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सिंथेटिक दूध से पूरी हो रही त्योहारी मांग
अमर उजाला ब्यूरो पुवायां।
Updated Tue, 28 Feb 2017 11:10 PM IST
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synthetic milk
- फोटो : अमर उजाला
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धड़ल्ले से बिक रहा है सिंथेटिक दूध और मावा
होली का त्योहार नजदीक होने से दूध की डिमांड बढ़ गई है। दूध की कमी को सिंथेटिक मिल्क से पूरा किया जा रहा है। मिलावटी दूध की गांवों से लेकर कस्बे तक धड़ल्ले से सप्लाई की जा रहा है।
मार्च से जून तक दूध का उत्पादन बेहद कम हो जाता है। इस अवधि में पशु भी दूध देना कम कर देते हैं, जबकि दूध की डिमांड बढ़ जाती है। कम उत्पादन और ज्यादा डिमांड को पूरा करने के लिए दूध का कारोबार करने वाले लोग दूध में मिलावट और सिथेंटिक दूध का धंधा करने लगते हैं। दूध में मिलावट बढ़ने का एक प्रमुख कारण दूध के सैंपल नहीं भरे जाना भी है।
दूध की बढ़ती डिमांड को देख क्षेत्र में कृत्रिम यानी सिंथेटिक दूध के कारोबारी सक्रिय हो गए है। यह दूध शैंपू, कास्टिक सोडा, यूरिया, डीएस की गोली और चिकनापन लाने के लिए रिफाइंड तेल मिलाकर तैयार किया जाता है। इस नकली दूध को बराबर अनुपात में असली दूध में मिलाकर होटलों और घरों को सप्लाई किया जाता है। असली दूध में सिंथेटिक दूध मिलाने से इसकी पहचान कठिन हो जाती है। अगर इसका फैट निकाला जाए तो वह भी बेहतरीन निकलता है। शैंपू से झाग तो खूब बनते है और स्वाद में भी कोई खास फर्क नहीं पड़ता। प्रशासन की निगाहें अभी तक दूध के इन कारोबारियों पर नहीं पड़ी हैं। इसके अलावा कुछ डेयरी वाले और पशु पालक जन स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन पशुओं को लगाते हैं। प्रतिबंध के बावजूद यहां यह इंजेक्शन खूब बेचा जा रहा है। एसडीएम रामशंकर का कहना है कि इस तरह की शिकायत मिली तो कार्रवाई की जाएगी।
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होली का त्योहार नजदीक होने से दूध की डिमांड बढ़ गई है। दूध की कमी को सिंथेटिक मिल्क से पूरा किया जा रहा है। मिलावटी दूध की गांवों से लेकर कस्बे तक धड़ल्ले से सप्लाई की जा रहा है।
मार्च से जून तक दूध का उत्पादन बेहद कम हो जाता है। इस अवधि में पशु भी दूध देना कम कर देते हैं, जबकि दूध की डिमांड बढ़ जाती है। कम उत्पादन और ज्यादा डिमांड को पूरा करने के लिए दूध का कारोबार करने वाले लोग दूध में मिलावट और सिथेंटिक दूध का धंधा करने लगते हैं। दूध में मिलावट बढ़ने का एक प्रमुख कारण दूध के सैंपल नहीं भरे जाना भी है।
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दूध की बढ़ती डिमांड को देख क्षेत्र में कृत्रिम यानी सिंथेटिक दूध के कारोबारी सक्रिय हो गए है। यह दूध शैंपू, कास्टिक सोडा, यूरिया, डीएस की गोली और चिकनापन लाने के लिए रिफाइंड तेल मिलाकर तैयार किया जाता है। इस नकली दूध को बराबर अनुपात में असली दूध में मिलाकर होटलों और घरों को सप्लाई किया जाता है। असली दूध में सिंथेटिक दूध मिलाने से इसकी पहचान कठिन हो जाती है। अगर इसका फैट निकाला जाए तो वह भी बेहतरीन निकलता है। शैंपू से झाग तो खूब बनते है और स्वाद में भी कोई खास फर्क नहीं पड़ता। प्रशासन की निगाहें अभी तक दूध के इन कारोबारियों पर नहीं पड़ी हैं। इसके अलावा कुछ डेयरी वाले और पशु पालक जन स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन पशुओं को लगाते हैं। प्रतिबंध के बावजूद यहां यह इंजेक्शन खूब बेचा जा रहा है। एसडीएम रामशंकर का कहना है कि इस तरह की शिकायत मिली तो कार्रवाई की जाएगी।
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