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किसानों पर कहर बनकर टूटी बारिश, फसलें हुईं तबाह
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शाहजहांपुर। बीते सप्ताह बारिश के साथ तेज हवा और ओले गिरने से हुए फसली नुकसान से किसान उबर भी नहीं पाए कि शुक्रवार सुबह फिर बारिश फिर कहर बनकर टूट पड़ी। भोर होने के साथ ही बादल गरजने लगे और करीब ढाई घंटे तक जमकर बरसात हुई। इस दौरान 21.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई और ग्रामीण क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी हुई। कृषि विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि अगर फसलों को धूप लगने से पहले हवा की रफ्तार बढ़ी तो गेहूं, सरसों, आलू आदि फसलें पूरी तरह तबाह हो जाएंगी और मसूर को उकठा रोग लग जाएगा।
पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी और पश्चिमी विक्षोभ के कारण बीते दस दिन से मौसम असामान्य बना हुआ है। शाम से रात और सुबह से दोपहर तक बादल छाए रहने के साथ दिन मेें धूप निकल रही है, लेकिन अचानक बादल घिरने के साथ मौसम बिगड़ रहा है। छह मार्च को 15.2 मिमी बारिश और ओलावृष्टि के साथ 35 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवा से रोजा, ददरौल, भावलखेड़ा, तिलहर, पुवायां, बंडा आदि क्षेत्रों में सैकड़ों हेक्टेयर गेहूं और सरसों की फसल खेतों में गिर गई। इससे पहले भी तेज हवा और बरसात से सरसों को व्यापक क्षति हो चुकी है। इसी बीच शुक्रवार सुबह पांच बजे से बादल फिर गरजने लगे और तेज बारिश शुरू हो गई। गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार रात में बारिश के बावजूद बादल छाए रहने से न्यूनतम तापमान एक डिग्री बढ़कर 16.4 डिग्री सेल्सियस हो गया, लेकिन सुबह ढाई घंटे तक बारिश के साथ ओले गिरने से हवा में नमी बढ़कर 90 प्रतिशत हो गई और दिन में 12 से 15 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने के कारण अधिकतम तापमान पांच डिग्री लुढ़ककर 25 डिग्री सेल्सियस रह गया। उन्होंने बताया कि बैरोमीटर की रीडिंग में 16 मिलीबार की वृद्धि से अगले 48 घंटे तक मौसमी उथल-पुथल जारी रहने का अनुमान है।
पहले ही नष्ट हो चुकी गेहूं की 20 और सरसों की 40 फीसदी फसल
इस वर्ष 2.60 लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल बोई गई है और यह रकबा गत वर्ष की तुलना मेें 53 हजार हेक्टेयर ज्यादा है। सरसों का रकबा 37 हजार हेक्टेयर तक सीमित है। होली से पहले कृषि विभाग के स्तर से सर्वे कराए जाने पर पता चला कि करीब 25 फीसदी गेहूं और 40 प्रतिशत सरसों की फसल नष्ट हो चुकी है। मौसम विशेषज्ञों ने पहले ही संकेत दे दिया था कि हवा के कम दबाव का क्षेत्र बना होने के कारण होली के दौरान मौसम गड़बड़ रहेगा और 15 मार्च तक बूंदाबांदी के साथ बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। यह पूर्वानुमान बृहस्पतिवार शाम से सच साबित होने लगा। जैतीपुर से लेकर तिलहर, निगोही और पुवायां तक रात में कई बार बारिश हुई और ओले गिरे।
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कलान में दोबारा ओले गिरने से किसान मायूस
कलान। क्षेत्र मेें गरज के साथ बारिश होने और दोबारा ओले पड़ने से किसानों को फिर से फसली नुकसान की चिंता सताने लगी हैं और उनमेें फसलों की सुरक्षा को लेकर मायूसी छाई है। ओलों की बौछार से बाराकलां, पटना, मालौ, नौगवां, दारानगर, श्रीनगर आदि गांवों में गेहूं और तंबाकू की फसल को काफी नुकसान हुआ है। एक माह में तीन से चार बार बारिश व तेज हवा से सरसों की फसल आधी रह गई। यही नहीं, सरसों की कटी फसल पर ओले और पानी पडने से किसानों अब फसलों से मुनाफा मिलने की उम्मीद छोड़ दी है।
