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नियुक्तियों का एक और घोटाला खुला
रीतेश माथुर, शाहजहांपुर
Updated Wed, 24 Dec 2014 12:06 AM IST
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स्वास्थ्य विभाग में नियुक्तियों में गड़बड़ी का एक और मामला खुला है। एनआरएचएम के अंतर्गत ब्लाक परियोजना प्रबंधक (बीपीएम) की नियुक्तियों के लिए डाले गए टेंडर में ये गड़बड़ी हुई। मामला खुलने के बाद नियुक्तियों पर एडी हेल्थ ने रोक लगा दी है, वहीं मंडलायुक्त और डीएम ने जांच बैठा दी है। ये नियुक्तियां एजेंसी के माध्यम से हुई थीं। आरोप है कि टेंडर डालने वाली एजेंसियों में से एक से मिलकर विभाग के अधिकारियों और दो बाबुओं ने फ्ल्यूड लगाकर ओवरराइटिंग कर देय वेतन की रकम कम कर दी थी।
यह ठेका ‘प्रशांत कंसट्रक्शन’ को मिला था, जबकि शिकायत के मुताबिक ‘विष्ट ट्रेडर्स एंड कांट्रेक्टर’ उसके मुकाबले सर्विस चार्ज और वेतन मिलाकर करीब हजार रुपये कम दर्शाया था। बाद में टेंडर प्रक्रिया में धांधली की शिकायत मिलने पर मंडलायुक्त ने मामले में एडी हेल्थ डॉ.सुबोध शर्मा को जांच के आदेश दिए थे। प्रथम दृष्टया जांच में गड़बड़िया पाए जाने पर एडी ने नौ दिसंबर को नियुक्ति प्रक्रिया को स्थगित कर दिया है। जारी हुए नियुक्ति पत्रों के आधार पर काम करने से भी रोक दिया गया है। वहीं डीएम पहले ही एडीएम प्रशासन को जांच के आदेश दे चुकी हैं। इसके बाद सीएमओ कार्यालय में खलबली मच गई है। जांच की आंच विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर आ सकती है। दरअसल, शिकायत में यह भी कहा गया है कि करीब बीस-बीस हजार वाली इन नौकरियों के लिए हुईं नियुक्तियों में एजेंसी के कर्ताधर्ताओं ने मोटी रकम भी वसूली है और उसका हिस्सा विभाग के लोगों तक भी पहुंचा। एक-एक महीने की तनख्वाह दी भी जा चुकी है। यहां बता दें कि इससे पहले संविदा के डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टॉफ की हाल ही में हुई नियुक्तियों में भी गड़बड़ी सामने आई थी, जिसके बाद नियुक्ति स्थगित करके मामला शासन को भेज दिया गया था।
छह एजेंसियों ने डाले थे टेंडर
29 नवंबर 2012 को एनआरएचएम मिशन के निदेशक ने प्रदेश के प्रत्येक जिले के सभी ब्लाकों में ‘स्ट्रैथिंनिंग ऑफ ब्लाक प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट’ के अंतर्गत बीपीएम की नियुक्तियों के आदेश दिए थे। इस तरह जिले में 15 नियुक्तियां के लिए 19 सितंबर को टेंडर मांगे गए। इसमें छह एजेंसियों ने टेंडर डाले। प्रक्रिया पूरी होने के बाद विभागीय अधिकारियों ने जिला स्वास्थ्य समिति से अनुमोदन भी ले लिया था।
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मंडलायुक्त के पास मामले में धांधली होने की शिकायत आई थी। जिसकी जांच करने पर मैंने प्रथम दृष्टया टेंडर प्रक्रिया में गड़बडी पाई है। तुलनात्मक परीक्षण तालिका में ओवर राइटिंग और सफेेदा का भी प्रयोग किया गया है। जांच होने तक टेंडर प्रक्रिया को स्थगित कर दिया गया है। आगे की कार्रवाई जांच के बाद होगी।
- डॉ. सुबोध शर्मा, एडी हेल्थ, बरेली
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यह ठेका ‘प्रशांत कंसट्रक्शन’ को मिला था, जबकि शिकायत के मुताबिक ‘विष्ट ट्रेडर्स एंड कांट्रेक्टर’ उसके मुकाबले सर्विस चार्ज और वेतन मिलाकर करीब हजार रुपये कम दर्शाया था। बाद में टेंडर प्रक्रिया में धांधली की शिकायत मिलने पर मंडलायुक्त ने मामले में एडी हेल्थ डॉ.सुबोध शर्मा को जांच के आदेश दिए थे। प्रथम दृष्टया जांच में गड़बड़िया पाए जाने पर एडी ने नौ दिसंबर को नियुक्ति प्रक्रिया को स्थगित कर दिया है। जारी हुए नियुक्ति पत्रों के आधार पर काम करने से भी रोक दिया गया है। वहीं डीएम पहले ही एडीएम प्रशासन को जांच के आदेश दे चुकी हैं। इसके बाद सीएमओ कार्यालय में खलबली मच गई है। जांच की आंच विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर आ सकती है। दरअसल, शिकायत में यह भी कहा गया है कि करीब बीस-बीस हजार वाली इन नौकरियों के लिए हुईं नियुक्तियों में एजेंसी के कर्ताधर्ताओं ने मोटी रकम भी वसूली है और उसका हिस्सा विभाग के लोगों तक भी पहुंचा। एक-एक महीने की तनख्वाह दी भी जा चुकी है। यहां बता दें कि इससे पहले संविदा के डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टॉफ की हाल ही में हुई नियुक्तियों में भी गड़बड़ी सामने आई थी, जिसके बाद नियुक्ति स्थगित करके मामला शासन को भेज दिया गया था।
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छह एजेंसियों ने डाले थे टेंडर
29 नवंबर 2012 को एनआरएचएम मिशन के निदेशक ने प्रदेश के प्रत्येक जिले के सभी ब्लाकों में ‘स्ट्रैथिंनिंग ऑफ ब्लाक प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट’ के अंतर्गत बीपीएम की नियुक्तियों के आदेश दिए थे। इस तरह जिले में 15 नियुक्तियां के लिए 19 सितंबर को टेंडर मांगे गए। इसमें छह एजेंसियों ने टेंडर डाले। प्रक्रिया पूरी होने के बाद विभागीय अधिकारियों ने जिला स्वास्थ्य समिति से अनुमोदन भी ले लिया था।
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मंडलायुक्त के पास मामले में धांधली होने की शिकायत आई थी। जिसकी जांच करने पर मैंने प्रथम दृष्टया टेंडर प्रक्रिया में गड़बडी पाई है। तुलनात्मक परीक्षण तालिका में ओवर राइटिंग और सफेेदा का भी प्रयोग किया गया है। जांच होने तक टेंडर प्रक्रिया को स्थगित कर दिया गया है। आगे की कार्रवाई जांच के बाद होगी।
- डॉ. सुबोध शर्मा, एडी हेल्थ, बरेली