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कल से खुलेंगे परिषदीय स्कूल, बच्चे नहीं शिक्षक जाएंगे
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शाहजहांपुर। शासन के निर्देश के अनुसार बुधवार एक जुलाई से परिषदीय विद्यालय खुल जाएंगे, लेकिन बच्चे स्कूल नहीं जाएंगे। केवल शिक्षकों को स्कूल पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं।
स्कूल खोलने के निर्णय के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने जुलाई महीने का एजेंडा जारी कर दिया है, जो शिक्षकों से ही संबंधित है। हालांकि अभी परिषदीय विद्यालयों में पठन-पाठन नहीं होगा, क्योंकि पहली जुलाई से बच्चे स्कूलों में नहीं बुलाए गए हैं। इस अवधि में शिक्षकों के जिम्मे कई कार्य किए गए हैं, जो उन्हें करने होंगे। इन कार्यों में ब्लाक स्तर पर प्रधान अध्यापकों की उपस्थिति, एमडीएम के अंतर्गत बच्चों के अभिभावकों को कन्वर्जन कास्ट और खाद्यान्न का वितरण कराना, मानव संपदा पोर्टल पर शिक्षकों द्वारा अपने दस्तावेजों का सत्यापन करना, मिशन प्रेरणा के अंतर्गत ई-पाठशाला संचालित कर बच्चों को आनलाइन पढ़ाना, ऑपरेशन कायाकल्प के तहत स्कूलों की मरम्मत और रंगाई-पुताई कराना, निशुल्क पाठ्य पुस्तकों, यूनिफार्म आदि का वितरण करना, यू-डायस पोर्टल पर बच्चों के नामांकन और स्टाफ के आंकड़े फीड कराना, शारदा अभियान के तहत आउट ऑफ स्कूल चल रहे बच्चों को चिन्हित कर उनका दाखिला कराना आदि कार्य शामिल हैं।
विभाग का आदेश बिल्कुल अव्यावहारिक है। इस संबंध में भारत सरकार का कोई आदेश नहीं आया है। अभी छुट्टियों में घर गए शिक्षक लौट नहीं सके हैं, इसलिए स्कूल खोलना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। विभाग शिक्षकों को भ्रम में डालने का काम कर रहा है। इस संबंध में शिक्षा मंत्री से बात की जाएगी।
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संजय सिंह, प्रांतीय महामंत्री/जिलाध्यक्ष प्राथमिक शिक्षक संघ
पहले समस्याओं की समीक्षा करेंगे
सरकार और विभाग का निर्णय है। इसलिए स्कूल तो खोलेंगे ही, लेकिन आठ-दस दिन देखेंगे कि किस प्रकार की समस्याएं शिक्षकों के सामने ड़न बर्दाश्त नही किया जाएगा। अभी न तो कन्वर्जन कास्ट का पैसा पूरा आया है और न ही यूनिफार्म का, इसलिए समस्या तो खड़ी होगी ही। इस बाबत प्रदेश अध्यक्ष को बता दिया गया है।
जागेश कुमार पाली, जिलाध्यक्ष जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ
पहली जुलाई से सुबह आठ से एक बजे तक स्कूल खोलने के निर्देश हैं। जो गैर जनपदीय शिक्षक अभी नहीं लौटे हैं, उनको आना चाहिए। हालांकि बच्चों को अभी स्कूल नहीं बुलाया गया है, लेकिन यूनिफार्म की प्रक्रिया तो शुरू कर ही सकते हैं, जब बजट आएगा, तब आगे का काम हल्का हो जाएगा। जो किताबें आ चुकी हैं, उनका सत्यापन जारी है। प्रवेश के लिए आउट ऑफ स्कूल बच्चों का चिन्हीकरण भी जरूरी है। जो आदेश है, उसका पालन तो कराया ही जाएगा।
राकेश कुमार, बीएसए
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स्कूल खोलने के निर्णय के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने जुलाई महीने का एजेंडा जारी कर दिया है, जो शिक्षकों से ही संबंधित है। हालांकि अभी परिषदीय विद्यालयों में पठन-पाठन नहीं होगा, क्योंकि पहली जुलाई से बच्चे स्कूलों में नहीं बुलाए गए हैं। इस अवधि में शिक्षकों के जिम्मे कई कार्य किए गए हैं, जो उन्हें करने होंगे। इन कार्यों में ब्लाक स्तर पर प्रधान अध्यापकों की उपस्थिति, एमडीएम के अंतर्गत बच्चों के अभिभावकों को कन्वर्जन कास्ट और खाद्यान्न का वितरण कराना, मानव संपदा पोर्टल पर शिक्षकों द्वारा अपने दस्तावेजों का सत्यापन करना, मिशन प्रेरणा के अंतर्गत ई-पाठशाला संचालित कर बच्चों को आनलाइन पढ़ाना, ऑपरेशन कायाकल्प के तहत स्कूलों की मरम्मत और रंगाई-पुताई कराना, निशुल्क पाठ्य पुस्तकों, यूनिफार्म आदि का वितरण करना, यू-डायस पोर्टल पर बच्चों के नामांकन और स्टाफ के आंकड़े फीड कराना, शारदा अभियान के तहत आउट ऑफ स्कूल चल रहे बच्चों को चिन्हित कर उनका दाखिला कराना आदि कार्य शामिल हैं।
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विभाग का आदेश बिल्कुल अव्यावहारिक है। इस संबंध में भारत सरकार का कोई आदेश नहीं आया है। अभी छुट्टियों में घर गए शिक्षक लौट नहीं सके हैं, इसलिए स्कूल खोलना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। विभाग शिक्षकों को भ्रम में डालने का काम कर रहा है। इस संबंध में शिक्षा मंत्री से बात की जाएगी।
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संजय सिंह, प्रांतीय महामंत्री/जिलाध्यक्ष प्राथमिक शिक्षक संघ
पहले समस्याओं की समीक्षा करेंगे
सरकार और विभाग का निर्णय है। इसलिए स्कूल तो खोलेंगे ही, लेकिन आठ-दस दिन देखेंगे कि किस प्रकार की समस्याएं शिक्षकों के सामने ड़न बर्दाश्त नही किया जाएगा। अभी न तो कन्वर्जन कास्ट का पैसा पूरा आया है और न ही यूनिफार्म का, इसलिए समस्या तो खड़ी होगी ही। इस बाबत प्रदेश अध्यक्ष को बता दिया गया है।
जागेश कुमार पाली, जिलाध्यक्ष जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ
पहली जुलाई से सुबह आठ से एक बजे तक स्कूल खोलने के निर्देश हैं। जो गैर जनपदीय शिक्षक अभी नहीं लौटे हैं, उनको आना चाहिए। हालांकि बच्चों को अभी स्कूल नहीं बुलाया गया है, लेकिन यूनिफार्म की प्रक्रिया तो शुरू कर ही सकते हैं, जब बजट आएगा, तब आगे का काम हल्का हो जाएगा। जो किताबें आ चुकी हैं, उनका सत्यापन जारी है। प्रवेश के लिए आउट ऑफ स्कूल बच्चों का चिन्हीकरण भी जरूरी है। जो आदेश है, उसका पालन तो कराया ही जाएगा।
राकेश कुमार, बीएसए