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काउंसिलिंग के दौरान डायट में बरपा हंगामा
शाहजहांपुर।
Updated Fri, 20 Mar 2015 11:42 PM IST
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आखिर प्रशिक्षु शिक्षक चयन 2011 की काउंसिलिंग को लेकर शुक्रवार को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में गदर हो ही गया। सुबह से भूखे-प्यासे लाइन में लगे अभ्यर्थियों का नंबर जब शाम तक नहीं आया तो उन्होंने हंगामा काटना शुरू दिया। कर्मचारियों के समझाने के बाद भी जब अभ्यर्थी नहीं माने तो कहासुनी बढ़ गई। इसी बीच वहां भगदड़ मच गई। भगदड़ में कई प्रशिक्षु चुटहिल भी हो गए।
शुक्रवार को डायट में निर्धारत कार्यक्रमानुसार प्रशिक्षु शिक्षकों की काउंसिलिंग शुरू हुई। काउंसिलिंग के लिए दो हजार से अधिक अभ्यर्थी जुट गए। इतनी भीड़ देखकर प्राचार्य गजराज सिंह यादव समेत अन्य कर्मचारियों के पहले ही होश उड़ गए। पुलिस भी नहीं पहुंची, जो सभी को संभाल पाती। समय के साथ लोग उत्तेजित होने शुरू हो गए। शाम करीब चार बजे तक सब कुछ ठीकठाक चलता रहा, लेकिन इसके बाद भूखे-प्यासे लोगों का धैर्य जवाब दे गया। शोर-शराबे के बीच काउंसिलिंग जारी रही, लेकिन पांच बजे के बाद काउंसिलिंग में अड़चन होते देख अभ्यर्थियों का पारा हाई हो गया।
कर्मचारियों से बातचीत बढ़ने पर वहां भगदड़ मच गई। इस बीच पता चला कि कई लोगों के हाथ-पैरों में चोट भी आई है। इसके बावजूद काउंसिलिंग का कार्य रात सात बजे के बाद तक चलता रहा। बताया जाता है कि डायट से कांट थाना में पत्र भेजकर सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस की मांग की गई थी, लेकिन पुलिस नहीं पहुंची। काउंसिलिंग में प्राचार्य यादव के अलावा रिपुदमन सिंह यादव, विश्वास त्रिपाठी, प्रमोद सिंह, अवधेश सिंह आदि का योगदान रहा।
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शुक्रवार को डायट में निर्धारत कार्यक्रमानुसार प्रशिक्षु शिक्षकों की काउंसिलिंग शुरू हुई। काउंसिलिंग के लिए दो हजार से अधिक अभ्यर्थी जुट गए। इतनी भीड़ देखकर प्राचार्य गजराज सिंह यादव समेत अन्य कर्मचारियों के पहले ही होश उड़ गए। पुलिस भी नहीं पहुंची, जो सभी को संभाल पाती। समय के साथ लोग उत्तेजित होने शुरू हो गए। शाम करीब चार बजे तक सब कुछ ठीकठाक चलता रहा, लेकिन इसके बाद भूखे-प्यासे लोगों का धैर्य जवाब दे गया। शोर-शराबे के बीच काउंसिलिंग जारी रही, लेकिन पांच बजे के बाद काउंसिलिंग में अड़चन होते देख अभ्यर्थियों का पारा हाई हो गया।
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कर्मचारियों से बातचीत बढ़ने पर वहां भगदड़ मच गई। इस बीच पता चला कि कई लोगों के हाथ-पैरों में चोट भी आई है। इसके बावजूद काउंसिलिंग का कार्य रात सात बजे के बाद तक चलता रहा। बताया जाता है कि डायट से कांट थाना में पत्र भेजकर सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस की मांग की गई थी, लेकिन पुलिस नहीं पहुंची। काउंसिलिंग में प्राचार्य यादव के अलावा रिपुदमन सिंह यादव, विश्वास त्रिपाठी, प्रमोद सिंह, अवधेश सिंह आदि का योगदान रहा।
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