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किसके साथ रहना, लड़की खुद तय करे
शाहजहांपुर
Updated Wed, 27 May 2015 11:24 PM IST
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जलालाबाद के बहुचर्चित हरेवा प्रकरण में बुधवार को एसीजेएम प्रथम कोर्ट ने लड़की को अपनी इच्छानुसार जाने को स्वतंत्र कर दिया है। लड़की के परिवार की ओर से दादी और लड़के के पक्ष से चाचा ने अपनी सुपुर्दगी में लेने को प्रार्थना पत्र दिया था। सुनवाई के बाद कोर्ट ने इन दोनों के प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिए।
बुधवार सुबह साढ़े 10 बजे से कोर्ट परिसर में दोनों पक्षों के लोग एकत्र होने लगे थे। कुछ ही देर में वहां लोगों का हुजूम लग गया। हर कोई जानना चाहता था कि आखिर लड़की किसके साथ जाएगी। इसे लेकर दोनों पक्षों की ओर से पूरी तैयारियां भी की गईं। दोनों पक्षों ने लड़की को अपने साथ ले जाने के प्रयास किए। साथ ही लड़की को समझाने की कोशिश भी की गई।
कोर्ट में लड़की की दादी नन्ही की ओर से यह कहते हुए सुपुर्दगी मांगी गई थी कि लड़की के माता-पिता जेल में हैं। ऐसे में वही लड़की की प्राकृतिक संरक्षक हैं। चूंकि लड़की अवयस्क है, लिहाजा उसे उनकी सुपुर्दगी में दिया जाए। लड़की को ले जाने के आरोपी संतोष की ओर से उसके चाचा ने यह कहते हुए प्रार्थना पत्र दिया था कि लड़की अपना घर छोड़ चुकी है। अब उसे वापस वहां जाने में जान का खतरा है। लिहाजा लड़की को उन्हें सौंपा जाए। कोर्ट ने इन दोनों प्रार्थनापत्र को निरस्त कर दिया।
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संतोष से शादी कराओ तो दादी के साथ जाउंगी
लड़की को सुपुर्दगी में लेने के लिए दादी नन्ही देवी ने कोर्ट में अर्जी डाली थी। इस पर लड़की के परिवारवालों ने उसे दादी के साथ जाने का आग्रह भी किया। इस पर लड़की ने केवल इतना कहा कि दादी के साथ केवल इस शर्त पर जाएगी कि वे लोग उसकी शादी संतोष से करा दें।
दोनों पक्षों में हुई कहासुनी
सुनवाई के दौरान दोपहर बाद दोनों पक्षों की ओर से जब माहौल अधिक गर्म होने लगा। यहां तक कि कहासुनी भी होने लगी तो विवेचक ने सूझबूझ का परिचय देते हुए लड़की को सुरक्षित चौकी पर पहुंचा दिया। वहीं सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तीन बजे इंस्पेक्टर सदरबाजार मय फोर्स के कोर्ट के बाहर पहुंच गए। इससे भीड़ इधर-उधर हो गई।
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बुधवार सुबह साढ़े 10 बजे से कोर्ट परिसर में दोनों पक्षों के लोग एकत्र होने लगे थे। कुछ ही देर में वहां लोगों का हुजूम लग गया। हर कोई जानना चाहता था कि आखिर लड़की किसके साथ जाएगी। इसे लेकर दोनों पक्षों की ओर से पूरी तैयारियां भी की गईं। दोनों पक्षों ने लड़की को अपने साथ ले जाने के प्रयास किए। साथ ही लड़की को समझाने की कोशिश भी की गई।
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कोर्ट में लड़की की दादी नन्ही की ओर से यह कहते हुए सुपुर्दगी मांगी गई थी कि लड़की के माता-पिता जेल में हैं। ऐसे में वही लड़की की प्राकृतिक संरक्षक हैं। चूंकि लड़की अवयस्क है, लिहाजा उसे उनकी सुपुर्दगी में दिया जाए। लड़की को ले जाने के आरोपी संतोष की ओर से उसके चाचा ने यह कहते हुए प्रार्थना पत्र दिया था कि लड़की अपना घर छोड़ चुकी है। अब उसे वापस वहां जाने में जान का खतरा है। लिहाजा लड़की को उन्हें सौंपा जाए। कोर्ट ने इन दोनों प्रार्थनापत्र को निरस्त कर दिया।
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संतोष से शादी कराओ तो दादी के साथ जाउंगी
लड़की को सुपुर्दगी में लेने के लिए दादी नन्ही देवी ने कोर्ट में अर्जी डाली थी। इस पर लड़की के परिवारवालों ने उसे दादी के साथ जाने का आग्रह भी किया। इस पर लड़की ने केवल इतना कहा कि दादी के साथ केवल इस शर्त पर जाएगी कि वे लोग उसकी शादी संतोष से करा दें।
दोनों पक्षों में हुई कहासुनी
सुनवाई के दौरान दोपहर बाद दोनों पक्षों की ओर से जब माहौल अधिक गर्म होने लगा। यहां तक कि कहासुनी भी होने लगी तो विवेचक ने सूझबूझ का परिचय देते हुए लड़की को सुरक्षित चौकी पर पहुंचा दिया। वहीं सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तीन बजे इंस्पेक्टर सदरबाजार मय फोर्स के कोर्ट के बाहर पहुंच गए। इससे भीड़ इधर-उधर हो गई।