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कोतवाली के सामने शव रखकर लगाया जाम
शाहजहांपुर।
Updated Wed, 05 Aug 2015 11:39 PM IST
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कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला बिजलीपुरा में रहने वाले टेंट व्यवसायी शिवराज सिंह राठौर उर्फ गट्टू की मौत के बाद बुधवार को अंत्येष्टि के लिए कड़ी सुरक्षा में निकली शवयात्रा मार्ग में कई बार थमी और चौक कोतवाली के सामने पहुंचते ही अर्थी कंधे से उतारकर सड़क पर रख दी गई। भीड़ अचानक पुलिस-प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाने लगी। पुलिस अधिकारियों ने भीड़ को समझाने का प्रयास किया तो मृतक के बेटे को नौकरी, 10 लाख रुपये मुआवजा, शस्त्र लाइसेंस और तीसरे आरोपी शकील की गिरफ्तारी पर तत्काल अमल करने की मांग की जाने लगी।
इस पर भीड़ की पुलिस वालों से नोंकझोंक भी हुई। मृतक की बेटियों ने अधिकारियों के हाथ अपने सिर पर रखवाकर मांगें पूरी करने का वचन लिया। इस दौरान करीब डेढ़ घंटे तक कच्चा कटरा से चार खंभा रोड तक जाम लगा रहा। भीड़ में शामिल कुछ प्रभावशाली लोगों से अधिकारियों ने अलग में बातचीत की और आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार करने और मांगों को शासन तक पहुंचने का भरोसा दिया। तब जाकर भीड़ शांत हुई और पुलिस सुरक्षा में गर्रा मोक्षधाम पर अंत्येष्टि हुई।
मंगलवार की शाम शिवराज का शव घर पहुंचने के बाद मोहल्ले में बड़ी संख्या में पुलिस और पीएसी तैनात कर दी गई थी। एसडीएम सदर एसपी श्रीवास्तव, सीओ सिटी डॉ. कृष्ण गोपाल यादव और सीओ सदर अनुराग दर्शन ने मोर्चा संभाल लिया था। साढ़े दस बजे शिवराज की पत्नी बेबी ने एसडीएम को ज्ञापन दिया। जिसमें बेटे पवन को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी, दस लाख रुपये का मुआवजा, शस्त्र लाइसेंस, विधवा पेंशन और तीसरे आरोपी शकील को गिरफ्तार करने की मांग रखी गई। ज्ञापन देने के बाद लोगों ने शांतिपूर्वक शवयात्रा निकालने का आश्वासन दिया। करीब 11 बजे शवयात्रा घर से निकलते ही लोग आक्रोशित हो गए और आरोपी शकील को गिरफ्तार करने की मांग करने लगे। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने किसी तरह से शवयात्रा को आगे बढ़ाया। शवयात्रा के आगे-आगे बड़ी संख्या में महिलाएं चलने लगीं। मोहल्ले से निकलने के बाद मुख्य सड़क पुराने जिला अस्पताल रोड पर पहुंचते ही लोगों ने नारेबाजी करते हुए शव रोक दिया। कुछ लोगों के कहने पर फिर से शवयात्रा आगे बढ़ाई गई। इसके बाद मिशन तिराहे पर फिर से शवयात्रा रोक दी गई। इस दौरान लोगों की सीओ सिटी से नोकझोंक भी हो गई। किसी तरह से फिर से शवयात्रा शुरू कराई गई। कोतवाली गेट पर पहुंचकर लोगों ने शव को सड़क पर रख दिया और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। महिलाओं ने सड़क से गुजरने वाले लोगों का चेन बनाकर रास्ता रोक दिया। महिला पुलिस किसी तरह से शिवराज पत्नी बेबी को समझाने के लिए कोतवाली लेकर आई। एससपी सिटी राजेश कुमार ने बेबी को भरोसा दिलाया कि आरोपी शकील को शीघ्र गिरफ्तार किया जाएगा और उनकी मांगें शासन तक पहुंचाई जाएंगी। भीड़ ने शिवराज की पत्नी को बाहर लाने के लिए कोतवाली गेट पर हंगामा शुरू कर दिया। भीड़ ने कोतवाली में घुसने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस और भीड़ में हाथापाई भी होते-होते बची। शिवराज की पत्नी के आने के बाद लोगों का गुस्सा कुछ कम हुआ।
