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दुष्कर्म की रिपोर्ट छेड़छाड़ में दर्ज करने का मामला: पुलिस की मनमानी से बिगड़े हालात
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तिलहर (शाहजहांपुर)। अपहरण और दुष्कर्म की वारदात को पांच दिन तक पुलिस दबाती रही। पीड़ित पिता के बार-बार थाने के चक्कर काटने के बाद बमुश्किल पुलिस ने सिर्फ छेड़छाड़ की रिपोर्ट दर्ज की तो पीड़ित परिवार के सब्र का बांध टूट गया। बदनामी और पुलिस के रवैये से आहत पिता ने जहरीला पदार्थ खा लिया, तब जाकर पुलिस हरकत में आई। आननफानन में आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा। यही नहीं दिनभर यही साबित करने की कोशिश की गई कि पिता ने जहरीला पदार्थ नहीं खाया, बल्कि अधिक शराब पीने से उनकी हालत बिगड़ी।
17 मार्च की रात किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म की घटना के पांच दिन तक पुलिस पीड़ित को टरकाया। पीड़ित किशोरी और उसके परिजन लगातार अपहरण कर दुष्कर्म की बात कहते रहे लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की और न ही मेडिकल कराया, जबकि किशोरी का 18 मार्च को ही मेडिकल परीक्षण कराया जाना चाहिए था ताकि आरोपों की पुष्टि हो सकती, मगर पुलिस ने ऐसा नहीं किया। और तो और 22 मार्च को छेड़छाड़ की तहरीर लिखवाकर पॉक्सो एक्ट और छेड़छाड़ की धारा में रिपोर्ट दर्ज करके आरोपी की गिरफ्तारी की। जबकि पीड़ित के अनुसार पुलिस ने दो अन्य आरोपियों के नाम भी एफआईआर में शामिल नहीं किए।
तो बदले की भावना से की गई वारदात
पीड़ित परिवार के लोग दबी जुबान से बदले की भावना से वारदात को अंजाम दिए जाने की बात कह रहे हैं। बताते हैं कि करीब आठ साल पहले आरोपी के रिश्तेदारों की लड़की को पीड़ित परिवार के रिश्तेदारों का एक लड़का बहला फुसलाकर ले गया था और उससे शादी कर ली। इस घटना के बाद से आरोपी के रिश्तेदार अंदर ही अंदर रंजिश मानते चले आ रहे हैं। पीड़ित किशोरी के माता-पिता आठ साल पहले की घटना को भूल नहीं पाए हैं और उन्हें लगता है कि आरोपियों ने यह घटना उसी का बदला लेने के लिए की है।
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माता-पिता के साथ ननिहाल में रह रही है किशोरी
पीड़ित किशोरी का परिवार गरीब है। वह अपनी नानी के घर रहती है। किशोरी के पिता ने बताया कि वह बरेली के फतेहगंज पूर्वी के एक गांव के रहने वाले हैं। उसके छह बच्चे हैं। मेहनत मजदूरी करके परिवार का गुजारा करते हैं। किशोरी की मां ने बताया कि वह यहां पर अपने मायके आती हैं, सात-आठ महीने रहने के बाद होली के बाद ससुराल जाती है। यहां पर वह अपनी मां के साथ रजाई सिलने का काम करती है।
नानी का घर भी बना हुआ है खंडहर
पीड़ित किशोरी की नानी का घर भी खंडहर जैसा है। नाना मोची हैं। कमरा जर्जर है और पड़ोस में मैदान पड़ा है जिसमें पन्नी डालकर परिवार रहने को मजबूर है। पीड़ित किशोरी की नानी ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री आवास बनवाने के लिए कई बार फार्म भरे और नगरपालिका के चक्कर भी लगाए लेकिन अब तक आवास स्वीकृत नहीं हुआ है।
वारदात के बाद जब रिपोर्ट लिखाने गए तो पुलिस नहीं लिखी। बाद में अपहरण और दुष्कर्म की बजाये महज छेड़छाड़ में एफआईआर दर्ज कर ली। आरोपी उस पर हंसते हैं और धमकाते हैं। बदनामी और अपमान बर्दाश्त न होने पर जहर खा लिया था। अगर न्याय नहीं मिलेगा तो जीने का क्या फायदा? -दुष्कर्म पीड़िता किशोरी का पिता
