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अशक्तता में जीवन यापन नहीं, धंधा बनी भिक्षावृत्ति
पीयूष दुबे, शाहजहांपुर
Updated Tue, 02 Jun 2015 11:58 PM IST
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भिक्षावृत्ति के जरिए रोजाना सैकड़ों रुपये कमाने के चक्कर में भिखारियों की संख्या बढ़ती जा रही है। पुलिस की अनदेखी के चलते भिखारी रेलवे स्टेशन, रोडवेज बस अड्डे और धार्मिक स्थलों पर भीख मांगने का धंधा कर रहे हैं। शहर में ज्यादातर भिखारी तो हट्टे-कट्टे हैं। उनसे काम-धंधा न करने की वजह पूछ लो तो तपाक से कहते हैं, देना है तो एक रुपया दे दो। नसीहत मत दो।
शहर, गांव, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च, तिराहा, चौराहा, रेलवे स्टेशन, रोडवेज, धर्मशाला आदि स्थानों पर आप सभी ने अक्सर लोगों को भीख मांगते देखा होगा। किसी के शरीर में जख्म होते हैं, तो कोई अपाहिज होता है। वहीं कुछ वृद्घ पुरुष एवं महिलाएं अपनी अवस्था की दुहाई देकर भीख मांगते हैं, तो कुछ हट्टे-कट्टे लोग साधू और फकीर का वेश रखकर भिक्षाव़ृत्ति करते हैं। यही नहीं भीख मांगने वालों में अब नन्हे-मुन्ने बच्चे भी शामिल हो गए, जो भूखे होने की बात कहकर भीख मांगते दिख जाते हैं। भिक्षावृत्ति के धंधे में लिप्त लोग रोजाना सैकड़ों रुपये कमा रहे हैं, क्योंकि भिक्षावृत्ति अब केवल दो वक्त की रोटी की जुगाड़ करने तक सीमित नहीं रह गई है। यह चोखा धंधा बनती जा रही है। भिखारियों की रोजाना की अनुमानित आमदनी 100 से लेकर 500 रुपये तक रहती है। खाना अलग से मिल जाता है।
...बेटा घर जाना है टिकट के पैसे दे दो
शहर के रेलवे स्टेशन के आसपास अक्सर एक अधेड़ महिला साफ-सुथरी वेष-भूषा में टिकट लेने के लिए लोगों से यह कहती नजर आ जाती है कि Òबेटा घर जाना है, टिकट के पैसे दे दोÓ। यह वृद्घ महिला कभी भी 10 रुपये से कम नहीं लेती है। साफ-सुथरी छवि देखकर अक्सर लोग 10-20 रुपये दे देते हैं। यह महिला रेलवे फटकिया के पास स्थित ढाबे पर 10-10 के नोट देकर सौ या पांच सौ रुपये के नोट ले जाती है। दुकानदार की माने तो कम से कम पांच सौ रुपये प्रतिदिन लेे जाती है।
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मीट और शराब के आदी हैं कई भिखारी
शहर में विभिन्न स्थानों पर दिन में भीख मांगने वाले कई भिखारी दिन ढले अक्सर मयखानों और होटलों के बाहर नजर आते हैं, जो सुरा के नशे में झूमते दिखते हैं। साथ ही मीट की दुकानों पर कई भिखारी ग्राहक जाते हैं। इन लोगों का रोजाना का खर्च कम से कम दो सौ रुपये के करीब रहता है।
सरकारी आंकड़ों में भिखारियों की संख्या
---------------------------
तहसील भिखारियों की संख्या
सदर 111
जलालाबाद 19
पुवायां 15
तिलहर 89
कुल 234
जिले में हैं करीब एक हजार भिखारी
करीब तीन साल भिखारियों की गणना की गई थी, तब भिखारियों की संख्या करीब 234 आंकी गई थी। सोच यह थी कि भिखारियों को प्रदेश सरकार की ओर से बनवाए गए पुनर्वास केंद्रों में भेजा जाए। जिले में वास्तविक संख्या पर नजर डाली जाए तो करीब एक हजार होगी।