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एसपी सिटी राजेश कुमार ने भी लोगों को समझाने का प्रयास किया, लेेकिन वह लोग सुनने को तैयार नहीं थे। इसके बाद राठौर समाज के कुछ संभ्रांत लोग, शिवराज के परिवार के सदस्य, बीजेपी नेता अनिल वाजपेयी बाण और सभासद दिवाकर मिश्रा को एसपी सिटी और एसडीएम ने बातचीत के लिए कोतवाली में बुलाया। इन लोगों से बातचीत करके उन्होंने आश्वासन दिया कि आरोपी शकील को शीघ्र गिरफ्तार किया जाएगा और इसके साथ ही उनकी अन्य मांगों को शासन तक पहुंचाया जाएगा। अधिकारियों से हुई बातचीत के बारे में लोगों को बताया गया। इसके बाद लोगों ने शव कोतवाली गेट से उठाया। करीब डेढ़ घंटा लगे जाम से क्षेत्र की यातायात व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गई। पुलिस सुरक्षा में गर्रा मोक्षधाम पर शव पहुंचा। शिवराज के पार्थिव शरीर को बेट पवन ने मुखाग्नि दी। तनाव की स्थिति को देखते हुए मोहल्ले में पुलिस फोर्स तैनात हैं।
चार्जशीट से शकील का
नाम हटाने का आरोप
शिवराज सिंह पर हुए हमले की विवेचना कोतवाली के एसआई हरिनंदन लाल कर रहे थे। मामले में मुन्ना, शानू और शकील को नामजद किया गया था। पुलिस ने मुन्ना और शानू को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। शिवराज के परिवार वालों का आरोप है कि विवेचक ने तीसरे आरोपी शकील को विवेचना में बाहर दिया है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के प्रयास ही नहीं किए। शिवराज के घरवालों के मुताबिक आरोपी शकील इस बीच कई बार उनके घर के आसपास देखा गया है। पुलिस ने तो आरोपी को फरार घोषित किया हुआ है और न ही कुर्की की कार्रवाई की। कोतवाली इंस्पेक्टर केके तिवारी ने बताया कि कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। तीसरा आरोपी फरार चल रहा है। उसे गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जानलेवा हमले का मुकदमा हत्या में तरमीम किया जा रहा है।
तीनों बेटियां पिता
की मौत से बेसुध
शिवराज सिंह अपनी बेटियों अंकिता, वंशिका और गुनगुन को काफी प्यार करते थे। छोटी बेटी गुनगुन पिता की काफी लाडली थी। गुनगुन बार-बार कह रही थी कि उसे एक बार उनके पिता से मिला दो। तीनों बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल था।
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इस पर भीड़ की पुलिस वालों से नोंकझोंक भी हुई। मृतक की बेटियों ने अधिकारियों के हाथ अपने सिर पर रखवाकर मांगें पूरी करने का वचन लिया। इस दौरान करीब डेढ़ घंटे तक कच्चा कटरा से चार खंभा रोड तक जाम लगा रहा। भीड़ में शामिल कुछ प्रभावशाली लोगों से अधिकारियों ने अलग में बातचीत की और आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार करने और मांगों को शासन तक पहुंचने का भरोसा दिया। तब जाकर भीड़ शांत हुई और पुलिस सुरक्षा में गर्रा मोक्षधाम पर अंत्येष्टि हुई।
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मंगलवार की शाम शिवराज का शव घर पहुंचने के बाद मोहल्ले में बड़ी संख्या में पुलिस और पीएसी तैनात कर दी गई थी। एसडीएम सदर एसपी श्रीवास्तव, सीओ सिटी डॉ. कृष्ण गोपाल यादव और सीओ सदर अनुराग दर्शन ने मोर्चा संभाल लिया था। साढ़े दस बजे शिवराज की पत्नी बेबी ने एसडीएम को ज्ञापन दिया। जिसमें बेटे पवन को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी, दस लाख रुपये का मुआवजा, शस्त्र लाइसेंस, विधवा पेंशन और तीसरे आरोपी शकील को गिरफ्तार करने की मांग रखी गई। ज्ञापन देने के बाद लोगों ने शांतिपूर्वक शवयात्रा निकालने का आश्वासन दिया। करीब 11 बजे शवयात्रा घर से निकलते ही लोग आक्रोशित हो गए और आरोपी शकील को गिरफ्तार करने की मांग करने लगे। