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भीड़ ने पकड़ा जेबकतरा, पुलिस ने छोड़ा
Updated Mon, 14 Aug 2017 05:47 PM IST
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शाहजहांपुर। जिला अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टर कक्ष के पास जेबकतरे ने एक मरीज की जेब कतर दी। इसी बीच लोगों ने उसे पकड़ कर जमकर पीटने के बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया। कुछ देर बाद पुलिस ने उसे छोड़ दिया। पुलिस इसे आपसी झगड़े का मामला बता रही है।
सोमवार दोपहर लगभग 12 बजे जिला अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टर एमएल अग्रवाल कक्ष के बाहर मरीजों की भीड़ लगी थी। वहीं पर एक जेबकतरा भी पहुंच गया। उसने मौका देखकर एक मरीज की जेब पर हाथ साफ कर दिया। इतने में पीछे खड़े युवक की उस पर नजर पड़ गई और उसने जेबक तरे को पकड़ लिया। उस मरीज के रुपये लौटा दिए। मरीज तो रुपये मिलने के बाद चला गया, लेकिन लोगों ने उसे पीटना शुरू कर दिया। इसी बीच चौकी पुलिस पहुंच गई। भीड़ ने बाद में जेबकतरे को जिला अस्पताल की पुलिस चौकी के सुपुर्द कर दिया। पुलिस ने कार्रवाई का भरोसा दिलाया तो लोग खामोश हो गए। इसके बाद भीड़ छंट गई। लगभग एक घंटे बाद पुलिस ने बिना किसी कार्रवाई के उसे छोड़ दिया। चौकी इंचार्ज रामकृष्ण कठेरिया का कहना है कि भीड़ ने जिसे जेबकतरा समझकर पीटा था। दरअसल वह अपनी दवा लेने आया था और उसका एक टेंपो वाले से झगड़ा चल रहा था। उसी में हाथापाई हो गई।
हर बार इसी तरह से छूट जाते हैं चोर
जिला अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने बताया कि चोरी की वारदात को अंजाम देने के लिए चोर पहले एक रुपये का पर्चा बनवाते हैं, ताकि पकड़े जाने पर यह बता सकें कि वह दवा लेने आए हैं। यह चोर ग्रुप में रहते हैं। पकड़े जाने पर शातिराना अंदाज में चोरी किया हुआ सामान साथी को पकड़ा देते हैं, जो भीड़ के हिस्से में शामिल होता है। जब सामान नहीं मिलता है तब फिर पुलिस बगैर कार्रवाई के छोड़ देती है।
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सोमवार दोपहर लगभग 12 बजे जिला अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टर एमएल अग्रवाल कक्ष के बाहर मरीजों की भीड़ लगी थी। वहीं पर एक जेबकतरा भी पहुंच गया। उसने मौका देखकर एक मरीज की जेब पर हाथ साफ कर दिया। इतने में पीछे खड़े युवक की उस पर नजर पड़ गई और उसने जेबक तरे को पकड़ लिया। उस मरीज के रुपये लौटा दिए। मरीज तो रुपये मिलने के बाद चला गया, लेकिन लोगों ने उसे पीटना शुरू कर दिया। इसी बीच चौकी पुलिस पहुंच गई। भीड़ ने बाद में जेबकतरे को जिला अस्पताल की पुलिस चौकी के सुपुर्द कर दिया। पुलिस ने कार्रवाई का भरोसा दिलाया तो लोग खामोश हो गए। इसके बाद भीड़ छंट गई। लगभग एक घंटे बाद पुलिस ने बिना किसी कार्रवाई के उसे छोड़ दिया। चौकी इंचार्ज रामकृष्ण कठेरिया का कहना है कि भीड़ ने जिसे जेबकतरा समझकर पीटा था। दरअसल वह अपनी दवा लेने आया था और उसका एक टेंपो वाले से झगड़ा चल रहा था। उसी में हाथापाई हो गई।
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हर बार इसी तरह से छूट जाते हैं चोर
जिला अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने बताया कि चोरी की वारदात को अंजाम देने के लिए चोर पहले एक रुपये का पर्चा बनवाते हैं, ताकि पकड़े जाने पर यह बता सकें कि वह दवा लेने आए हैं। यह चोर ग्रुप में रहते हैं। पकड़े जाने पर शातिराना अंदाज में चोरी किया हुआ सामान साथी को पकड़ा देते हैं, जो भीड़ के हिस्से में शामिल होता है। जब सामान नहीं मिलता है तब फिर पुलिस बगैर कार्रवाई के छोड़ देती है।
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