46 गन्ना सेंटरों पर भरा पानी, चीनी मिलें प्रभावित
भारी वर्षा के कारण जिले की पांचों चीनी मिलों से संबद्ध 46 क्रय केंद्रों पर बारिश का पानी भरने से न केवल गन्ना की तौल प्रभावित हुई है, बल्कि खरीदे जा चुके गन्ने का उठान भी नहीं हो रहा है। गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी भर जाने से गन्ना से भरे वाहन चीनी मिल गेट तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। जिला गन्ना अधिकारी डॉ. खुशीराम भार्गव ने शुक्रवार को रोजा मिल से संबद्ध बरेंडा क्रय केंद्र का निरीक्षण करने पर पाया कि वहां पानी भरा होने से खरीदा गया गन्ना डंप करने की जगह नहीं बची है। उन्होंने बताया कि जिले की पांचों चीनी मिलों समेत आसपास के जनपदों की मिलों को 165 सेंटर आवंटित किए गए हैं। इनमेें से रोजा मिल के 16 और निगोही, तिलहर एवं मकसूदापुर मिल केे 30 सेंटरों पर पानी भरा होने से तौल बंद करनी पड़ी। डीसीओ के अनुसार फिलहाल चीनी मिलें 50 प्रतिशत पेराई कर रही हैं और अगले दो-तीन दिन तक तौल प्रभावित रहने का अनुमान है। तिलहर मिल के मुख्य गन्ना अधिकारी अमित चतुर्वेदी ने किसानों से कहा है कि नजदीकी क्रय केंद्र तक पहुंचना संभव नहीं होने पर अपना गन्ना लेकर सीधेे मिल गेट पर पहुंचें।
गेहूं को इस समय अधिक तापमान की जरूरत है, लेकिन बारिश और ओले गिरने से पारा गिर रहा है। इससे गेहूं को पकने और परिपक्व होने में समय लगेगा। गेहूं गिरने से उत्पादन भी कम होगा और जो किसान अभी तक तक खेतों से आलू नहीं निकाल पाए हैं, उनकी फसल सड़ने की आशंका है। मसूर के खेतों में भरा पानी किसान तत्काल निकालने की व्यवस्था करें, अन्यथा फसल उकठा रोग की चपेट में आ जाएगी। मसूर में उकठा के लक्षण दिखने पर ट्राइकोडर्मा की चार ग्राम मात्रा एक लीटर पानी में घोल कर फसल पर स्प्रे किया जा सकता है। - शिवशंकर गौतम, जिला कृषि रक्षा अधिकारी
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पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी और पश्चिमी विक्षोभ के कारण बीते दस दिन से मौसम असामान्य बना हुआ है। शाम से रात और सुबह से दोपहर तक बादल छाए रहने के साथ दिन मेें धूप निकल रही है, लेकिन अचानक बादल घिरने के साथ मौसम बिगड़ रहा है। छह मार्च को 15.2 मिमी बारिश और ओलावृष्टि के साथ 35 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवा से रोजा, ददरौल, भावलखेड़ा, तिलहर, पुवायां, बंडा आदि क्षेत्रों में सैकड़ों हेक्टेयर गेहूं और सरसों की फसल खेतों में गिर गई। इससे पहले भी तेज हवा और बरसात से सरसों को व्यापक क्षति हो चुकी है। इसी बीच शुक्रवार सुबह पांच बजे से बादल फिर गरजने लगे और तेज बारिश शुरू हो गई। गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार रात में बारिश के बावजूद बादल छाए रहने से न्यूनतम तापमान एक डिग्री बढ़कर 16.4 डिग्री सेल्सियस हो गया, लेकिन सुबह ढाई घंटे तक बारिश के साथ ओले गिरने से हवा में नमी बढ़कर 90 प्रतिशत हो गई और दिन में 12 से 15 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने के कारण अधिकतम तापमान पांच डिग्री लुढ़ककर 25 डिग्री सेल्सियस रह गया। उन्होंने बताया कि बैरोमीटर की रीडिंग में 16 मिलीबार की वृद्धि से अगले 48 घंटे तक मौसमी उथल-पुथल जारी रहने का अनुमान है।
