{"_id":"629270a97246da24c41fb055","slug":"corona-snatched-job-in-foreign-country-making-progress-by-setting-up-industry-shahjahanpur-news-bly4864550164","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोविड के चलते परदेस में छूटी नौकरी, उद्योग लगाकर कर रहे तरक्की","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोविड के चलते परदेस में छूटी नौकरी, उद्योग लगाकर कर रहे तरक्की
विज्ञापन
शाहजहांपुर के टाउनहाल रोड स्थित जिला उद्योग केंद्र का कार्यालय । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। 2019 से पहले शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों के युवा बड़े पैमाने पर बाहर रहकर नौकरी करते थे। कोरोना काल में लोगों की नौकरी गई और उनकी घर वापसी हो गई। कोविड का प्रकोप कम हुआ तो तमाम युवा फिर से परदेस लौट गए, लेकिन उनका वहां मन नहीं लगा। घर वापसी के बाद सबसे बड़ा संकट रोजगार का खड़ा हुआ है। इस संकट के समय में शासन की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं ने युवाओं के लिए तरक्की की राह प्रशस्त की।
जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त दुर्गेश कुमार बताते हैं कि इस वर्ष मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना और प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना के लिए 97-97 आवेदन हुए हैं। एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) में चयनित जरी-जरदोजी के लिए 75 आवेदन मिले हैं। अधिकतर आवेदक आटा चक्की, पालेसर, फर्नीचर, मोबाइल और कंप्यूटर शॉप जैसे कार्य करना चाहते हैं। कागजी कार्यवाही पूर्ण होने के बाद आवेदनकर्ताओं के लोन की स्वीकृति भी बैंकों के माध्यम से होना शुरू हो गई। साथ ही उद्योग केंद्र से उन्हें अनुदान भी दिया जाएगा।
बैंकों ने ऋण के लिए स्वीकृति देनी शुरू की
फाइलों के बैंक पहुंचने के बाद स्वीकृति मिलने का काम भी शुरू हो गया। प्रधानमंत्री स्वरोजगार सृजन योजना में 97 आवेदनों मेें 28 का ऋण स्वीकृत हो गया। बैंकों ने 78.8 लाख रुपये लोन स्वीकृत कर दिया। इसी तरह मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में छह फाइलों के लिए 9.48 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई। एक जिला-एक उत्पाद में पांच लोगों के लिए साढ़े पांच लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। शेष फाइलों पर कार्रवाई चल रही है। आवेदक को दस से 25 लाख रुपये तक लाभ दिया जाता है।
विज्ञापन
ऐसा करना होगा आवेदन
योजनाओं का लाभ लेने के लिए जिला उद्योग केंद्र के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है। आवेदन के लिए पेन कार्ड, आधार कार्ड, शपथ पत्र, शैक्षिक अभिलेख व परियोजना की रिपोर्ट लगाना होगी। विभाग के पोर्टल पर आने के बाद जांच कर बैंक के लिए फाइल भेजी जाएगी। वहां से जांच के बाद स्वीकृति दी जाती है।
आवेदन की ये हैं शर्तेँ
-आठवीं तक पास होना अनिवार्य है।
-डिफाल्टर नहीं होना चाहिए।
-बैंक की सिविल खराब नहीं हो।
केस एक
जलालाबाद के कोयला ज्ञानपुर निवासी महेश कुमार मध्यप्रदेश में एक कंपनी में मार्केटिंग का काम करते थे। शिक्षित होने के कारण उनका रोजगार अच्छा चल रह था। कोरोना के कारण उनकी नौकरी छूट गई थी। घर लौटने के बाद फिर से परदेस जाने का निर्णय त्याग दिया। लोन लेकर घर के पास ही आटा चक्की लगा ली। अब उनका कारोबार काफी बेहतर चल रहा है।
केस टू-
शहर के मोहल्ला महमंद जलालनगर निवासी रोहित पहले मुंबई में डिजिटल वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी करते थे। कोरोना के कारण उनकी भी वापसी अपने घर हो गई। रोहित ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत ढाई लाख का ऋण लेकर डिजिटल फोटोग्राफी का काम शुरू किया। खुद आत्मनिर्भर होने के साथ ही तीन अन्य लोगों को भी रोजगार दे रखा है।
महिलाओं को मिलता है 25 प्रतिशत अनुदान
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम में शहरी क्षेत्र में मैन्युफैक्चरिंग के लिए 25 लाख और सर्विस सेक्टर मेेें दस लाख तक ऋण मिल जाएगा। इसमें महिलाओं को 25 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। पुरुष में एससी-एसटी और ओबीसी को 25 प्रतिशत और अन्य को 15 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। ग्रामीण इलाकों में दस प्रतिशत बढ़ाकर अनुदान दिया जाता है।