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने किसी तरह से शवयात्रा को आगे बढ़ाया। शवयात्रा के आगे-आगे बड़ी संख्या में महिलाएं चलने लगीं। मोहल्ले से निकलने के बाद मुख्य सड़क पुराने जिला अस्पताल रोड पर पहुंचते ही लोगों ने नारेबाजी करते हुए शव रोक दिया। कुछ लोगों के कहने पर फिर से शवयात्रा आगे बढ़ाई गई। इसके बाद मिशन तिराहे पर फिर से शवयात्रा रोक दी गई। इस दौरान लोगों की सीओ सिटी से नोकझोंक भी हो गई। किसी तरह से फिर से शवयात्रा शुरू कराई गई। कोतवाली गेट पर पहुंचकर लोगों ने शव को सड़क पर रख दिया और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। महिलाओं ने सड़क से गुजरने वाले लोगों का चेन बनाकर रास्ता रोक दिया। महिला पुलिस किसी तरह से शिवराज पत्नी बेबी को समझाने के लिए कोतवाली लेकर आई। एससपी सिटी राजेश कुमार ने बेबी को भरोसा दिलाया कि आरोपी शकील को शीघ्र गिरफ्तार किया जाएगा और उनकी मांगें शासन तक पहुंचाई जाएंगी। भीड़ ने शिवराज की पत्नी को बाहर लाने के लिए कोतवाली गेट पर हंगामा शुरू कर दिया। भीड़ ने कोतवाली में घुसने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस और भीड़ में हाथापाई भी होते-होते बची। शिवराज की पत्नी के आने के बाद लोगों का गुस्सा कुछ कम हुआ।
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एसपी सिटी राजेश कुमार ने भी लोगों को समझाने का प्रयास किया, लेेकिन वह लोग सुनने को तैयार नहीं थे। इसके बाद राठौर समाज के कुछ संभ्रांत लोग, शिवराज के परिवार के सदस्य, बीजेपी नेता अनिल वाजपेयी बाण और सभासद दिवाकर मिश्रा को एसपी सिटी और एसडीएम ने बातचीत के लिए कोतवाली में बुलाया। इन लोगों से बातचीत करके उन्होंने आश्वासन दिया कि आरोपी शकील को शीघ्र गिरफ्तार किया जाएगा और इसके साथ ही उनकी अन्य मांगों को शासन तक पहुंचाया जाएगा। अधिकारियों से हुई बातचीत के बारे में लोगों को बताया गया। इसके बाद लोगों ने शव कोतवाली गेट से उठाया। करीब डेढ़ घंटा लगे जाम से क्षेत्र की यातायात व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गई। पुलिस सुरक्षा में गर्रा मोक्षधाम पर शव पहुंचा। शिवराज के पार्थिव शरीर को बेट पवन ने मुखाग्नि दी। तनाव की स्थिति को देखते हुए मोहल्ले में पुलिस फोर्स तैनात हैं।
चार्जशीट से शकील का
नाम हटाने का आरोप
शिवराज सिंह पर हुए हमले की विवेचना कोतवाली के एसआई हरिनंदन लाल कर रहे थे। मामले में मुन्ना, शानू और शकील को नामजद किया गया था। पुलिस ने मुन्ना और शानू को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। शिवराज के परिवार वालों का आरोप है कि विवेचक ने तीसरे आरोपी शकील को विवेचना में बाहर दिया है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के प्रयास ही नहीं किए। शिवराज के घरवालों के मुताबिक आरोपी शकील इस बीच कई बार उनके घर के आसपास देखा गया है। पुलिस ने तो आरोपी को फरार घोषित किया हुआ है और न ही कुर्की की कार्रवाई की। कोतवाली इंस्पेक्टर केके तिवारी ने बताया कि कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। तीसरा आरोपी फरार चल रहा है। उसे गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जानलेवा हमले का मुकदमा हत्या में तरमीम किया जा रहा है।
तीनों बेटियां पिता
की मौत से बेसुध
शिवराज सिंह अपनी बेटियों अंकिता, वंशिका और गुनगुन को काफी प्यार करते थे। छोटी बेटी गुनगुन पिता की काफी लाडली थी। गुनगुन बार-बार कह रही थी कि उसे एक बार उनके पिता से मिला दो। तीनों बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल था।