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खुराफातियों को अखरने लगा शहर का अमन-चैन
शाहजहांपुर
Updated Sun, 08 Mar 2015 12:23 AM IST
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इस बार की होली में कुछ ऐसे भी अनचाहे मौके आ गए, जब लोग जोश में होश खो बैठे। नतीजा यह रहा कि रंगों और प्रेमभाव का यह त्योहार बेरंग होता दिखा। अमर शहीद पंडित राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खां की सांझी शहादत-सांझी बिरासत को दिलों में संजोने वाला यह शहर पूरे देश में आपसी भाईचारा के लिए भी जाना जाता है। इस बार इस शहर को किसी की नजर जरूर लगी। तभी तो होली जैसे पवित्र त्योहार पर यहां का अमन-चैन खंडित होते-होते बचा है। यह एक तरह से संदेश भी है, उन नापाक इरादों वाले हुड़दंगियों के लिए, जो नहीं चाहते कि कोई तीज-त्योहार शांतिपूर्वक संपन्न हो।
मामला लाट साहब के जुलूस को लेकर ही बिगड़ा। बड़े लाट साहब यानी चौक वाले जुलूस के अंतिम पड़ाव (सरोदी बंगला) पर जहां पत्थरबाजी हो जाने से माहौल बिगड़ते बचा, वहीं पुत्तूलाल चौराहा के समीप भी गुझियों वाले त्योहार में खटास पैदा हो गई। सरोदी बंगला को हमेशा ही संवेदनशील माना जाता रहा है। यह अलग बात है कि यहां क्षेत्रीय लोग (हिंदू-मुस्लिम) आपसी सूझबूझ से हर बार लाटसाहब के जुलूस को जैसे-तैसे संपन्न करा ही लेते हैं, लेकिन ऐसा हरबार नहीं हो सकता। इसी का नतीजा था कि शुक्रवार को आखिर पत्थरबाजी हो ही गई। इससे लोगों को सबक लेना चाहिए।
वहीं, सरायकाइयां से निकलने वाले छोटे लाटसाहब के जुलूस के दौरान भी पुत्तूलाल चौराहा पर किसी खुराफाती ने एक धार्मिक स्थल पर कुछ उछाल दिया, जिससे क्षेत्र में तनाव पैदा हो गया। यहां भी स्थिति बिगड़ते ही बची। बाद में दोनों स्थानों पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने समझा-बुझाकर लोगों को शांति किया, लेकिन ऐसा कब तक चलेगा, इस पर भी विचार किया जाना चाहिए, ताकि त्योहार की गरिमा बनी रहे और दूसरों की भावनाएं भी आहत न हों और इस बात का ध्यान एक पक्ष को ही नहीं, दोनों पक्षों को रखना होगा। तभी अमन-चैन बरकरार रखा जा सकता है।
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मामला लाट साहब के जुलूस को लेकर ही बिगड़ा। बड़े लाट साहब यानी चौक वाले जुलूस के अंतिम पड़ाव (सरोदी बंगला) पर जहां पत्थरबाजी हो जाने से माहौल बिगड़ते बचा, वहीं पुत्तूलाल चौराहा के समीप भी गुझियों वाले त्योहार में खटास पैदा हो गई। सरोदी बंगला को हमेशा ही संवेदनशील माना जाता रहा है। यह अलग बात है कि यहां क्षेत्रीय लोग (हिंदू-मुस्लिम) आपसी सूझबूझ से हर बार लाटसाहब के जुलूस को जैसे-तैसे संपन्न करा ही लेते हैं, लेकिन ऐसा हरबार नहीं हो सकता। इसी का नतीजा था कि शुक्रवार को आखिर पत्थरबाजी हो ही गई। इससे लोगों को सबक लेना चाहिए।
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वहीं, सरायकाइयां से निकलने वाले छोटे लाटसाहब के जुलूस के दौरान भी पुत्तूलाल चौराहा पर किसी खुराफाती ने एक धार्मिक स्थल पर कुछ उछाल दिया, जिससे क्षेत्र में तनाव पैदा हो गया। यहां भी स्थिति बिगड़ते ही बची। बाद में दोनों स्थानों पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने समझा-बुझाकर लोगों को शांति किया, लेकिन ऐसा कब तक चलेगा, इस पर भी विचार किया जाना चाहिए, ताकि त्योहार की गरिमा बनी रहे और दूसरों की भावनाएं भी आहत न हों और इस बात का ध्यान एक पक्ष को ही नहीं, दोनों पक्षों को रखना होगा। तभी अमन-चैन बरकरार रखा जा सकता है।
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