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मासूम बेटे की मौत के गम में युवती रेता गला

Sun, 03 Sep 2017 11:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर Updated Sun, 03 Sep 2017 11:45 PM IST
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The young woman threw her throat in the gum of the innocent son
आत्महत्या की को‌शिश - फोटो : शाहजहांपुर ब्यूरो
 शादी के दो साल बाद जन्में बेटे की पंद्रह दिन बाद ही मौत हो जाने के गम में सदमा ग्रस्त विवाहिता ने चाकू से अपना गला रेत कर जान देने की कोशिश की। सांस नली कट जाने पर उसे जिला अस्पताल ले जाया गया। हालत नाजुक देख अस्पताल के डॉक्टर ने हाथ खड़े कर दिए। घरवाले उसे शहर के एक निजी अस्पताल में ले गए, जहां डॉक्टर ने सफल ऑपरेशन कर उसकी जिंदगी बचा ली।
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थाना कांट क्षेत्र के गांव अभायन निवासी मनोज की 25 वर्षीय मोनी ने पंद्रह दिन पहले कांट के सरकारी अस्पताल में बेटे को जन्म दिया था। पहली संतान में बेटा होने पर वह और उसका पूरा परिवार बहुत खुश था। शुक्रवार रात अचानक बच्चे की तबीयत बिगड़ गई। आननफानन में उसे प्राइवेट डॉक्टर को दिखाया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं होेने पर उसकी रात दस बजे मौत हो गई। मोनी बेटे की मौत के गम डूब गई। रोते-रोते उसका बुरा हाल हो गया। गहरा सदमा पहुंचने पर वह बदहवास हो गई। शनिवार सुबह उसके 15 दिन के बेटे के शव को दफना दिया गया। मोनी पूरे दिन बेसुध पड़ी रही। उसके नाते रिश्तेदार और चचेरी सास नन्हीं देवी उसे सांत्वना देती रहीं। बेसुध मोनी जब आंख खोलती तो  बार-बार बेटे को याद कर रही थी। घरवाले उससे यही कहते कि बेटे के दवा दिलाने ले गए हैं, ठीक होने पर घर आ जाएगा, लेकिन उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं हुई। मोनी रविवार सुबह लगभग छह बजे घर में झाडू लगाने के बहाने उठी और दूसरे कमरे में जाकर उसने तेज धार वाले चाकू से अपना गला रेत लिया। वह खून से लथपथ होकर कमरे में गिर पड़ी। घर में मौजूद चचेरी सास ने उसे देखा तो उसकी चीख निकल पड़ी। इसके बाद नन्हीं ने सबसे पहले घर के बाहर खड़े मोनी के पति को इसकी जानकारी दी। वह भी चीखता हुआ घर में गया। खबर फैली तो  घर पर भीड़ लग गई। परिवार के लोग उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के तुरंत बाद उसे लखनऊ के लिए रेफर कर दिया गया, लेकिन परिवार के लोग उसे लेकर शहर के कनौजिया हॉस्पिटल में पहुंचे, जहां उसकी हालत देखकर डॉ. संजीव कनौजिया के होश उड़ गए। अन्य डॉक्टर की राय से मोनी का ऑपरेशन किया गया जो सफल रहा। ऑपरेशन के बाद उसकी सांस नली में प्लास्टिक की नली डाली गई। उसकी हालत स्थिर बनी हुई है।
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जीवन बचाने को साढ़े चार घंटे जूझे डॉक्टर
मोनी को शहर के कनौजिया हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत देखकर डॉक्टर हतप्रभ रह गए। महिला की हालत को गंभीर देते हुए डॉ. संजीव कनौजिया ने अपनी साथी डॉक्टर संजय पाठक से सलाह ली और उन्हें अपने हॉस्पिटल बुलाया। महिला को 12:30 बजे ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया। साढ़े चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद ऑपरेशन सफल हुआ।
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सबसे बड़ी चुनौती थी ब्लड बंद करना
डॉ. संजीव कनौजिया ने बताया कि मोनी की सांस नली कट चुकी थी। वह पूरी तरह से बेहोशी की हालत में थी। उसकी सांस गर्दन के पास नली से निकल रही थी। दो बोतल खून चढ़ाने के बाद डॉ. संजय पाठक की मदद से सांस की नली प्लास्टिक की नली डालकर उसे आपस में जोड़ना कठिन हो रहा था। काफी देर तक बह रहे ब्लड को बंद करने के लिए जूझते रहे। ब्लड बंद होने के बाद गर्दन के कटे हुए हिस्से में टांके लगाने के साथ ही चोट वाले हिस्से के नीचे छेद बनाकर ट्यूब डाल दिया गया, जिससे वह सांस ले रही है।


बोलने की क्षमता हो सकती है खत्म 
जिला अस्पताल के इमरजेंसी मेडिकल ऑफीसर डॉ. मेहराज आलम ने बताया कि सांस की नली कट जाने के बाद बेहतर इलाज होने पर उसकी जान को बचाया जा सकता है, लेकिन इस स्थिति में उसके बोलने की क्षमता खत्म होने की संभावनाएं हैं।
  
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