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सिसौआ गांव से एक साथ उठे चार जनाजे

Mon, 07 Dec 2015 12:01 AM IST
शाहजहांपुर
शाहजहांपुर Updated Mon, 07 Dec 2015 12:01 AM IST
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Sisua village got together four funeral
रविवार की सुबह से ही सिसौआ गांव की गलियों में सन्नाटा पसारा था। गांव के हर घर में मातमी माहौल था। जब गांव में दोपहर एक साथ चार लोगों के जनाजे निकले तो पूरा गांव महिलाओं की चीत्कारों और बच्चों की सिसकियों में डूब गया। हर कोई वीरपाल, सगीर, लाल मोहम्मद और जगरूप को अंतिम विदाई देने के लिए अश्रुपूर्ण था।
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बता दें कि शनिवार को रोजा सीतापुर ब्रांच लाइन पर पड़ना सिकंदरपुर की नोमैन क्रॉसिंग संख्या सात सी पर कामाख्या एक्सप्रेस काल बनकर दौड़ी थी, जो क्रॉसिंग पार करते समय टेंपो से टकराई और इन चार लोगों की जिंदगी को समाप्त कर उनके परिवार के सामने घोर अंधकार छोड़ गई।
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टेंपो चालक वीरपाल की मौत के बाद से उसकी घर एक पीढ़ी का अंत हो गया और उसके मासूम पांच बच्चे अनाथ और बेसहारा हो गए। इन बच्चों का कौन होगा पालनहार? कैसे इन सबका जीवन कटेगा हर कोई इसका जवाब टटोलने में जुटा है, लेकिन शायद इसका उत्तर किसी के पास नहीं है। यही हाल अन्य मृतक सगीर, लाल मोहम्मद और जगरूप के परिवार का भी है।
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शनिवार की शाम से ही रोजा के एसएसआई ओपी गौतम अकेले ही मशक्कत करते दिखे और किसी तरह से चारों मृतकों के पंचनामे भरकर रात में ही शवों का पोस्टमार्टम कराकर उन्हें गांव में पहुंचा दिया। गांव के प्रधान मजीद खान बताते हैं कि पूरे गांव में शनिवार से चूल्हा तक नहीं जला।
सिसौआ गांव में एकता की मिशाल भी देखने को मिली। हादसे में मरने वालों में दो हिन्दू और मुसलमान थे, लेकिन दुख,दर्द की इस घड़ी में आसपास के गांव से हर समुदाय के लोग उनके परिजनों के गम को बांटने का प्रयास कर रहे थे।
इस हादसे के बाद प्रशासनिक अमले पर चुनाव आयोग का डर कहें यह संवेदनहीनता कि उसके किसी अदने से अधिकारी ने मौके पर जाने तक की जहमत नहीं उठाई, न ही किसी राजनीतिक दल अथवा समाजसेवा का दंभ भरने वाले संगठनों ने मृतकों के परिवार को ढांढस ही बंधाया।
अलबत्ता रेलवे की आरपीएफ के सीनियर मंडल सुरक्षा आयुक्त एके वर्णवाल शनिवार की दोपहर बाद सड़क मार्ग से यहां पहुंचे। उन्होंने अपने मातहतों को दिशा निर्देश दिए और देर शाम मंडल मुख्यालय वापस हो गए, लेकिन मृतकों के परिजनों को सांत्वना देना तो दूर उनसे मिलना भी मुनासिब नहीं समझा।

बदनसीबी ने मरने के बाद भी वीरपाल का नही छोड़ा साथ!
रोजा। इसे टेंपो चालक वीरपाल की बदनसीबी ही कहा जायेगा कि मरने के बाद भी रेल के संवेदनहीन अधिकारी कानून के आगे बेबस दिखे। सीनियर सेक्सन इंजीनियर रेलपथ सीतापुर की ओर से टेंपो चालक के खिलाफ थाना रोजा में विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
शनिवार को नोमैन क्रॉसिंग संख्या सात सी पार करते समय कामाख्या एक्सप्रेस से टेंपो टकराने से उसके चालक वीरपाल निवासी सिसौआ थाना रोजा सहित चार लोगों की जान चली गई थी। इस घटना के बाद  रेल के अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे और मोबाइल के द्वारा ही सारा मामले की जानकारी हासिल करते रहे।
प्रभारी निरीक्षक रोजा आरएन चौधरी ने बताया कि रेलवे के रेलपथ अभियंता सीतापुर बीके श्रीवास्तव की तहरीर पर टेंपो चालक वीरपाल के विरुद्ध थाना रोजा में धारा 279 आईपीसी, 131 एमवी एक्ट, 161 रेलवे एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। विवेचना की जा रही है।


संरक्षा नियमों का पालन होता तो टल सकता था हादसा
रोजा। शनिवार को रेल हादसे में चार लोगों की मौत के बाद रेल अधिकारी अपने को बचाने के लिए जुट गए हैं। रेल की कमी उजागर न हो इसलिए वह टेंपो चालक को ही घटना के लिए जिम्मेदार मान रहे हैं, लेकिन नोमैन क्रासिंग के लिए रेलवे द्वारा अपनाए जाने वाले संकेतों अथवा सावधानियों के बोर्ड तक नहीं लगाए गए।
संरक्षा नियमों के अनुसार किसी प्रकार की नोमैन क्रासिंग के दोनों ओर गति अवरोधकों व रेडियम युक्त बोर्डों को लगाना आवश्यक है, जोकि स्थानीय रेल प्रशासन ने नहीं लगाए हैं। रेलवे लाइनों खासकर नो मैन क्रासिंग के आसपास झाडिय़ां नहीं होनी चाहिए, लेकिन सीतापुर सेक्सन में रेलवे लाइनों अथवा नोमैन क्रासिंग के आसपास बड़ी बड़ी झाडिय़ां हैं, जिसको कटवाने की जिम्मेदारी रेलपथ अभियंता की होती है। संबंधित पूल पदाधिकरियों ने संरक्षा नियमो का पालन नहीं किया, जिसकी परिणीत हादसे के रूप में हुई है।
रेलवे के रिटायर्ड यातायात निरीक्षक जेएस मालवीय कहते हैं कि नोमैन क्रासिंग पर संरक्षा नियमों का पालन कड़ाई से किया जाना चाहि, लेकिन होता नहीं है। यदि कड़ाई से संरक्षा नियमों का पालन किया जाए तो हादसों को बहुत हद तक टाला जा सकता है।
नोमैन क्रासिंग के संरक्षा नियमों को पड़ना सिंकदरपुर तो क्या रोजा उचौलिया के बीच निघोना, रामापुर, बरतारा गुर्री, जैसी नोमैन क्रासिंग का यही हाल है इतना ही नही रोजा से सीतापुर के बीच 75 किमी के बीच करीब 24 नोमैन क्रॉसिंग है, जहां संरक्षा नियमों का पालन नहीं कराया जाता। इस मामले में कोई भी रेल अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है।

चार मौतों के बाद कही मृतक के परिजन रेलवे पर दावा न ठोंक दें, इसके लिए रेल के स्थानीय अधिकारियों ने अभी से ही कसरत करनी शुरू कर दी है। घटना से संबंधित सभी तथ्यों की एक रिपोर्ट को लेकर आरपीएफ के रोजा प्रभारी मंडल मुख्यालय रवाना हो गये हैं, लेकिन नोमैन क्रॉसिंग के आसपास बने संरक्षा के नियमों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की गई है, जो हादसे की एक वजह भी हो सकती है।
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