Òभिखारियों को पुनर्वास केंद्रों पर भेजे जाने के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है। यदि कोई ऐसा आदेश मिलता है तो उस पर भी कड़ाई के साथ अमल कराया जाएगा।Ó
-बबलू कुमार, एसपी
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शहर, गांव, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च, तिराहा, चौराहा, रेलवे स्टेशन, रोडवेज, धर्मशाला आदि स्थानों पर आप सभी ने अक्सर लोगों को भीख मांगते देखा होगा। किसी के शरीर में जख्म होते हैं, तो कोई अपाहिज होता है। वहीं कुछ वृद्घ पुरुष एवं महिलाएं अपनी अवस्था की दुहाई देकर भीख मांगते हैं, तो कुछ हट्टे-कट्टे लोग साधू और फकीर का वेश रखकर भिक्षाव़ृत्ति करते हैं। यही नहीं भीख मांगने वालों में अब नन्हे-मुन्ने बच्चे भी शामिल हो गए, जो भूखे होने की बात कहकर भीख मांगते दिख जाते हैं। भिक्षावृत्ति के धंधे में लिप्त लोग रोजाना सैकड़ों रुपये कमा रहे हैं, क्योंकि भिक्षावृत्ति अब केवल दो वक्त की रोटी की जुगाड़ करने तक सीमित नहीं रह गई है। यह चोखा धंधा बनती जा रही है। भिखारियों की रोजाना की अनुमानित आमदनी 100 से लेकर 500 रुपये तक रहती है। खाना अलग से मिल जाता है।
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...बेटा घर जाना है टिकट के पैसे दे दो
शहर के रेलवे स्टेशन के आसपास अक्सर एक अधेड़ महिला साफ-सुथरी वेष-भूषा में टिकट लेने के लिए लोगों से यह कहती नजर आ जाती है कि Òबेटा घर जाना है, टिकट के पैसे दे दोÓ। यह वृद्घ महिला कभी भी 10 रुपये से कम नहीं लेती है। साफ-सुथरी छवि देखकर अक्सर लोग 10-20 रुपये दे देते हैं। यह महिला रेलवे फटकिया के पास स्थित ढाबे पर 10-10 के नोट देकर सौ या पांच सौ रुपये के नोट ले जाती है। दुकानदार की माने तो कम से कम पांच सौ रुपये प्रतिदिन लेे जाती है।
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मीट और शराब के आदी हैं कई भिखारी
शहर में विभिन्न स्थानों पर दिन में भीख मांगने वाले कई भिखारी दिन ढले अक्सर मयखानों और होटलों के बाहर नजर आते हैं, जो सुरा के नशे में झूमते दिखते हैं। साथ ही मीट की दुकानों पर कई भिखारी ग्राहक जाते हैं। इन लोगों का रोजाना का खर्च कम से कम दो सौ रुपये के करीब रहता है।
सरकारी आंकड़ों में भिखारियों की संख्या
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तहसील भिखारियों की संख्या
सदर 111
जलालाबाद 19
पुवायां 15
तिलहर 89
कुल 234
जिले में हैं करीब एक हजार भिखारी
करीब तीन साल भिखारियों की गणना की गई थी, तब भिखारियों की संख्या करीब 234 आंकी गई थी। सोच यह थी कि भिखारियों को प्रदेश सरकार की ओर से बनवाए गए पुनर्वास केंद्रों में भेजा जाए। जिले में वास्तविक संख्या पर नजर डाली जाए तो करीब एक हजार होगी।
Òभिखारियों को पुनर्वास केंद्रों पर भेजे जाने के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है। यदि कोई ऐसा आदेश मिलता है तो उस पर भी कड़ाई के साथ अमल कराया जाएगा।Ó
-बबलू कुमार, एसपी