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ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए भटकते रहे लोग, हाथ लगी मायूसी
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शाहजहांपुर। राजकीय मेडिकल कालेज समेत कोविड अस्पतालों और निजी नर्सिंग होम में कोरोना जैसे लक्षणों के कारण भर्ती कराए गए मरीजों के तीमारदार ऑक्सीजन सिलिंडर पाने के लिए शनिवार को सुबह से दोपहर बाद तक कलक्ट्रेट में सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय के आस पास भटकते रहे। घरों पर क्वारंटीन कोरोना मरीजों के तीमारदारों को मायूसी हाथ लगी। उनसे कहा गया कि अस्पतालों को ऑक्सीजन की सीधे सप्लाई की जा रही है, इसलिए तीमारदार संबंधित डॉक्टरों से संपर्क करें।
जिले में अब तक चार हजार से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। सरकारी अस्पतालों और कोविड सेंटरों पर बमुश्किल तीन सौ गंभीर मरीज भर्ती हैं और शेष संक्रमित घरों पर आइसोलेट होकर या फिर निजी अस्पतालों में भर्ती होकर अपना उपचार करा रहे हैं। राजकीय मेडिकल कॉॅलेज के ट्रामा सेंटर पर रोजाना कोरोना जैसे लक्षणों वाले औसतन 150-200 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकतर लोगों को सांस लेने में दिक्कत की शिकायत होने पर उनके घर वाले ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए प्रभारी अधिकारी बनाए गए सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार के कार्यालय के आसपास चक्कर काट रहे हैं। प्रशासन इन सभी को ऑक्सीजन सिलिंडर देने मेें खुद को असहाय पा रहा है क्योंकि 15 दिन के अंतराल पर 23 टन मांग के सापेक्ष केवल पांच टन तरल ऑक्सीजन मिली और वह भी गैस रिफिलर के माध्यम से सरकारी अस्पतालों को भेजी जा चुकी है।
इन हालातों में नर्सिंग होम और घरों में रहकर उपचार करा रहे लोगों से लेकर उनके तीमारदार छोटे ऑक्सीजन सिलिंडरों के लिए शनिवार को सुबह से दोपहर बाद तक कलक्ट्रेट में भटकते रहे। उस वक्त सिटी मजिस्ट्रेट अन्य प्रशासनिक कार्य से कहीं गए हुए थे। इसलिए सिलिंडर लेने आए उनके कार्यालय के कर्मचारियों ने उन्हें संबंधित अस्पतालों को भेज दिया। एक कोरोना मरीज के घरवाले आटो पर खाली सिलिंडर रखकर उन्हें भरवाने के लिए बरेली मोड़ के रिफिलर प्लांट पर पहुंचे, लेकिन वहां भी बात नहीं बनी। सिटी मजिस्ट्रेट का कहना है कि शासन के निर्देशानुसार सरकारी अस्पतालों को ऑक्सीजन आपूर्ति में प्राथमिकता दी जा रही है और शासन से ऑक्सीजन की अगली खेप मिलने पर घरों मेें क्वारंटीन कोरोना संक्रमितों को उनकी जरूरत के अनुसार सिलिंडर देने पर विचार किया जाएगा।
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जिले में अब तक चार हजार से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। सरकारी अस्पतालों और कोविड सेंटरों पर बमुश्किल तीन सौ गंभीर मरीज भर्ती हैं और शेष संक्रमित घरों पर आइसोलेट होकर या फिर निजी अस्पतालों में भर्ती होकर अपना उपचार करा रहे हैं। राजकीय मेडिकल कॉॅलेज के ट्रामा सेंटर पर रोजाना कोरोना जैसे लक्षणों वाले औसतन 150-200 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकतर लोगों को सांस लेने में दिक्कत की शिकायत होने पर उनके घर वाले ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए प्रभारी अधिकारी बनाए गए सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार के कार्यालय के आसपास चक्कर काट रहे हैं। प्रशासन इन सभी को ऑक्सीजन सिलिंडर देने मेें खुद को असहाय पा रहा है क्योंकि 15 दिन के अंतराल पर 23 टन मांग के सापेक्ष केवल पांच टन तरल ऑक्सीजन मिली और वह भी गैस रिफिलर के माध्यम से सरकारी अस्पतालों को भेजी जा चुकी है।
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इन हालातों में नर्सिंग होम और घरों में रहकर उपचार करा रहे लोगों से लेकर उनके तीमारदार छोटे ऑक्सीजन सिलिंडरों के लिए शनिवार को सुबह से दोपहर बाद तक कलक्ट्रेट में भटकते रहे। उस वक्त सिटी मजिस्ट्रेट अन्य प्रशासनिक कार्य से कहीं गए हुए थे। इसलिए सिलिंडर लेने आए उनके कार्यालय के कर्मचारियों ने उन्हें संबंधित अस्पतालों को भेज दिया। एक कोरोना मरीज के घरवाले आटो पर खाली सिलिंडर रखकर उन्हें भरवाने के लिए बरेली मोड़ के रिफिलर प्लांट पर पहुंचे, लेकिन वहां भी बात नहीं बनी। सिटी मजिस्ट्रेट का कहना है कि शासन के निर्देशानुसार सरकारी अस्पतालों को ऑक्सीजन आपूर्ति में प्राथमिकता दी जा रही है और शासन से ऑक्सीजन की अगली खेप मिलने पर घरों मेें क्वारंटीन कोरोना संक्रमितों को उनकी जरूरत के अनुसार सिलिंडर देने पर विचार किया जाएगा।
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