मामला संज्ञान में आया है। परिजन की तहरीर के मुताबिक एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। पिता के शराब पीने के कारण हालत बिगड़ने की जानकारी मिली है। जहर खाने की पुष्टि नहीं है। मामले में अगर किसी की लापरवाही सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी। - संजीव कुमार वाजपेयी, एसपी ग्रामीण, शाहजहांपुर
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17 मार्च की रात किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म की घटना के पांच दिन तक पुलिस पीड़ित को टरकाया। पीड़ित किशोरी और उसके परिजन लगातार अपहरण कर दुष्कर्म की बात कहते रहे लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की और न ही मेडिकल कराया, जबकि किशोरी का 18 मार्च को ही मेडिकल परीक्षण कराया जाना चाहिए था ताकि आरोपों की पुष्टि हो सकती, मगर पुलिस ने ऐसा नहीं किया। और तो और 22 मार्च को छेड़छाड़ की तहरीर लिखवाकर पॉक्सो एक्ट और छेड़छाड़ की धारा में रिपोर्ट दर्ज करके आरोपी की गिरफ्तारी की। जबकि पीड़ित के अनुसार पुलिस ने दो अन्य आरोपियों के नाम भी एफआईआर में शामिल नहीं किए।
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तो बदले की भावना से की गई वारदात
पीड़ित परिवार के लोग दबी जुबान से बदले की भावना से वारदात को अंजाम दिए जाने की बात कह रहे हैं। बताते हैं कि करीब आठ साल पहले आरोपी के रिश्तेदारों की लड़की को पीड़ित परिवार के रिश्तेदारों का एक लड़का बहला फुसलाकर ले गया था और उससे शादी कर ली। इस घटना के बाद से आरोपी के रिश्तेदार अंदर ही अंदर रंजिश मानते चले आ रहे हैं। पीड़ित किशोरी के माता-पिता आठ साल पहले की घटना को भूल नहीं पाए हैं और उन्हें लगता है कि आरोपियों ने यह घटना उसी का बदला लेने के लिए की है।
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माता-पिता के साथ ननिहाल में रह रही है किशोरी
पीड़ित किशोरी का परिवार गरीब है। वह अपनी नानी के घर रहती है। किशोरी के पिता ने बताया कि वह बरेली के फतेहगंज पूर्वी के एक गांव के रहने वाले हैं। उसके छह बच्चे हैं। मेहनत मजदूरी करके परिवार का गुजारा करते हैं। किशोरी की मां ने बताया कि वह यहां पर अपने मायके आती हैं, सात-आठ महीने रहने के बाद होली के बाद ससुराल जाती है। यहां पर वह अपनी मां के साथ रजाई सिलने का काम करती है।
नानी का घर भी बना हुआ है खंडहर
पीड़ित किशोरी की नानी का घर भी खंडहर जैसा है। नाना मोची हैं। कमरा जर्जर है और पड़ोस में मैदान पड़ा है जिसमें पन्नी डालकर परिवार रहने को मजबूर है। पीड़ित किशोरी की नानी ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री आवास बनवाने के लिए कई बार फार्म भरे और नगरपालिका के चक्कर भी लगाए लेकिन अब तक आवास स्वीकृत नहीं हुआ है।
वारदात के बाद जब रिपोर्ट लिखाने गए तो पुलिस नहीं लिखी। बाद में अपहरण और दुष्कर्म की बजाये महज छेड़छाड़ में एफआईआर दर्ज कर ली। आरोपी उस पर हंसते हैं और धमकाते हैं। बदनामी और अपमान बर्दाश्त न होने पर जहर खा लिया था। अगर न्याय नहीं मिलेगा तो जीने का क्या फायदा? -दुष्कर्म पीड़िता किशोरी का पिता
मामला संज्ञान में आया है। परिजन की तहरीर के मुताबिक एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। पिता के शराब पीने के कारण हालत बिगड़ने की जानकारी मिली है। जहर खाने की पुष्टि नहीं है। मामले में अगर किसी की लापरवाही सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी। - संजीव कुमार वाजपेयी, एसपी ग्रामीण, शाहजहांपुर