहित्य संस्थान की गोष्ठी में अपनी रचना सुनाते कवि।
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। प्रवाह साहित्य संस्थान की काव्य गोष्ठी का आयोजन कवि चंद्र मोहन पाठक के संयोजन में बिहारी लाल शिशु मंदिर में किया गया। इसमें जनपद के कई कवियों और गीतकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि चंद्रशेखर दीक्षित चंद्र ने सुनाया- ‘रक्त की स्याही लिखे, इतिहास के पन्ने धरा पर और हो भूडोल जनता क्रांति के जब गीत गाती।’ वरिष्ठ गीतकार विजय ठाकुर ने ग़जल सुनायी ‘जमीन भर की चीखों को कंधों पर ढ़ो रहे हैं हम, बहुत बेमेल मिट्टी में मोहब्बत वो रहे हैं हम।’
गीतकार कमल मानव ने मुक्तक सुनाया ‘लहर का संकोच पीछे जा रही है हैं नदी के घाट पर प्यासे हिरन हम’ कवि सुशील दीक्षित विचित्र ने गीत सुनाया ‘नया तमाशा रोज देखता अपने जीवन का सभी भगोड़े नाटक करते स्थायीपन का।’ नवगीतकार डॉ. प्रशांत अग्निहोत्री ने राजनीति पर कटाक्ष करते हुए गीत सुनाया- ‘जिस पर पैदल चलना मुश्किल आई उस पर कार आश्वासन की भारी गठरी लाए हैं सरकार।’ कवि ज्ञानेंद्र मोहन ज्ञान ने ग़जल सुनायी - ‘यूं न सबको राय दो ऐसा करो वैसा करो।
यानि सबके सामने मत आइना रक्खा करो’ व्यंग्यकार उमेश चंद्र सिंह, कवि अरुण दीक्षित, कवि चंद्र मोहन पाठक, युवा कवि राजमोहन पाठक व्योमकेश, कवि विवेक प्रताप ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। इससे पूर्व विद्यालय के प्रधानाचार्य सुनील कुमार तिवारी और अध्यक्ष चंद्रशेखर दीक्षित ने दीप प्रज्ज्वलन कर गोष्ठी का शुभारंभ किया। गोष्ठी में प्रमुख रूप से अखिलकांत पांडेय, अरुण कुमार मिश्र, ज्ञानेंद्र सिंह आदि उपस्थित रहे। संचालन डॉ. प्रशांत अग्निहोत्री ने किया।
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गीतकार कमल मानव ने मुक्तक सुनाया ‘लहर का संकोच पीछे जा रही है हैं नदी के घाट पर प्यासे हिरन हम’ कवि सुशील दीक्षित विचित्र ने गीत सुनाया ‘नया तमाशा रोज देखता अपने जीवन का सभी भगोड़े नाटक करते स्थायीपन का।’ नवगीतकार डॉ. प्रशांत अग्निहोत्री ने राजनीति पर कटाक्ष करते हुए गीत सुनाया- ‘जिस पर पैदल चलना मुश्किल आई उस पर कार आश्वासन की भारी गठरी लाए हैं सरकार।’ कवि ज्ञानेंद्र मोहन ज्ञान ने ग़जल सुनायी - ‘यूं न सबको राय दो ऐसा करो वैसा करो।
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यानि सबके सामने मत आइना रक्खा करो’ व्यंग्यकार उमेश चंद्र सिंह, कवि अरुण दीक्षित, कवि चंद्र मोहन पाठक, युवा कवि राजमोहन पाठक व्योमकेश, कवि विवेक प्रताप ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। इससे पूर्व विद्यालय के प्रधानाचार्य सुनील कुमार तिवारी और अध्यक्ष चंद्रशेखर दीक्षित ने दीप प्रज्ज्वलन कर गोष्ठी का शुभारंभ किया। गोष्ठी में प्रमुख रूप से अखिलकांत पांडेय, अरुण कुमार मिश्र, ज्ञानेंद्र सिंह आदि उपस्थित रहे। संचालन डॉ. प्रशांत अग्निहोत्री ने किया।
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