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एसडीएम साहब! 20 दिन में पात्र से अपात्र कैसे हो गई जिंदगी मौत से संघर्ष कर रही महिला
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पुवायां (शाहजहांपुर)। हृदय रोग से परेशान एक महिला को सरकारी मदद के लिए पहले पात्र और 20 दिन बाद अपात्र मान लिया गया। लेखपाल और तहसीलदार की आख्या पर दोनों बार एसडीएम ने भी मोहर लगा दी। अब बड़ा सवाल है कि यदि गरीब महिला को इलाज के लिए सरकारी मदद नहीं मिली और कोई अनहोनी हो गई तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।
पुवायां के मोहल्ला परशुराम नगर निवासी संजय कुमार चाय बेचकर परिवार का गुजरा करते हैं। उनकी पत्नी अमिता त्रिवेदी वर्ष 2003 से हृदय रोग से पीड़ित हैं। उसका संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ से इलाज चल रहा है। अब अस्पताल ने हार्ट के ऑपरेशन के लिए संजय कुमार को 1.80 लाख रुपये का स्टीमेट थमा दिया और ऑपरेशन के लिए 20 सितंबर की तिथि तय कर दी। इलाज में सारी जमा पूंजी गंवाने के बाद परेशान संजय ने मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से पत्नी के इलाज के लिए मदद की गुहार लगाई और विधायक चेतराम ने राशि स्वीकृत किए जाने की संस्तुति की तो मुख्यमंत्री कार्यालय के संयुक्त सचिव दिलीप कुमार ने 31 जुलाई 19 को शाहजहांपुर के डीएम से रिपोर्ट मांगी। डीएम ने एसडीएम से रिपोर्ट तलब की। एसडीएम के बाद तहसीलदार, कानूनगो होते हुए मामला लेखपाल के पास पहुंचा तो लेखपाल ने संजय को पात्र बताया। इसी आधार पर एसडीएम ने आठ अगस्त को अमिता को पात्र बताते हुए रिपोर्ट दे दी।
इसके बाद 27 अगस्त को लेखपाल ने दूसरी रिपोर्ट में संजय को आयुष्मान योजना का कार्डधारक बताते हुए अपात्र होने की रिपोर्ट लगा दी, जिस पर एसडीएम ने भी अमिता को अपात्र बताते हुए रिपोर्ट दे दी कि कार्डधारक होने के कारण वह विवेकाधीन कोटे से सहायता की पात्र नहीं है। लेखपाल ने तो अपनी रिपोर्ट में संजय के कथित आयुष्मान कार्ड का नंबर भी लिख दिया। सहायता के लिए अपात्र घोषित किए जाने की जानकारी मिलते ही संजय के घर खलबली मच गई। ऑपरेशन की तिथि नजदीक होने के कारण संजय सोमवार को डीएम से मिला तो डीएम ने उसे सीएमओ के पास भेजा। सीएमओ ने प्रार्थनापत्र पर लिख दिया कि अमिता त्रिवेदी के पास कोई आयुष्मान कार्ड नहीं है। संजय ने बताया कि वह फिर डीएम से मिला तो उन्होंने पुवायां के एसडीएम को पूरे मामले को फिर से देखकर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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अगर रिपोर्ट गलत लग गई है तो पूरे मामले में फिर से जांच कर रिपोर्ट लगवाई जाएगी। पीड़िता की हर संभव मदद की जाएगी।
सौरभ भट्ट, एसडीएम पुवायां
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पुवायां के मोहल्ला परशुराम नगर निवासी संजय कुमार चाय बेचकर परिवार का गुजरा करते हैं। उनकी पत्नी अमिता त्रिवेदी वर्ष 2003 से हृदय रोग से पीड़ित हैं। उसका संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ से इलाज चल रहा है। अब अस्पताल ने हार्ट के ऑपरेशन के लिए संजय कुमार को 1.80 लाख रुपये का स्टीमेट थमा दिया और ऑपरेशन के लिए 20 सितंबर की तिथि तय कर दी। इलाज में सारी जमा पूंजी गंवाने के बाद परेशान संजय ने मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से पत्नी के इलाज के लिए मदद की गुहार लगाई और विधायक चेतराम ने राशि स्वीकृत किए जाने की संस्तुति की तो मुख्यमंत्री कार्यालय के संयुक्त सचिव दिलीप कुमार ने 31 जुलाई 19 को शाहजहांपुर के डीएम से रिपोर्ट मांगी। डीएम ने एसडीएम से रिपोर्ट तलब की। एसडीएम के बाद तहसीलदार, कानूनगो होते हुए मामला लेखपाल के पास पहुंचा तो लेखपाल ने संजय को पात्र बताया। इसी आधार पर एसडीएम ने आठ अगस्त को अमिता को पात्र बताते हुए रिपोर्ट दे दी।
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इसके बाद 27 अगस्त को लेखपाल ने दूसरी रिपोर्ट में संजय को आयुष्मान योजना का कार्डधारक बताते हुए अपात्र होने की रिपोर्ट लगा दी, जिस पर एसडीएम ने भी अमिता को अपात्र बताते हुए रिपोर्ट दे दी कि कार्डधारक होने के कारण वह विवेकाधीन कोटे से सहायता की पात्र नहीं है। लेखपाल ने तो अपनी रिपोर्ट में संजय के कथित आयुष्मान कार्ड का नंबर भी लिख दिया। सहायता के लिए अपात्र घोषित किए जाने की जानकारी मिलते ही संजय के घर खलबली मच गई। ऑपरेशन की तिथि नजदीक होने के कारण संजय सोमवार को डीएम से मिला तो डीएम ने उसे सीएमओ के पास भेजा। सीएमओ ने प्रार्थनापत्र पर लिख दिया कि अमिता त्रिवेदी के पास कोई आयुष्मान कार्ड नहीं है। संजय ने बताया कि वह फिर डीएम से मिला तो उन्होंने पुवायां के एसडीएम को पूरे मामले को फिर से देखकर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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अगर रिपोर्ट गलत लग गई है तो पूरे मामले में फिर से जांच कर रिपोर्ट लगवाई जाएगी। पीड़िता की हर संभव मदद की जाएगी।
सौरभ भट्ट, एसडीएम पुवायां