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पीएचसी में प्रसव कराने आई प्रसूता, नवजात की मौत
मिर्जापुर।
Updated Sat, 08 Aug 2015 12:19 AM IST
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स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में अच्छी भली प्रसव करवाने आई एक प्रसूता के 26 घंटे भर्ती रहने के बाद जन्मे शिशु की मृत्यु हो गई। प्रसूता और नवजात शिशु को बचाने के लिए पांच सौ रुपये दवा इलाज के लिए जमा करवाए गए थे।
क्षेत्र के गांव बढ़ऊ मझारा निवासी हफीज ने बताया कि बुधवार को सायं करीब चार बजे उसकी पत्नी रशीदा बेगम को प्रसव पीड़ा होने पर सरकारी एंबुलेंस सेवा 102 को फोन किया गया, लेकिन एंबुलेंस शाम सात बजे तक नहीं पहुंची। प्रसूता की बढ़ती परेशानी को देखकर वह जैसे-तैसे बाइक पर बैठाकर उसको पीएचसी लाया। ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स ने रात करीब आठ बजे रशीदा को भर्ती कर लिया। 26 घंटे प्रसव पीड़ा से तड़पती रशीदा ने बृहस्पतिवार रात्रि लगभग 11 बजे पुत्र को जन्म दिया।
स्टाफ नर्स ने मां-बच्चे को जरूरी दवाएं देने के लिए पांच सौ रुपये जमा करवाए। देर रात्रि नवजात शिशु की हालत बिगड़ गई। नवजात की स्थिति खराब होने पर उसे बाहर ले जाने की सलाह दी गई, लेकिन रात में नवजात के इलाज के लिए न तो स्वास्थ्य केंद्र में कोई डाक्टर मौजूद था और न ही जिला अस्पताल ले जाने के लिए कोई साधन। इलाज के अभाव में उसके नवजात पुत्र की मृत्यु हो गयी।
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दवा और डॉक्टर के अभाव में होती है दुर्घटनाएं
महिलाओं को अक्सर प्रसव के बाद रक्तस्राव शुरू हो जाता है। इसको रोकने के लिए डाक्टर की सलाह पर एथेंसलेट या मेथार्जीन इंजेक्शन की आवश्कता होती है। इस तरह के इंजेक्शन काफी समय से नहीं आये हैं। प्रसूता और नवजात की देखरेख के लिए डाक्टर की जरूरत होती है जो दो बजे के बाद रहते नहीं हैं। इससे इस तरह की समस्यायें आ जाती हैं।
- गुड्डी सागर, स्टाफ नर्स-पीएचसी मिर्जापुर
पीएचसी नाम की है यहां कोई सुविधा नहीं
सरकार के तमाम दावों के बाद भी प्रसूताओं को वे सुविधायें नहीं मिल पा रहीं हैं, जिसकी वे हकदार हैं। प्रसूता रशीदा बेगम को पीएचसी लाने के लिए एंबुलेंस को कई बार फोन किया गया, किंतु एंबुलेंस साढे़ तीन घंटे तक नहीं पहुंची। प्रसूता को बाइक से लाया गया। जिससे उसकी हालत बिगड़ गई थी।
- मुन्नी देवी, आशा कार्यकत्री, ग्राम पंचायत बढऊ मझारा
मोमबत्ती या टार्च की रोशनी में कराए जाते हैं प्रसव
मिर्जापुर। आबादी से दूर पीएचसी में इमरजेंसी सेवा के लिए यहां सरकारी जनरेटर की भी व्यवस्था है, लेकिन उससे पीएचसी में रोशनी किया जाना तो दूर प्रसव कक्ष में भी रोशनी की व्यवस्था नहीं रहती है। मोमबत्ती या टार्च की रोशनी मे प्रसव करवाये जाते हैँ।
दो बजे के बाद नहीं टिकता कोई डाक्टर