जिला उद्योग केंद्र से संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर युवा अपने रोजगार को ऊंचाइयों तक पहुंचाने में लगे हैं। कोरोना के कारण नौकरी छूटने पर तमाम युवाओं ने आवेदन किया। वे ग्रामीण इलाकों में अपना मिनी उद्योग शुरू कर आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं। -दुर्गेश कुमार, उपायुक्त उद्योग
विज्ञापन
जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त दुर्गेश कुमार बताते हैं कि इस वर्ष मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना और प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना के लिए 97-97 आवेदन हुए हैं। एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) में चयनित जरी-जरदोजी के लिए 75 आवेदन मिले हैं। अधिकतर आवेदक आटा चक्की, पालेसर, फर्नीचर, मोबाइल और कंप्यूटर शॉप जैसे कार्य करना चाहते हैं। कागजी कार्यवाही पूर्ण होने के बाद आवेदनकर्ताओं के लोन की स्वीकृति भी बैंकों के माध्यम से होना शुरू हो गई। साथ ही उद्योग केंद्र से उन्हें अनुदान भी दिया जाएगा।
विज्ञापन
बैंकों ने ऋण के लिए स्वीकृति देनी शुरू की
फाइलों के बैंक पहुंचने के बाद स्वीकृति मिलने का काम भी शुरू हो गया। प्रधानमंत्री स्वरोजगार सृजन योजना में 97 आवेदनों मेें 28 का ऋण स्वीकृत हो गया। बैंकों ने 78.8 लाख रुपये लोन स्वीकृत कर दिया। इसी तरह मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में छह फाइलों के लिए 9.48 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई। एक जिला-एक उत्पाद में पांच लोगों के लिए साढ़े पांच लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। शेष फाइलों पर कार्रवाई चल रही है। आवेदक को दस से 25 लाख रुपये तक लाभ दिया जाता है।
विज्ञापन
ऐसा करना होगा आवेदन
योजनाओं का लाभ लेने के लिए जिला उद्योग केंद्र के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है। आवेदन के लिए पेन कार्ड, आधार कार्ड, शपथ पत्र, शैक्षिक अभिलेख व परियोजना की रिपोर्ट लगाना होगी। विभाग के पोर्टल पर आने के बाद जांच कर बैंक के लिए फाइल भेजी जाएगी। वहां से जांच के बाद स्वीकृति दी जाती है।
आवेदन की ये हैं शर्तेँ
-आठवीं तक पास होना अनिवार्य है।
-डिफाल्टर नहीं होना चाहिए।
-बैंक की सिविल खराब नहीं हो।
केस एक
जलालाबाद के कोयला ज्ञानपुर निवासी महेश कुमार मध्यप्रदेश में एक कंपनी में मार्केटिंग का काम करते थे। शिक्षित होने के कारण उनका रोजगार अच्छा चल रह था। कोरोना के कारण उनकी नौकरी छूट गई थी। घर लौटने के बाद फिर से परदेस जाने का निर्णय त्याग दिया। लोन लेकर घर के पास ही आटा चक्की लगा ली। अब उनका कारोबार काफी बेहतर चल रहा है।
केस टू-
शहर के मोहल्ला महमंद जलालनगर निवासी रोहित पहले मुंबई में डिजिटल वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी करते थे। कोरोना के कारण उनकी भी वापसी अपने घर हो गई। रोहित ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत ढाई लाख का ऋण लेकर डिजिटल फोटोग्राफी का काम शुरू किया। खुद आत्मनिर्भर होने के साथ ही तीन अन्य लोगों को भी रोजगार दे रखा है।
महिलाओं को मिलता है 25 प्रतिशत अनुदान
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम में शहरी क्षेत्र में मैन्युफैक्चरिंग के लिए 25 लाख और सर्विस सेक्टर मेेें दस लाख तक ऋण मिल जाएगा। इसमें महिलाओं को 25 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। पुरुष में एससी-एसटी और ओबीसी को 25 प्रतिशत और अन्य को 15 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। ग्रामीण इलाकों में दस प्रतिशत बढ़ाकर अनुदान दिया जाता है।
जिला उद्योग केंद्र से संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर युवा अपने रोजगार को ऊंचाइयों तक पहुंचाने में लगे हैं। कोरोना के कारण नौकरी छूटने पर तमाम युवाओं ने आवेदन किया। वे ग्रामीण इलाकों में अपना मिनी उद्योग शुरू कर आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं। -दुर्गेश कुमार, उपायुक्त उद्योग