{"_id":"571bc93d4f1c1bfa248b4fbe","slug":"after-all-was-lost-to-injuries","type":"story","status":"publish","title_hn":"आखिर इतनी गुम चोटें लगीं कैसे","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
आखिर इतनी गुम चोटें लगीं कैसे
ब्यूरो /शाहजहांपुर
Updated Sun, 24 Apr 2016 12:59 AM IST
विज्ञापन
आखिर इतनी गुम चोटें लगीं कैसे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भले ही रोजा पावर प्लांट प्रबंधन और पुलिस दोनों सुरक्षा गार्डों की मौत को हादसा बता रहे हैं लेकिन क्राइम सीन और डाक्टरों के पैनल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मौत पर सवाल खड़े कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार दोनों शवों के सिर, सीने और पैर में कई गुम चोटें हैं। गुम चोटें तब ज्यादा होती हैं जब मार पिटाई की गई है। हालांकि गुम चोटों के पीछे वाहन का धक्का लगने का कारण माना जा रहा है लेकिन मार पिटाई से भी इंकार नहीं किया जा सकता। हालांकि आरोप के अनुसार बुलेट इंजरी को सिरे से खारिज किया गया है। यह पोस्टमार्टम डा. एके सिंह और डा. केके वर्मा के पैनल ने किया है। सवाल यह है कि अगर ट्रक ने टक्कर मारी तो इतनी गुम चोटें लगीं कैसे। मदन का शव सड़क पर मिला। उसके पैर में फ्रैक्चर मिला है। अगर ट्रक जैसा वाहन उसके ऊपर से गुजरा तो खून के निशान क्यों नहीं मिला। अगर ट्रक की टक्कर मदन को लगी और वह उछलकर सिर या सीने के बल दूर गिरा तो लीवर और किडनी का क्षतिग्रस्त होना माना जा सकता है। माना जा सकता है कि वह सिर के बल गिरा और चेहरे पर चोट लगी लेकिन सवाल उठता है कि पैर में फ्रैक्चर कैसे हुआ। जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार वाहन शरीर के ऊपर से नहीं गुजरा है। नाला सड़क के किनारे है। मदन का शव पहले और मुकेश का बाद में पड़ा था। ऐसे में मुकेश को भी जोरदार टक्कर लगी होगी तभी वह नाले में गिरा होगा लेकिन उसके शरीर में उतने घाव नहीं मिले जितने मदन के। मुकेश की राइफल उसके पास पड़ी थी लेकिन सवाल उठता है कि दोनों के जूते उनके शरीर से कैसे निकले और उनसे दूर कैसे पहुंचे।
क्राइम सीन
ग्रामीणों के अनुसार मदन नाले के ऊपरी किनारे पर पड़ा हुआ था जबकि मुकेश सूखे नाले के अंदर गिरा था। दोनों एक ही साइकिल पर थे। साइकिल शव की दिशा में करीब 15 मीटर पीछे पड़ी थी। मुकेश का पास राइफल थी जो उसके शव के पास कुछ दूरी पर नाले में थी। हालांकि दोनों के जूते करीब 50 मीटर पहले पड़े मिले। ये सभी सामान सड़क और नाले के बीच में पड़े थे। घटनास्थल और आसपास खून के निशान नहीं मिले। ग्रामीणों के अनुसार दोनों के शरीर पर ऊपरी चोट के निशान थे। दोनों के चेहरे पर खून लगा था लेकिन घटना स्थल पर खून नहीं था।
मृतकों के परिवार में मचा कोहराम
रोजा/रौसर कोठी। मुकेश और मदन की मौत के बाद दोनों परिवारों में कोहराम मच गया। मौके पर और पोस्टमार्टम हाउस पर दोनों के परिवारजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। मृतक मुकेश के दो बच्चे पांच वर्षीय बेटा बिट्टू व एक वर्षीय बेटी प्रियंका है। मदन लाल के चार बच्चे 20 वर्षीय प्रदीप, 18 वर्षीय कुलदीप, 15 वर्षीय संजीव और 12 वर्षीय दीपा हैं। मदन ही परिवार का एकमात्र सहारा था।
विज्ञापन
ठेकेदारी की रंजिश तो नहीं!
