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बंडा में साधू की धारदार हथियारों से निर्मम हत्या
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
Updated Tue, 27 Dec 2016 12:08 AM IST
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थाना क्षेत्र के गांव नरेंद्रपुर के पास ककरहा सिद्धबाबा स्थान पर रह रहे साधू की रविवार रात धारदार हथियार से प्रहार कर निर्मम हत्या कर दी गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। हत्या को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं हैं। गांव नरेंद्रपुर और इंदलपुर के बीच तालाब के पास ककरहा सिद्धबाबा स्थान है। यहां 1992 से थाना मिर्जापुर के गांव पृथ्वीपुर निवासी बाबा लालदास उर्फ सीताराम रह रहे थे। लालदास ने लोगों से चंदा कर यहां शिव मंदिर का निर्माण भी कराया। वर्तमान में इस स्थान की दूर-दूर तक प्रसिद्धि थी। रोजाना ही यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आकर पूजा-अर्चना करने आतेे थे।
बाबा लालदास मंदिर के पास ही बने कमरे में रहते थे। बाबा ने मंदिर के पास बने तालाब में लोगों के मछली पकड़ने पर भी पाबंदी लगा रखी थी। वर्ष 2007 में बाबा लालदास यहां से अपने घर चले गए लेकिन छह महीना पहले फिर यहां आकर रहने लगे।
गांव नरेंद्रपुर के शैलेंद्र ने पुलिस को बताया कि वह गांव के ही जगरूप के साथ रोजाना मंदिर परिसर में सफाई करता है। सोमवार सुबह वह सफाई करने पहुंचा तो दो साधू वहां हैंडपंप पर हाथ मुंह धोते मिले। जब वह बाबा लालदास से मिलने पहुंचा तो कमरे में उनका रक्तरंजित शव पड़ा था। शैलेंद्र ने नरेंद्रपुर की प्रधान सुशीला देवी और इंदलपुर के प्रधान संतराम को बाबा की हत्या की जानकारी दी। बाबा की हत्या की खबर से आसपास के कई गांवों के लोग वहां पहुंच गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को सील कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। एएसपी रमेश भारतीय और सीओ अरुण कुमार ने भी घटना स्थल का जायजा लिया।
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तड़के मंदिर पर देखे गए दो साधुओं पर गहराया शक
बंडा। घटना स्थल पर सोमवार तड़के हाथ-मुंह धोते देखे गए दो साधुओं पर बाबा लालदास की हत्या का शक गहराता जा रहा है। पुलिस ने शैलेंद्र और जगरूप से दोनों साधुओं के हुलिए के बारे में जानकारी लेकर छानबीन शुरू कर दी है। चर्चा है कि दोनों बाबा गांव इंदलपुर के एक व्यक्ति के घर रविवार रात पहुंचे थे और रात में गांव में ही रुके थे। पुलिस बाबा लालदास के पैतृक गांव पृथ्वीपुर से भी बाबा की रंजिश आदि के बारे में जानकारी जुटा रही है। एसओ उदयवीर का कहना है कि बाबा लालदास की हत्या रंजिश में किए जाने का अनुमान है।
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बाबा लालदास मंदिर के पास ही बने कमरे में रहते थे। बाबा ने मंदिर के पास बने तालाब में लोगों के मछली पकड़ने पर भी पाबंदी लगा रखी थी। वर्ष 2007 में बाबा लालदास यहां से अपने घर चले गए लेकिन छह महीना पहले फिर यहां आकर रहने लगे।
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गांव नरेंद्रपुर के शैलेंद्र ने पुलिस को बताया कि वह गांव के ही जगरूप के साथ रोजाना मंदिर परिसर में सफाई करता है। सोमवार सुबह वह सफाई करने पहुंचा तो दो साधू वहां हैंडपंप पर हाथ मुंह धोते मिले। जब वह बाबा लालदास से मिलने पहुंचा तो कमरे में उनका रक्तरंजित शव पड़ा था। शैलेंद्र ने नरेंद्रपुर की प्रधान सुशीला देवी और इंदलपुर के प्रधान संतराम को बाबा की हत्या की जानकारी दी। बाबा की हत्या की खबर से आसपास के कई गांवों के लोग वहां पहुंच गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को सील कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। एएसपी रमेश भारतीय और सीओ अरुण कुमार ने भी घटना स्थल का जायजा लिया।
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तड़के मंदिर पर देखे गए दो साधुओं पर गहराया शक
बंडा। घटना स्थल पर सोमवार तड़के हाथ-मुंह धोते देखे गए दो साधुओं पर बाबा लालदास की हत्या का शक गहराता जा रहा है। पुलिस ने शैलेंद्र और जगरूप से दोनों साधुओं के हुलिए के बारे में जानकारी लेकर छानबीन शुरू कर दी है। चर्चा है कि दोनों बाबा गांव इंदलपुर के एक व्यक्ति के घर रविवार रात पहुंचे थे और रात में गांव में ही रुके थे। पुलिस बाबा लालदास के पैतृक गांव पृथ्वीपुर से भी बाबा की रंजिश आदि के बारे में जानकारी जुटा रही है। एसओ उदयवीर का कहना है कि बाबा लालदास की हत्या रंजिश में किए जाने का अनुमान है।