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पहले ही नष्ट हो चुकी गेहूं की 20 और सरसों की 40 फीसदी फसल
इस वर्ष 2.60 लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल बोई गई है और यह रकबा गत वर्ष की तुलना मेें 53 हजार हेक्टेयर ज्यादा है। सरसों का रकबा 37 हजार हेक्टेयर तक सीमित है। होली से पहले कृषि विभाग के स्तर से सर्वे कराए जाने पर पता चला कि करीब 25 फीसदी गेहूं और 40 प्रतिशत सरसों की फसल नष्ट हो चुकी है। मौसम विशेषज्ञों ने पहले ही संकेत दे दिया था कि हवा के कम दबाव का क्षेत्र बना होने के कारण होली के दौरान मौसम गड़बड़ रहेगा और 15 मार्च तक बूंदाबांदी के साथ बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। यह पूर्वानुमान बृहस्पतिवार शाम से सच साबित होने लगा। जैतीपुर से लेकर तिलहर, निगोही और पुवायां तक रात में कई बार बारिश हुई और ओले गिरे।
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कलान में दोबारा ओले गिरने से किसान मायूस
कलान। क्षेत्र मेें गरज के साथ बारिश होने और दोबारा ओले पड़ने से किसानों को फिर से फसली नुकसान की चिंता सताने लगी हैं और उनमेें फसलों की सुरक्षा को लेकर मायूसी छाई है। ओलों की बौछार से बाराकलां, पटना, मालौ, नौगवां, दारानगर, श्रीनगर आदि गांवों में गेहूं और तंबाकू की फसल को काफी नुकसान हुआ है। एक माह में तीन से चार बार बारिश व तेज हवा से सरसों की फसल आधी रह गई। यही नहीं, सरसों की कटी फसल पर ओले और पानी पडने से किसानों अब फसलों से मुनाफा मिलने की उम्मीद छोड़ दी है।
46 गन्ना सेंटरों पर भरा पानी, चीनी मिलें प्रभावित
भारी वर्षा के कारण जिले की पांचों चीनी मिलों से संबद्ध 46 क्रय केंद्रों पर बारिश का पानी भरने से न केवल गन्ना की तौल प्रभावित हुई है, बल्कि खरीदे जा चुके गन्ने का उठान भी नहीं हो रहा है। गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी भर जाने से गन्ना से भरे वाहन चीनी मिल गेट तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। जिला गन्ना अधिकारी डॉ. खुशीराम भार्गव ने शुक्रवार को रोजा मिल से संबद्ध बरेंडा क्रय केंद्र का निरीक्षण करने पर पाया कि वहां पानी भरा होने से खरीदा गया गन्ना डंप करने की जगह नहीं बची है। उन्होंने बताया कि जिले की पांचों चीनी मिलों समेत आसपास के जनपदों की मिलों को 165 सेंटर आवंटित किए गए हैं। इनमेें से रोजा मिल के 16 और निगोही, तिलहर एवं मकसूदापुर मिल केे 30 सेंटरों पर पानी भरा होने से तौल बंद करनी पड़ी। डीसीओ के अनुसार फिलहाल चीनी मिलें 50 प्रतिशत पेराई कर रही हैं और अगले दो-तीन दिन तक तौल प्रभावित रहने का अनुमान है। तिलहर मिल के मुख्य गन्ना अधिकारी अमित चतुर्वेदी ने किसानों से कहा है कि नजदीकी क्रय केंद्र तक पहुंचना संभव नहीं होने पर अपना गन्ना लेकर सीधेे मिल गेट पर पहुंचें।
गेहूं को इस समय अधिक तापमान की जरूरत है, लेकिन बारिश और ओले गिरने से पारा गिर रहा है। इससे गेहूं को पकने और परिपक्व होने में समय लगेगा। गेहूं गिरने से उत्पादन भी कम होगा और जो किसान अभी तक तक खेतों से आलू नहीं निकाल पाए हैं, उनकी फसल सड़ने की आशंका है। मसूर के खेतों में भरा पानी किसान तत्काल निकालने की व्यवस्था करें, अन्यथा फसल उकठा रोग की चपेट में आ जाएगी। मसूर में उकठा के लक्षण दिखने पर ट्राइकोडर्मा की चार ग्राम मात्रा एक लीटर पानी में घोल कर फसल पर स्प्रे किया जा सकता है। - शिवशंकर गौतम, जिला कृषि रक्षा अधिकारी