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बच्ची के हत्यारे को फांसी की सजा

ब्यूरो/अमर उजाला, शाहजहांपुर Updated Wed, 27 Jul 2016 11:13 PM IST
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छात्रा को मिला इंसाफ
छात्रा को म‌िला इंसाफ - फोटो : शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश
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किराए पर कमरा न देने पर वर्ष तीन साल पहले घर की 10 साल की बच्ची को फावड़े से काट कर मार देने वाले मामले को विरल से विरलतम श्रेणी का अपराध मानते हुए अपर सत्र न्यायाधीश गोपाल उपाध्याय ने बुधवार को अभियुक्त फिरोज को दोषी करार देते हुए आईपीसी की धारा 302 के तहत मृत्यु दंड की सजा सुनाई। अभियुक्त पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
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50 साल के आरोपी फिरोज ने 2013 में 16 अगस्त की सुबह 7.40 बजे शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन के निकट 10 वर्षीया आफरीन को जमीन पर गिराने के बाद फावड़े से कई वार कर धड़ से सिर को अलग कर दिया था। जलालनगर के मोहल्ला निसरजई निवासी इकरार अली की बेटी आफरीन घटना वाले दिन अपनी चचेरी बहन सात वर्षीया फलक के साथ ढाका तालाब मार्ग से स्कूल जा रही थी। इकरार अपनी बेगम के साथ बच्ची को स्कूल जाते हुए अपने घर के दरवाजे से खड़े होकर देख रहे थे। तभी हाजी जाकिर अली की डेरी के सामनेे फिरोज पुत्र फारूक हाथ में फावड़ा लेकर आता दिखा। उसने आफरीन को रोका और उसके पीठ पर जोर से हाथ मारा। पीठ पर टंगे स्कूली बैग के साथ बच्ची जमीन पर लुढ़की तो फिरोज ने फावड़े से उसकी गर्दन पर एक के बाद एक तीन वार किए जिससे उसका सिर धड़ से अलग होकर कुछ दूरी पर जा गिरा। यह दृश्य देख आसपास के मकानों में रहने वालों ने भी देखा।
मौके से आरोपी मय फावड़े के भाग निकला था। दोपहर पौने एक बजे मृत बच्ची के पिता की तहरीर पर सदर बाजार थाने में आईपीसी की धारा 302, 504 और 506 के तहत एफआईआर लिखी गई। उसी दोपहर 1.20 बजे प्रभारी निरीक्षक सूबेदार सिंह ने निगोही रोड पर शाहबाजनगर तिराहे स्थित माजिद होटल के पास से फिरोज को धर दबोचा। उसकी निशानदेही पर चांदनी पुलिया के आगे बंद पड़े अर्धनिर्मित मकान से रक्तरंजित फावड़ा बरामद कर लिया गया। सात गवाहों के बयान, मौके से मिले साक्ष्य, बचाव और पीड़ित पक्ष के अधिवक्ताओं के तर्क और आरोपी के बयान के साथ पुलिस द्वारा प्रस्तुत तथ्यों का अवलोकन करने के बाद न्यायाधीश ने बुधवार को फैसले की तिथि तय की थी।
बच्ची के परिवार और मोहल्ले वाले बड़ी संख्या में कोर्ट में फैसला सुनने को पहुंचे थे। अभियुक्त की ओर से कोई परिवारीजन नहीं पहुंचा और बताया गया कि परिवारवालों ने इस घटना के बाद उससे पूरी तरह नाता तोड़ लिया था। अभियुक्त की ओर से बचाव के लिए उसके अनुरोध पर न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) कृपाशंकर अवस्थी ने पैरवी की जबकि मृत बच्ची की ओर से अधिवक्ता फिरोज हसन खान ने पैरवी की। फैसले के दौरान बच्ची की ओर से बतौर सरकारी वकील सुनील कुमार सिंह मौजूद रहे।
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