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नाबालिग को अगवा कर रेप  के मामले में चार को सजा

Thu, 28 Jul 2016 11:22 PM IST
ब्यूरो/शाहजहांपुर
ब्यूरो/शाहजहांपुर Updated Thu, 28 Jul 2016 11:22 PM IST
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four sentenced in rape and kidnapped
दुष्कर्म
रोजा थाना क्षेत्र के ग्राम विलरिया निवासी चार युवकों को दूसरे गांव की नाबालिग लड़की को अगवा कर ले जाने और रेप करने के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट (महिला आपराधिक वाद) की अपर सत्र न्यायाधीश प्रतिमा श्रीवास्तव ने बृहस्पतिवार को दोषी सिद्ध अभियुक्त करार देते हुए अपना फैसला सुनाया। मुख्य अभियुक्त रवि उर्फ निशेष गौरव को सात साल की कैद हुई है। उस पर 16 हजार रुपये जुर्माना लगा है। सह अभियुक्त रमन, रिंकू और गब्बर को पांच-पांच साल कैद के साथ ही 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा हुई है।
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घटना के समय पीड़ित की उम्र 15 वर्ष थी। इसके परिवार के दो मकान गांव में थे। एक में यह अपने माता-पिता संग रहती थी और यहां से करीब 100 मीटर दूर दूसरे घर में दादा-दादी रहते थे। वर्ष 2011 में 25 मार्च की रात नौ बजे वह अपने दादा के घर से अपने घर लौट रही थी और अचानक लापता हो गई। पीड़ित के पिता ने अगले दिन रोजा थाने में सूचना दी, लेकिन पुलिस हरकत में नहीं आई। बाद में पीड़ित के पिता को पता चला कि उसके साथ इंश्योरेंस का काम करने वाला विलरिया गांव का रवि उनकी बेटी को अगवा कर ले गया है। वह इनके घर आया-जाया करता था। आरोपी के गांव के दो अन्य युवक भी घटना के बाद से लापता थे। थाने पर इसकी भी सूचना दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई तो पीड़ित के पिता ने एसपी से फरियाद की। 26 मई 2011 को थाने में घटना के संबंध में प्राथमिकी दर्ज हुई और विवेचना तत्कालीन एसओ सियाराम वर्मा को सौंपी गई।
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बाद में पुलिस ने दबिश देकर मुख्य आरोपी समेत चार युवकों को धर दबोचा और नाबालिग लड़की को बरामद कर मेडिकल कराया। फिर पुलिस ने चारों के खिलाफ आईपीसी की धारा 363, 366 और 376 के तहत कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। बचाव पक्ष के वकील ओमेंद्र सिंह और सरकारी वकील उमेश चंद्र गुर्जर के तर्कों, प्रस्तुत साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट और सात गवाहों के बयानों का अवलोकन करने के बाद न्यायाधीश प्रतिमा श्रीवास्तव ने पाया कि घटना के समय पीड़ित अव्यस्क थी और उसके साथ जबरन दुराचार में आईपीसी की धारा 376 में रवि मुख्य अभियुक्त है और बाकी तीनों आईपीसी की धारा 363 के तहत सह अभियुक्त।
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