दोनों सुरक्षा गार्डों की मौत के पीछे की सच्चाई क्या है, इस पर तो सब चुप हैं लेकिन प्लांट परिसर में ठेकेदारों के बीच रंजिश का किस्सा भी सामने आया है। ये दोनों गार्ड जिस ठेकेदार के मातहत थे, उसका दूसरे द्वारा विरोध किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि दूसरा पक्ष इन्हें हटवाकर अपने लोगों को रखवाने का दबाव बना रहा था। मृत मदन के पिता रामस्वरूप का कहना है कि उनके बेटे की मौत सामान्य हादसे वाली नहीं हुई है। यह प्लांट में ठेकेदारों की लड़ाई का परिणाम है। आरोप लगाया कि प्लांट परिसर मेें पीटकर मारने के बाद दोनों को मरा हुआ जानकर बाहर फेंका गया।
सिक्योरिटी गार्ड मदनपाल और मुकेश मिश्रा प्लांट में कांट्रेक्टर राजीव सिंह के जरिए तैनात थे। उनकी ड्यूटी रात आठ बजे से सुबह चार बजे तक मेन गेट के बाहर से बाउंड्री होते हुए राख के डंपिंग ग्राउंड तक निगरानी की थी। वह शनिवार सुबह करीब पौने चार बजे कंट्रोल रूम में रिपोर्ट करने के लिए साइकिल से लौट रहे थे। इसी दौरान मुख्य प्रशासनिक भवन के गेट से पहले एक ट्रक की चपेट में आ गए। मदन की मौके पर ही मौत हो गई जबकि मुकेश की अस्पताल ले जाते समय। मंत्री और एमएलसी भी नाराज परिवारीजनों से मिले और वार्ता हुई। कांट्रेक्ट के तहत तय बीमा रकम आश्रितों को दिलाई जाएगी। प्लांट की ओर से दोनों परिवारों को तत्काल पांच-पांच लाख रुपये का एकाउंट पेई चेक दे दिया गया। दोनों आश्रित परिवार के एक-एक सक्षम व्यक्ति को ठेकेदार के मातहत नौकरी दी जाएगी।
- धर्मेंद्र सिंह, एचआर हेड, रिलायंस पावर प्लांट, रोजा
सीसीटीवी कैमरे में करीब पौने चार बजे दोनों गार्डों को अज्ञात ट्रक द्वारा टक्कर मारने का फुटेज मिला है। दोनों के सिर पर ज्यादा चोटें थीं और पैर का हिस्सा कुचला हुआ था जिसमें फ्रैक्चर भी था। मुआवजे की मांग पर दोनों के परिवारीजन ग्रामीणों के साथ सड़क पर आ गए थे। राज्यमंत्री और एमएलसी मौके पर पहुंचे और प्रबंधन से वार्ता कर दोनों परिवारों को बीमा की राशि के अलावा पांच-पांच लाख रुपये दिलाना तय किया। दोनों परिवारों के एक-एक सदस्यों को नौकरी देने का भरोसा दिया गया है। जिस ठेकेदार के मातहत दोनों तैनात थे, उसकी ओर से भी चंदा जुटाकर दो-दो लाख रुपये पीड़ित परिवारों को देने की बात हुई है।
- विजय शंकर मिश्रा, सीओ सिटी, शाहजहांपुर
सुबह आठ बजे मुझे रोजा प्लांट के बाहर सड़क पर शव रखकर जाम लगाने की सूचना मिली। अपने विधानसभा का मामला होने के कारण वहां पहुंचा। एमएलसी संजय मिश्रा भी आ गए। परिवारजनों और प्लांट अधिकारियों से बात कर मृतक आश्रित परिवारों के एक-एक सदस्यों को रोजगार देने के लिए मनाया। बीमे की राशि समेत करीब 12-12 लाख रुपये दोनों मृतकों के आश्रितों को देना तय हुआ।
- राममूर्ति सिंह वर्मा, राज्यमंत्री
विज्ञापन
क्राइम सीन
ग्रामीणों के अनुसार मदन नाले के ऊपरी किनारे पर पड़ा हुआ था जबकि मुकेश सूखे नाले के अंदर गिरा था। दोनों एक ही साइकिल पर थे। साइकिल शव की दिशा में करीब 15 मीटर पीछे पड़ी थी। मुकेश का पास राइफल थी जो उसके शव के पास कुछ दूरी पर नाले में थी। हालांकि दोनों के जूते करीब 50 मीटर पहले पड़े मिले। ये सभी सामान सड़क और नाले के बीच में पड़े थे। घटनास्थल और आसपास खून के निशान नहीं मिले। ग्रामीणों के अनुसार दोनों के शरीर पर ऊपरी चोट के निशान थे। दोनों के चेहरे पर खून लगा था लेकिन घटना स्थल पर खून नहीं था।
विज्ञापन
मृतकों के परिवार में मचा कोहराम
रोजा/रौसर कोठी। मुकेश और मदन की मौत के बाद दोनों परिवारों में कोहराम मच गया। मौके पर और पोस्टमार्टम हाउस पर दोनों के परिवारजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। मृतक मुकेश के दो बच्चे पांच वर्षीय बेटा बिट्टू व एक वर्षीय बेटी प्रियंका है। मदन लाल के चार बच्चे 20 वर्षीय प्रदीप, 18 वर्षीय कुलदीप, 15 वर्षीय संजीव और 12 वर्षीय दीपा हैं। मदन ही परिवार का एकमात्र सहारा था।
विज्ञापन
ठेकेदारी की रंजिश तो नहीं!
