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दो अभियुक्तों को पांच-पांच वर्ष की कैद
Updated Fri, 05 Oct 2018 06:32 PM IST
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दो अभियुक्तों को पांच-पांच वर्ष की कैद
मारपीट के दौरान गंभीर चोट पहुंचाने का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। द्वितीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सौरभ द्विवेदी ने गंभीर चोट पहुंचाने के मुकदमे में दोष सिद्ध होने पर दो अभियुक्तों को पांच-पांच वर्ष की कैद और दस-दस हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। जुर्माने की राशि में से आधी धनराशि पीड़िता को दिलवाने का आदेश दिया गया है।
रोजा क्षेत्र के गांव अर्जुनपुर बरमौला निवासी निर्मला देवी ने अपना खेत गांव के ही सीताराम पुत्र चिंता को बटाई पर दिया था। वह कई महीने से हिसाब-किताब करने की मांग कर रही थी। इसी संबंध में 15 जनवरी 2000 को प्रधान सीताराम उसके घर आए और उसे हिसाब-किताब करवाने की बात कहकर गांव के दक्षिण बाग में दिन के 11 बजे बुला ले गए। जहां पहले से ही सीताराम (आरोपी), सियाराम, हरिश्चंद्र व बाबू लाठी-डंडा, बांका लिए बैठे थे। निर्मला को देखते ही सीताराम ने गालियां देते हुए कहा कि आज इसका हिसाब-किताब पूरा कर दो, बचने न पाए, इतना कहते हुए सभी ने उस पर हमला बोल दिया। इसमें उसको गंभीर चोटें आईं। मामले की रिपोर्ट दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय भेज दिया। न्यायालय में मुकदमे की सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान व सहायक अभियोजन अधिकारी अजय कुमार के तर्कों को सुनने के बाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोष सिद्ध होने पर अभियुक्त सियाराम और हरिश्चंद्र को पांच-पांच वर्ष की कैद और 10-10 हजार रुपये के जुर्मानें से दंडित किया। इस मुकदमे में आरोपी रहे सीताराम और बाबू की मुकदमा चलने के दौरान मौत हो गई।
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नोट-प्रधान सीताराम और आरोपी सीताराम अलग-अलग हैं। प्रधान को आरोपी नहीं बनाया गया था।
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मारपीट के दौरान गंभीर चोट पहुंचाने का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। द्वितीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सौरभ द्विवेदी ने गंभीर चोट पहुंचाने के मुकदमे में दोष सिद्ध होने पर दो अभियुक्तों को पांच-पांच वर्ष की कैद और दस-दस हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। जुर्माने की राशि में से आधी धनराशि पीड़िता को दिलवाने का आदेश दिया गया है।
रोजा क्षेत्र के गांव अर्जुनपुर बरमौला निवासी निर्मला देवी ने अपना खेत गांव के ही सीताराम पुत्र चिंता को बटाई पर दिया था। वह कई महीने से हिसाब-किताब करने की मांग कर रही थी। इसी संबंध में 15 जनवरी 2000 को प्रधान सीताराम उसके घर आए और उसे हिसाब-किताब करवाने की बात कहकर गांव के दक्षिण बाग में दिन के 11 बजे बुला ले गए। जहां पहले से ही सीताराम (आरोपी), सियाराम, हरिश्चंद्र व बाबू लाठी-डंडा, बांका लिए बैठे थे। निर्मला को देखते ही सीताराम ने गालियां देते हुए कहा कि आज इसका हिसाब-किताब पूरा कर दो, बचने न पाए, इतना कहते हुए सभी ने उस पर हमला बोल दिया। इसमें उसको गंभीर चोटें आईं। मामले की रिपोर्ट दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय भेज दिया। न्यायालय में मुकदमे की सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान व सहायक अभियोजन अधिकारी अजय कुमार के तर्कों को सुनने के बाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोष सिद्ध होने पर अभियुक्त सियाराम और हरिश्चंद्र को पांच-पांच वर्ष की कैद और 10-10 हजार रुपये के जुर्मानें से दंडित किया। इस मुकदमे में आरोपी रहे सीताराम और बाबू की मुकदमा चलने के दौरान मौत हो गई।
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नोट-प्रधान सीताराम और आरोपी सीताराम अलग-अलग हैं। प्रधान को आरोपी नहीं बनाया गया था।