सरकार ने ग्रामीणों को आवश्यक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवायें प्रदान किये जाने के लिए स्वास्थ्य केंद्र में प्रभारी चिकित्साधिकारी सहित पांच डाक्टरों को तैनात किया है। किंतु स्वास्थ्य केंद्र मे दो बजे के बाद कोई डॉक्टर नहीं रुकता है। जिससे इमरजेंसी सेवायें भी भगवान भरोसे ही रहती हैं।
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क्षेत्र के गांव बढ़ऊ मझारा निवासी हफीज ने बताया कि बुधवार को सायं करीब चार बजे उसकी पत्नी रशीदा बेगम को प्रसव पीड़ा होने पर सरकारी एंबुलेंस सेवा 102 को फोन किया गया, लेकिन एंबुलेंस शाम सात बजे तक नहीं पहुंची। प्रसूता की बढ़ती परेशानी को देखकर वह जैसे-तैसे बाइक पर बैठाकर उसको पीएचसी लाया। ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स ने रात करीब आठ बजे रशीदा को भर्ती कर लिया। 26 घंटे प्रसव पीड़ा से तड़पती रशीदा ने बृहस्पतिवार रात्रि लगभग 11 बजे पुत्र को जन्म दिया।
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स्टाफ नर्स ने मां-बच्चे को जरूरी दवाएं देने के लिए पांच सौ रुपये जमा करवाए। देर रात्रि नवजात शिशु की हालत बिगड़ गई। नवजात की स्थिति खराब होने पर उसे बाहर ले जाने की सलाह दी गई, लेकिन रात में नवजात के इलाज के लिए न तो स्वास्थ्य केंद्र में कोई डाक्टर मौजूद था और न ही जिला अस्पताल ले जाने के लिए कोई साधन। इलाज के अभाव में उसके नवजात पुत्र की मृत्यु हो गयी।
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दवा और डॉक्टर के अभाव में होती है दुर्घटनाएं
महिलाओं को अक्सर प्रसव के बाद रक्तस्राव शुरू हो जाता है। इसको रोकने के लिए डाक्टर की सलाह पर एथेंसलेट या मेथार्जीन इंजेक्शन की आवश्कता होती है। इस तरह के इंजेक्शन काफी समय से नहीं आये हैं। प्रसूता और नवजात की देखरेख के लिए डाक्टर की जरूरत होती है जो दो बजे के बाद रहते नहीं हैं। इससे इस तरह की समस्यायें आ जाती हैं।
- गुड्डी सागर, स्टाफ नर्स-पीएचसी मिर्जापुर
पीएचसी नाम की है यहां कोई सुविधा नहीं
सरकार के तमाम दावों के बाद भी प्रसूताओं को वे सुविधायें नहीं मिल पा रहीं हैं, जिसकी वे हकदार हैं। प्रसूता रशीदा बेगम को पीएचसी लाने के लिए एंबुलेंस को कई बार फोन किया गया, किंतु एंबुलेंस साढे़ तीन घंटे तक नहीं पहुंची। प्रसूता को बाइक से लाया गया। जिससे उसकी हालत बिगड़ गई थी।
- मुन्नी देवी, आशा कार्यकत्री, ग्राम पंचायत बढऊ मझारा
मोमबत्ती या टार्च की रोशनी में कराए जाते हैं प्रसव
मिर्जापुर। आबादी से दूर पीएचसी में इमरजेंसी सेवा के लिए यहां सरकारी जनरेटर की भी व्यवस्था है, लेकिन उससे पीएचसी में रोशनी किया जाना तो दूर प्रसव कक्ष में भी रोशनी की व्यवस्था नहीं रहती है। मोमबत्ती या टार्च की रोशनी मे प्रसव करवाये जाते हैँ।
दो बजे के बाद नहीं टिकता कोई डाक्टर
सरकार ने ग्रामीणों को आवश्यक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवायें प्रदान किये जाने के लिए स्वास्थ्य केंद्र में प्रभारी चिकित्साधिकारी सहित पांच डाक्टरों को तैनात किया है। किंतु स्वास्थ्य केंद्र मे दो बजे के बाद कोई डॉक्टर नहीं रुकता है। जिससे इमरजेंसी सेवायें भी भगवान भरोसे ही रहती हैं।