दोनों सुरक्षा गार्डों की मौत के पीछे की सच्चाई क्या है, इस पर तो सब चुप हैं लेकिन प्लांट परिसर में ठेकेदारों के बीच रंजिश का किस्सा भी सामने आया है। ये दोनों गार्ड जिस ठेकेदार के मातहत थे, उसका दूसरे द्वारा विरोध किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि दूसरा पक्ष इन्हें हटवाकर अपने लोगों को रखवाने का दबाव बना रहा था। मृत मदन के पिता रामस्वरूप का कहना है कि उनके बेटे की मौत सामान्य हादसे वाली नहीं हुई है। यह प्लांट में ठेकेदारों की लड़ाई का परिणाम है। आरोप लगाया कि प्लांट परिसर मेें पीटकर मारने के बाद दोनों को मरा हुआ जानकर बाहर फेंका गया।
सिक्योरिटी गार्ड मदनपाल और मुकेश मिश्रा प्लांट में कांट्रेक्टर राजीव सिंह के जरिए तैनात थे। उनकी ड्यूटी रात आठ बजे से सुबह चार बजे तक मेन गेट के बाहर से बाउंड्री होते हुए राख के डंपिंग ग्राउंड तक निगरानी की थी। वह शनिवार सुबह करीब पौने चार बजे कंट्रोल रूम में रिपोर्ट करने के लिए साइकिल से लौट रहे थे। इसी दौरान मुख्य प्रशासनिक भवन के गेट से पहले एक ट्रक की चपेट में आ गए। मदन की मौके पर ही मौत हो गई जबकि मुकेश की अस्पताल ले जाते समय। मंत्री और एमएलसी भी नाराज परिवारीजनों से मिले और वार्ता हुई। कांट्रेक्ट के तहत तय बीमा रकम आश्रितों को दिलाई जाएगी। प्लांट की ओर से दोनों परिवारों को तत्काल पांच-पांच लाख रुपये का एकाउंट पेई चेक दे दिया गया। दोनों आश्रित परिवार के एक-एक सक्षम व्यक्ति को ठेकेदार के मातहत नौकरी दी जाएगी।
- धर्मेंद्र सिंह, एचआर हेड, रिलायंस पावर प्लांट, रोजा
सीसीटीवी कैमरे में करीब पौने चार बजे दोनों गार्डों को अज्ञात ट्रक द्वारा टक्कर मारने का फुटेज मिला है। दोनों के सिर पर ज्यादा चोटें थीं और पैर का हिस्सा कुचला हुआ था जिसमें फ्रैक्चर भी था। मुआवजे की मांग पर दोनों के परिवारीजन ग्रामीणों के साथ सड़क पर आ गए थे। राज्यमंत्री और एमएलसी मौके पर पहुंचे और प्रबंधन से वार्ता कर दोनों परिवारों को बीमा की राशि के अलावा पांच-पांच लाख रुपये दिलाना तय किया। दोनों परिवारों के एक-एक सदस्यों को नौकरी देने का भरोसा दिया गया है। जिस ठेकेदार के मातहत दोनों तैनात थे, उसकी ओर से भी चंदा जुटाकर दो-दो लाख रुपये पीड़ित परिवारों को देने की बात हुई है।
- विजय शंकर मिश्रा, सीओ सिटी, शाहजहांपुर
सुबह आठ बजे मुझे रोजा प्लांट के बाहर सड़क पर शव रखकर जाम लगाने की सूचना मिली। अपने विधानसभा का मामला होने के कारण वहां पहुंचा। एमएलसी संजय मिश्रा भी आ गए। परिवारजनों और प्लांट अधिकारियों से बात कर मृतक आश्रित परिवारों के एक-एक सदस्यों को रोजगार देने के लिए मनाया। बीमे की राशि समेत करीब 12-12 लाख रुपये दोनों मृतकों के आश्रितों को देना तय हुआ।
- राममूर्ति सिंह वर्मा, राज्यमंत्री