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रोजा के दो किशोरों को कबूतरबाजों ने बेचा
रोजा, शाहजहांपुर
Updated Mon, 05 Jan 2015 12:09 AM IST
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डेढ़ माह पहले नौकरी का झांसा देकर ले जाने के बाद दो किशोरों को बंधक बना लिया गया। उनमें से किसी तरह छूटकर आए राजेश गुप्ता की बताई कहानी के बाद पुलिस ने मठिया कॉलोनी में राजू के यहां छापा मारा तो वहां हापुड़ का 12 साल का विजय बरामद हुआ और राजू को हिरासत में ले लिया है, जबकि राजेश के साथ ले जाए गए मोनू गुप्ता के देवबंद (सहारनपुर) में बंधक होने की बात बताई गई है। मोनू और राजेश को वहां बेचा गया था। मोनू की बरामदगी को एक टीम सोमवार को देवबंद जाएगी। पुलिस ने फिलहाल मामला दर्ज नहीं किया, मगर इतना मानना है कि यह एक बड़ा गैंग हो सकता है।
कबूतरबाजी का यह मामला आदर्श नगर की गली संख्या 15 के रहने वाले धर्मेंद्र गुप्ता के थाने पहुंचने के बाद हुआ। दी गई तहरीर में धर्मेंद्र का आरोप था कि उसके 16 वर्षीय भाई मोनू और मोहल्ले के ही राजेश गुप्ता को करीब डेढ़ महीने पहले राजू और उसका दोस्त भरत नौकरी का झांसा देकर साथ ले गए थे। तब से दोनों का कोई सुराग नहीं लगा था। अब राजेश किसी तरह बचकर भागने के बाद शनिवार रात यहां घर पहुंचा और मोनू को बेचे जाने की बात बताई। राजेश का कहना था कि मोनू को देवबंद इलाके में एक फार्म हाउस पर बंधुआ मजदूर के रूप में काम लिया जा रहा है।
धर्मेंद्र से पूरा मामला जानने के बाद रोजा पुलिस ने रविवार सुबह राजू के घर पर छापा मारा तो वहां विजय मिला। वह हापुड़ में चुंगीपैरा (थाना कोतवाली) का रहने वाला है। पुलिस ने राजू को गिरफ्तार कर लिया, जबकि भरत मौके से फरार हो गया।
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नशे की हालत में रखा जाता था विजय को
राजू के घर से बरामद विजय ने बताया कि वह ट्रेनों में झाड़ू लगाता है। नशे की हालत में विजय इतना ही बता पाया कि उसे चार दिन पहले राजू के यहां लाया गया था। यहां खाने के बाद राजू उसे नशा देकर बेहोश कर देता था। यह नशा पंचर जोड़ने वाले पेस्ट को गर्म करके उसके धुएं से दिया जाता था।
चंगुल से बचकर आए राजेश गुप्ता ने पुलिस को बताया कि उसे मुजफ्फरनगर के चरखी इलाके में इकरार के हाथों दस हजार रुपये में बेचा गया था। इकरार उससे दिन भर बंधुआ मजदूरों की तरह काम कराता था। दिन में एक बार मूली के पत्तों की भुजिया और दो रोटी देता था, रात में एक गोदाम में बन्द कर दिया जाता था। गोदाम के बाहर असलाहधारियों का पहरा रहता था। पिछले डेढ़ माह मे मजदूरी के नाम पर उसे एक भी पैसा नहीं दिया गया। गन्ने की छिलाई करते समय वह शुक्रवार को खेतों से होता हुआ सहारनपुर आया। फिर ट्रेन पकड़कर शनिवार रात रोजा पहुंचा। राजेश के मुताबिक इकरार के फार्म हाउस पर कई किशोर बंधुआ मजदूर बनाकर रखे गए हैं। बधुवा मजदूर है जिनको कड़े पहरे मे रखा जाता है।
कहीं आपराधिक प्रवृत्ति का तो नहीं है राजू !
