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पूर्व सभासद के भतीजे ने खुद को गोली से उड़ाया

Fri, 07 Jul 2017 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर Updated Fri, 07 Jul 2017 12:14 AM IST
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The nephew of former member shot himself
आत्महत्या - फोटो : शाहजहांपुर ब्यूरो
पूर्व सभासद के भतीजे ने बृहस्पतिवार शाम खुद को लाइसेंसी असलाह से गोली मारकर आत्महत्या कर ली। दम तोड़ने से पहले परिजन उसे बचाने की उम्मीद में जिला अस्पताल से बरेली तक ले गए, लेकिन उसकी फतेहगंज पश्चिमी के पास मौत हो गई। देर शाम शव घर आया तो कोहराम मच गया।
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थाना सदर बाजार क्षेत्र के मोहल्ला पक्का तालाब बाडूजई प्रथम निवासी 18 वर्षीय हर्षित मौर्या पुत्र महेश चंद्र मौर्या ने इसी वर्ष बीएस पब्लिक स्कूल से हाईस्कूल की परीक्षा पास कर 11 वीं में प्रवेश लिया था। बृहस्पतिवार को दोपहर बाद स्कूल से वापस आने के बाद उसने खाना खाया और कमरे में लेट गया। परिवार के अन्य सदस्य भी अपने-अपने कमरे में लेटे थे। शाम लगभग छह बजे अचानक फायर की आवाज सुनकर पूर्व सभासद जगदीश मौर्या अपने कमरे से बाहर निकले और बाहर बैठक में पहुंचे तो देखा की भतीजा हर्षित खून से लथपथ पड़ा था। पास में ही परिवार का लाइसेंसी रिवाल्वर पड़ा था। फायर उसकी दाहिनी कनपटी पर लगा था। चीख-पुकार सुनकर परिवार के लोग भी आ गए। तत्काल उसे घर वाले जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से उसे बरेली के लिए रेफर कर दिया गया। फतेहगंज पश्चिमी के पास उसने दम तोड़ दिया। देर शाम उसका शव जब पक्का तालाब बाडूजई प्रथम मोहल्ला स्थित घर आया तो कोहराम मच गया। मोहल्ले में भी मातमी सन्नाटा पसर गया। हर्षित के पिता महेश चंद्र मौर्या फूलों की खेती करते हैं।
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कुछ तो बताते कैसे चले गए मेरे लाल
हर्षित की इस तरह मौत पर बिलख रहे माता-पिता व परिवार के अन्य सदस्यों के मुंह से केवल एक ही बात निकल रही थी, कि दिल में कोई बात थी तो किसी को भी बता देते, यूं अकेला छोड़कर क्यों चले गए। परिवार वालों को रोते-बिलखते देख मोहल्ले के लोगों की भी आंखें नम थीं।
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दो भाई व एक बहन में सबसे बड़ा हर्षित पढ़ने में भी तेज था, इसलिए उसकी पढ़ाई में घर वालों ने कभी कोई अड़चन नहीं आने दी। मां कमलेश उर्फ गुड़िया बेटे के शव को देखकर बार-बार बेहोश हो रही थी, उसे संभालना मुश्किल हो रहा था। यहीं हाल पिता महेश चंद्र और छोटे भाई 11 वर्षीय सूजल व बहन 14 वर्षीय प्रेरणा का भी था। लोग रोते-बिलखते परिवार वालों को समझाने की कोशिश में लगे थे, लेकिन उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। मां तो बस एक ही शब्द बोले जा रही थी कि बेटा दिल में यदि कुछ था, तो बताते तो।
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तीन दिन पहले था गुमसुम, नहीं बताई तकलीफ
भतीजे की मौत पर बिलख रहे पूर्व सभासद जगदीश ने बताया कि तीन दिन पहले उन्होंने हर्षित को कुछ गुमसुम देखा तो उसे टोका भी कि, कैसे सुस्त हो, लेकिन उसने कोई बात नहीं बताई और बृहस्पतिवार को तो वह पिता को कोचिंग में पढ़ाने वाले टीचर के पास ले जाना चाहता था।

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...तो शायद बच जाती जान
पूर्व सभासद ने बताया कि फायर की आवाज सुनने से पहले ही वह कमरे में सोकर उठ गए थे, वह कमरे से बाहर निकलकर जाने के लिए हाफ नेकर तलाश करने लगे, इतनें में ही फायर की आवाज सुनाई दे गई। बैठक में जाकर देखा तो भतीजा हर्षित पड़ा। काश यदि वह दो मिनट पहले बैठक में पहुंच जाते तो शायद भतीजे की मौत नहीं होती।
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