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पजिनों ने वीरपाल के अंतिम संस्कार से किया इंकार तो मची खलबली
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बंडा। पुलिस पिटाई से मौत हो जाने का आरोप लगाते हुए परिवार वालों ने वीरपाल का सोमवार को अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया तो पुलिस में खलबली मच गई। कई घंटे बाद लोगों के समझाने पर परिवार के लोगों ने अंतिम संस्कार कर दिया, तब जाकर पुलिस ने चैन की सांस ली।
गौरतलब है कि खुटार पुलिस ने 28 अगस्त को झुकना नदी के किनारे गांव टोडरपुर के राजू मसीह, बंडा के गांव ददिउरी के वीरपाल और खुटार के नवदिया मनकंठ निवासी हरिओम मिश्र को अवैध शराब बनाते पकड़कर चालान भेजा था। न्यायालय से उसे जेल भेजा गया था। 30 अगस्त की रात जेल में ही वीरपाल की हालत बिगड़ जाने पर उसे लखनऊ रेफर कर दिया गया। 31 अगस्त को मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान वीरपाल की मौत हो गई।
मृतक की मां नत्था देवी और भाई सुनील ने पुलिस पर वीरपाल की पिटाई किए जाने और पिटाई से मौत हो जाने का आरोप लगाया था। नत्था देवी का आरोप था कि वीरपाल टोडरपुर के गुरचरन सिंह के फार्म पर नौकरी करता था और वहीं रहता था। गुरचरन सिंह की पत्नी ने भी पुलिस पर वीरपाल को उनके फार्म से पकड़ने और पिटाई करने का आरोप लगाया था। लखनऊ से पोस्टमार्टम के बाद रविवार देर रात शव घर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। रात में ही गांव में पुलिस तैनात कर दी गई थी। सुबह खुटार पुलिस भी गांव पहुंच गई। उधर परिवार के लोगों ने खुटार एसओ और दोषी सिपाहियों पर कार्रवाई नहीं होने तक शव का अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया। इससे पुलिस में खलबली मच गई।
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कई घंटे तक शव घर में रखे रहने के बाद बंडा पुलिस ने संभ्रात लोगों की मदद ली। बंडा सहित आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और परिवार के लोगों को समझाकर अंतिम संस्कार के लिए राजी कर लिया। लोगों ने अंतिम संस्कार के लिए परिवार को लकड़ी सहित अन्य सामान भी मुहैया कराया। दिन में लगभग 11 बजे वीरपाल का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस पर पुलिस ने राहत की सांस ली। वीरपाल पांच भाइयों में सबसे छोटा था। उसकी मौत से मां नत्था देवी सहित परिवार के लोगों का रो रोकर बुरा हाल है।
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गौरतलब है कि खुटार पुलिस ने 28 अगस्त को झुकना नदी के किनारे गांव टोडरपुर के राजू मसीह, बंडा के गांव ददिउरी के वीरपाल और खुटार के नवदिया मनकंठ निवासी हरिओम मिश्र को अवैध शराब बनाते पकड़कर चालान भेजा था। न्यायालय से उसे जेल भेजा गया था। 30 अगस्त की रात जेल में ही वीरपाल की हालत बिगड़ जाने पर उसे लखनऊ रेफर कर दिया गया। 31 अगस्त को मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान वीरपाल की मौत हो गई।
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मृतक की मां नत्था देवी और भाई सुनील ने पुलिस पर वीरपाल की पिटाई किए जाने और पिटाई से मौत हो जाने का आरोप लगाया था। नत्था देवी का आरोप था कि वीरपाल टोडरपुर के गुरचरन सिंह के फार्म पर नौकरी करता था और वहीं रहता था। गुरचरन सिंह की पत्नी ने भी पुलिस पर वीरपाल को उनके फार्म से पकड़ने और पिटाई करने का आरोप लगाया था। लखनऊ से पोस्टमार्टम के बाद रविवार देर रात शव घर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। रात में ही गांव में पुलिस तैनात कर दी गई थी। सुबह खुटार पुलिस भी गांव पहुंच गई। उधर परिवार के लोगों ने खुटार एसओ और दोषी सिपाहियों पर कार्रवाई नहीं होने तक शव का अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया। इससे पुलिस में खलबली मच गई।
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कई घंटे तक शव घर में रखे रहने के बाद बंडा पुलिस ने संभ्रात लोगों की मदद ली। बंडा सहित आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और परिवार के लोगों को समझाकर अंतिम संस्कार के लिए राजी कर लिया। लोगों ने अंतिम संस्कार के लिए परिवार को लकड़ी सहित अन्य सामान भी मुहैया कराया। दिन में लगभग 11 बजे वीरपाल का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस पर पुलिस ने राहत की सांस ली। वीरपाल पांच भाइयों में सबसे छोटा था। उसकी मौत से मां नत्था देवी सहित परिवार के लोगों का रो रोकर बुरा हाल है।
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