नौकरी का झांसा देकर किशोरों को को बेचने वाला राजू को पुलिस शातिर किस्म का मान रही है। उसने अपना मूल पता हरिद्वार का बताया है, जबकि पुराने एक मामले में घायल हुए राजू ने अपना पता बिहार का बताया था। पुलिस उसकी अपराधिक गतिविधियां पता लगाने में जुट गई है। रविवार को पुलिस बारावफात के जुलूस में व्यस्त होने के कारण कोई खास पूछताछ नहीं कर सकी है, लेकिन राजू और उसके साथी भरत के बारे में पुलिस बारीकी से छानबीन करेगी।
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कबूतरबाजी का यह मामला आदर्श नगर की गली संख्या 15 के रहने वाले धर्मेंद्र गुप्ता के थाने पहुंचने के बाद हुआ। दी गई तहरीर में धर्मेंद्र का आरोप था कि उसके 16 वर्षीय भाई मोनू और मोहल्ले के ही राजेश गुप्ता को करीब डेढ़ महीने पहले राजू और उसका दोस्त भरत नौकरी का झांसा देकर साथ ले गए थे। तब से दोनों का कोई सुराग नहीं लगा था। अब राजेश किसी तरह बचकर भागने के बाद शनिवार रात यहां घर पहुंचा और मोनू को बेचे जाने की बात बताई। राजेश का कहना था कि मोनू को देवबंद इलाके में एक फार्म हाउस पर बंधुआ मजदूर के रूप में काम लिया जा रहा है।
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धर्मेंद्र से पूरा मामला जानने के बाद रोजा पुलिस ने रविवार सुबह राजू के घर पर छापा मारा तो वहां विजय मिला। वह हापुड़ में चुंगीपैरा (थाना कोतवाली) का रहने वाला है। पुलिस ने राजू को गिरफ्तार कर लिया, जबकि भरत मौके से फरार हो गया।
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नशे की हालत में रखा जाता था विजय को
राजू के घर से बरामद विजय ने बताया कि वह ट्रेनों में झाड़ू लगाता है। नशे की हालत में विजय इतना ही बता पाया कि उसे चार दिन पहले राजू के यहां लाया गया था। यहां खाने के बाद राजू उसे नशा देकर बेहोश कर देता था। यह नशा पंचर जोड़ने वाले पेस्ट को गर्म करके उसके धुएं से दिया जाता था।
चंगुल से बचकर आए राजेश गुप्ता ने पुलिस को बताया कि उसे मुजफ्फरनगर के चरखी इलाके में इकरार के हाथों दस हजार रुपये में बेचा गया था। इकरार उससे दिन भर बंधुआ मजदूरों की तरह काम कराता था। दिन में एक बार मूली के पत्तों की भुजिया और दो रोटी देता था, रात में एक गोदाम में बन्द कर दिया जाता था। गोदाम के बाहर असलाहधारियों का पहरा रहता था। पिछले डेढ़ माह मे मजदूरी के नाम पर उसे एक भी पैसा नहीं दिया गया। गन्ने की छिलाई करते समय वह शुक्रवार को खेतों से होता हुआ सहारनपुर आया। फिर ट्रेन पकड़कर शनिवार रात रोजा पहुंचा। राजेश के मुताबिक इकरार के फार्म हाउस पर कई किशोर बंधुआ मजदूर बनाकर रखे गए हैं। बधुवा मजदूर है जिनको कड़े पहरे मे रखा जाता है।
कहीं आपराधिक प्रवृत्ति का तो नहीं है राजू !
नौकरी का झांसा देकर किशोरों को को बेचने वाला राजू को पुलिस शातिर किस्म का मान रही है। उसने अपना मूल पता हरिद्वार का बताया है, जबकि पुराने एक मामले में घायल हुए राजू ने अपना पता बिहार का बताया था। पुलिस उसकी अपराधिक गतिविधियां पता लगाने में जुट गई है। रविवार को पुलिस बारावफात के जुलूस में व्यस्त होने के कारण कोई खास पूछताछ नहीं कर सकी है, लेकिन राजू और उसके साथी भरत के बारे में पुलिस बारीकी से छानबीन करेगी।