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खरबूजे को भारी नुकसान पहुंचा रहा फसलों का 'कोरोना'

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Mon, 27 Apr 2020 04:21 PM IST
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'Corona' of crops causing heavy damage to melons
मोजेक वायरस के प्रकोप से सूखी खरबूज की बेल दिखाते अशोक कुमार - फोटो : AMAR UJALA
पुवायां (शाहजहांपुर)। फसलों का 'कोरोना' कहा जाने वाला मोजेक वायरस खरबूजे की फसल को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। एक बेल से दूसरी बेल में फैल रहा यह रोग किसानों को बड़ा घाटा दे सकता है। पुवायां तहसील क्षेत्र में साठा धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती थी। साठा धान पर प्रतिबंध लगाए जाने से किसानों से साठा के विकल्प के तौर पर खरबूजा, मक्का, तुलसी, सूरजमुखी, लौकी, टमाटर आदि की खेती की ओर रूख किया है। पुवायां में खरबूजा पहले भी बड़े क्षेत्रफल में किया जाता रहा है और पुवायां का खीरा उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक सप्लाई होता है, लेकिन साठा पर रोक के बाद अब इसका क्षेत्रफल और बढ़ गया है।
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पुवायां निवासी जल कल विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी अशोक कुमार ने गांव इनायतपुर के पास ठेके पर खेत लेकर खरबूजा लगा रखा है। अशोक कुमार ने बताया कि इस बार खरबूजा उगाने वालों को भारी नुकसान की आशंका है। अभी फसल तैयार हो रही है और मोजेक ने फसल पर हमला कर दिया है। मोजेक एक बेल में हो जाने पर दूसरी बेल को तेज से अपनी चपेट में लेना शुरू कर देता है और वायरस के प्रकोप से बेल और उसमें लगे छोटे फल सूख जाते हैं। अशोक कुमार ने बताया कि जिस बेल में मोजेक वायरस लग जाता है उसको उखड़ा खेत से दूर गड्ढा खोद कर दबा दिया जाता है, जिससे यह लोग खेत में न फैल सके, लेकिन फिर भी यह वायरस फसल को भारी नुकसान पहुंचा रहा है।
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स्प्रे से पाया जा सकता है काबू : पुवायां। कृषि विज्ञान केंद्र शाहजहांपुर के वैज्ञानिक डॉ. एसके वर्मा के अनुसार मोजेक एक प्रकार का वायरस है जो एक पौध से दूसरे पौधे को तेजी से अपनी चपेट में लेता है। वायरस के कमले का शिकार पौध को उखाड़ कर खेत से दूर नष्ट कर देना विकल्प तो हो सकता है लेकिन समाधान नहीं है। मोजेक का हमला होने पर यदि प्रकोप कम है तो एसीटाप्रामिड दो एमएल एक लीटर में घोल कर स्प्रे करना चाहिए। रोग ज्यादा है तो एसीटाप्रामिड दो एमएल और इमडाक्लोर एक एमएल को मिलाकर एक लीटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करने से लाभ होगा।
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