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गेहूं खरीद में धांधली केंद्र प्रभारी, आंकिक और बैंक मैनेजर के खिलाफ रिपोर्ट
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बंडा (शाहजहांपुर)। सरकारी गेहूं खरीद में धांधली के आरोप में क्रय केंद्र प्रभारी, आंकिक और बैंक प्रबंधक पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इससे संबंधित कर्मचारियों में खलबली मची हुई है।
डिप्टी आरएमओ जेया अहमद करीम ने रिपोर्ट दर्ज कराई है कि सरकारी गेहूं खरीद के लिए पीसीएफ सहकारिता ने गांव देवकली में क्रय केंद्र स्थापित किया था। क्रय केंद्र पर प्रभारी आकाश पांडे और आंकिक विपिन तिवारी की तैनाती की गई थी। 11 जून को सेंटर की जांच की गई तो पाया कि केंद्र पर बैनर टंगा था। कांटा बांट एक टेबल पर रखे थे। क्रय केंद्र प्रभारी और आंकिक केंद्र से नदारद थे। काफी प्रयास के बाद केंद्र प्रभारी आकाश पांडे से फोन से संपर्क हुआ तो उन्हें बुलाकर क्रय केंद्र के अभिलेख देखे गए।
क्रय केंद्र पर एक भी बोरा गेहूं स्टाक में नहीं था, जबकि रजिस्टर में गेहूं विक्रेता किसान का नाम अंकित था। जो नाम विक्रेता का लिखा उसके नाम से भुगतान न कर दूसरे के नाम से भुगतान करना पाया गया। साथ ही सेंटर चयनित जगह से 20 किमी दूर स्थापित पाया गया। इस प्रकार फर्जी किसानों के नाम से बिचौलियों के खातों में 31 लाख रुपये का भुगतान भेजा गया। इस मामले में जिला सहकारी बैंक बंडा के प्रबंधक की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। आरोप है कि क्रय केंद्र प्रभारी और आंकिक ने प्रशासन को फर्जी गेहूं खरीद की रिपोर्ट देकर गुमराह किया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
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डिप्टी आरएमओ जेया अहमद करीम ने रिपोर्ट दर्ज कराई है कि सरकारी गेहूं खरीद के लिए पीसीएफ सहकारिता ने गांव देवकली में क्रय केंद्र स्थापित किया था। क्रय केंद्र पर प्रभारी आकाश पांडे और आंकिक विपिन तिवारी की तैनाती की गई थी। 11 जून को सेंटर की जांच की गई तो पाया कि केंद्र पर बैनर टंगा था। कांटा बांट एक टेबल पर रखे थे। क्रय केंद्र प्रभारी और आंकिक केंद्र से नदारद थे। काफी प्रयास के बाद केंद्र प्रभारी आकाश पांडे से फोन से संपर्क हुआ तो उन्हें बुलाकर क्रय केंद्र के अभिलेख देखे गए।
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क्रय केंद्र पर एक भी बोरा गेहूं स्टाक में नहीं था, जबकि रजिस्टर में गेहूं विक्रेता किसान का नाम अंकित था। जो नाम विक्रेता का लिखा उसके नाम से भुगतान न कर दूसरे के नाम से भुगतान करना पाया गया। साथ ही सेंटर चयनित जगह से 20 किमी दूर स्थापित पाया गया। इस प्रकार फर्जी किसानों के नाम से बिचौलियों के खातों में 31 लाख रुपये का भुगतान भेजा गया। इस मामले में जिला सहकारी बैंक बंडा के प्रबंधक की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। आरोप है कि क्रय केंद्र प्रभारी और आंकिक ने प्रशासन को फर्जी गेहूं खरीद की रिपोर्ट देकर गुमराह किया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
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