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Òराज्यमंत्री राममूर्ति मेरी भी करा सकते हैं हत्याÓ
शाहजहांपुर।
Updated Mon, 15 Jun 2015 09:01 PM IST
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पत्रकार जगेंद्र की मौत के मामले में सपा से निष्कासित किए गए पूर्व विधायक देवेंद्र पाल सिंह ने कहा है कि राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा से उन्हें और उनके परिवार को भी खतरा है। उन्हें डर है कि राज्यमंत्री उनकी भी हत्या करा सकते हैं। जहां तक पत्रकार जगेंद्र को राज्यमंत्री के खिलाफ इस्तेमाल करने का सवाल है तो उन्होंने जगेंद्र सिंह को राज्यमंत्री के खिलाफ फेसबुक पर खबरें लिखने के लिए कभी नहीं उकसाया। राज्यमंत्री के भ्रष्ट कारनामों से अवगत कराने के लिए केवल सपा मुखिया और शासन स्तर पर ही उन्होंने शिकायतें कीं। इनका जगेंद्र ने अपनी खबरों में इस्तेमाल किया।
अपने आवास पर पत्रकारों से वार्ता करते हुए पूर्व विधायक ने कहा कि वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने ददरौल सीट पर अपना जनाधार दिखाने के लिए महान दल से चुनाव लड़ा। उनके खाते में 30 हजार वोट आने पर सपा मुखिया ने लखनऊ बुलाकर फिर से सपा में शामिल कर लिया। इसी के साथ वह पूरी निष्ठा से लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए जुट गए और राज्यमंत्री के गलत कामों की शिकायतें सपा मुखिया और सचिवालय स्तर पर करनी शुरू कर दीं।
देवेंद्र पाल के अनुसार इसी खुन्नस में राज्यमंत्री राममूर्ति ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके उनके विरुद्ध मदनापुर की तीन बीघा जमीन को लेकर लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी, जबकि यह जमीन उन्होंने बैनामा के जरिए खरीदी थी। राज्यमंत्री राममूर्ति ने जगेंद्र की मौत के प्रकरण में खुद को बचाने के लिए उन पर झूठा दोषारोपण करके पार्टी से निष्कासित करा दिया। उन्हें भय र्है कि राज्यमंत्री उन्हें और उनके परिवार को नुकसान पहुंचाने के साथ उनकी हत्या भी करा सकते हैं।
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पूर्व विधायक ने कहा कि राज्यमंत्री के खिलाफ शासन से की गई शिकायतें उन्होंने जगेंद्र तक नहीं पहुंचाई। उन्होंने कहा कि जगेंद्र कोई न्यायिक प्रक्रिया के अंग नहीं थे। इसलिए उनसे शिकायतें करने की बात को सिरे से खारिज करते हुए देवेंद्र पाल ने कहा कि जगेंद्र ने स्वयं तेल डालकर खुद को आग नहीं लगाई क्योंकि ऐसा होने पर उनका सिर और चेहरा भी झुलस जाता। उन्होंने इस बात पर अफसोस जाहिर किया कि जो सरकार हत्या के आरोप से घिरे मंत्री राजा भैया से इस्तीफा ले सकती है, वह राज्यमंत्री राममूर्ति के बारे में दोहरा मापदंड अपनाकर उन्हें अभी तक अभयदान दिए हुए है।
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अपने आवास पर पत्रकारों से वार्ता करते हुए पूर्व विधायक ने कहा कि वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने ददरौल सीट पर अपना जनाधार दिखाने के लिए महान दल से चुनाव लड़ा। उनके खाते में 30 हजार वोट आने पर सपा मुखिया ने लखनऊ बुलाकर फिर से सपा में शामिल कर लिया। इसी के साथ वह पूरी निष्ठा से लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए जुट गए और राज्यमंत्री के गलत कामों की शिकायतें सपा मुखिया और सचिवालय स्तर पर करनी शुरू कर दीं।
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देवेंद्र पाल के अनुसार इसी खुन्नस में राज्यमंत्री राममूर्ति ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके उनके विरुद्ध मदनापुर की तीन बीघा जमीन को लेकर लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी, जबकि यह जमीन उन्होंने बैनामा के जरिए खरीदी थी। राज्यमंत्री राममूर्ति ने जगेंद्र की मौत के प्रकरण में खुद को बचाने के लिए उन पर झूठा दोषारोपण करके पार्टी से निष्कासित करा दिया। उन्हें भय र्है कि राज्यमंत्री उन्हें और उनके परिवार को नुकसान पहुंचाने के साथ उनकी हत्या भी करा सकते हैं।
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पूर्व विधायक ने कहा कि राज्यमंत्री के खिलाफ शासन से की गई शिकायतें उन्होंने जगेंद्र तक नहीं पहुंचाई। उन्होंने कहा कि जगेंद्र कोई न्यायिक प्रक्रिया के अंग नहीं थे। इसलिए उनसे शिकायतें करने की बात को सिरे से खारिज करते हुए देवेंद्र पाल ने कहा कि जगेंद्र ने स्वयं तेल डालकर खुद को आग नहीं लगाई क्योंकि ऐसा होने पर उनका सिर और चेहरा भी झुलस जाता। उन्होंने इस बात पर अफसोस जाहिर किया कि जो सरकार हत्या के आरोप से घिरे मंत्री राजा भैया से इस्तीफा ले सकती है, वह राज्यमंत्री राममूर्ति के बारे में दोहरा मापदंड अपनाकर उन्हें अभी तक अभयदान दिए हुए है।