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किसानों को वरीयता के आधार पर दें मुआवजा
मिर्जापुर।
Updated Mon, 13 Apr 2015 11:31 PM IST
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बेमौसम बारिश और सरकार की बेेरूखी से इस बार किसान बहुत दुखी है। खरीफ की फसल में सूखे की मार और रबी की फसल में अतिवृष्टि से सबकुछ नष्ट हो जाने से किसानों के आंसू थम नहीं रहे हैं। सरकार किसानों के आंसू पोंछने के लिए भले ही कुछ मुआवजा देनेे की बात कह रही हो, किंतु सरकारी अमला छोटे किसानों को मुआवजा दिलवाने के बजाय तहसील में दलाली करने वालों को ही अधिकाधिक लाभ पहुंचाने में लगा हुआ है।
अतिवृष्टि के बाद नष्ट हुई रबी फसल का आंकलन करने वालों द्वारा अब तक जलालाबाद तहसील में सिर्फ 345 किसानों को दैवीय आपदा कोष से सरकारी सहायता दिए जाने की बात कही जा रही है। किसानों का कहना है कि क्या इस तहसील के तीन ब्लाकों मे सिर्फ 345 किसान ही ऐसे हैं जिनकी फसलें नष्ट हुई है। किसानों का कहना है कि बेमौसम अतिवृष्टि से फसलों का नुकसान पूरी तहसील में हुआ है। यदि सरकार अतिवृष्टि से नष्ट हुई फसलों से दुखी किसानों के वह रहे आंसू वास्तव मे पोंछना चाहती है,तो राजस्व रिकार्ड के अनुसार छोटे किसानों को वरीयता देते हुए सभी को मुआवजा दे।
कस्बे के किसान रामनिवास ने बताया कि उसके सात बीघा खेत में छह क्विंटल गेहूं की पैदावार हुई है। अब इस पैदावार में कहां से कर्ज अदा करें और कहां से आठ सदस्यों के परिवार का से पेट पाले? रामनिवास का कथन तो एक बानगी है। लगभग सभी छोटे-बड़े किसानों की उपज का यही हाल है। किसानों का कहना है कि अब तो खेती करने से अच्छा दिल्ली, गुजरात जाकर मजदूरी करना अच्छा है।
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फिर होने वाली है मनमानी
मिर्जापुर। वर्ष 2010 की बाढ़ में नष्ट हुई खरीफ फसलों के मुआवजे के भुगतान में राजस्वकर्मियों, दलालों और बैंकों की तिकड़ी ने जमकर मनमानी की थी। दर्जनों 14 सौ रुपये की एकाउंटपेई चेकों को 14 हजार की बियरर चेक बनाकर बैंकों सेे भुगतान ले लिया गया था। ऐसे कई मामलेे पकड़े जाने के बाद भी लेे देकर सुलटा लिया गया था। इसबार ऐसे मामलों पर अफसरों को कड़ी नजर रखनी होगी।
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अतिवृष्टि के बाद नष्ट हुई रबी फसल का आंकलन करने वालों द्वारा अब तक जलालाबाद तहसील में सिर्फ 345 किसानों को दैवीय आपदा कोष से सरकारी सहायता दिए जाने की बात कही जा रही है। किसानों का कहना है कि क्या इस तहसील के तीन ब्लाकों मे सिर्फ 345 किसान ही ऐसे हैं जिनकी फसलें नष्ट हुई है। किसानों का कहना है कि बेमौसम अतिवृष्टि से फसलों का नुकसान पूरी तहसील में हुआ है। यदि सरकार अतिवृष्टि से नष्ट हुई फसलों से दुखी किसानों के वह रहे आंसू वास्तव मे पोंछना चाहती है,तो राजस्व रिकार्ड के अनुसार छोटे किसानों को वरीयता देते हुए सभी को मुआवजा दे।
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कस्बे के किसान रामनिवास ने बताया कि उसके सात बीघा खेत में छह क्विंटल गेहूं की पैदावार हुई है। अब इस पैदावार में कहां से कर्ज अदा करें और कहां से आठ सदस्यों के परिवार का से पेट पाले? रामनिवास का कथन तो एक बानगी है। लगभग सभी छोटे-बड़े किसानों की उपज का यही हाल है। किसानों का कहना है कि अब तो खेती करने से अच्छा दिल्ली, गुजरात जाकर मजदूरी करना अच्छा है।
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फिर होने वाली है मनमानी
मिर्जापुर। वर्ष 2010 की बाढ़ में नष्ट हुई खरीफ फसलों के मुआवजे के भुगतान में राजस्वकर्मियों, दलालों और बैंकों की तिकड़ी ने जमकर मनमानी की थी। दर्जनों 14 सौ रुपये की एकाउंटपेई चेकों को 14 हजार की बियरर चेक बनाकर बैंकों सेे भुगतान ले लिया गया था। ऐसे कई मामलेे पकड़े जाने के बाद भी लेे देकर सुलटा लिया गया था। इसबार ऐसे मामलों पर अफसरों को कड़ी नजर रखनी होगी।