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बाढ़ थमी, गांवों में जलभराव से मुसीबतें बढ़ीं
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शाहजहांपुर में गर्रा नदी का जलस्तर घटने के बावजूद सुभाषनगर की सड़कों पर भरे पानी में होकर निकलते
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। गंगा और रामगंगा समेत सभी नदियों में बाढ़ घट रही है। हालांकि अभी शहर के कई मोहल्ले और गांवों में जलभराव बरकरार है। इसकी वजह से लोगों को आने जाने की खासी दिक्कत हो रही हैं। उधर, गांवों में पानी भरा होने से जलालाबाद और कलान तहसील क्षेत्र में तमाम परिवार कोलाघाट रोड और फर्रुखाबाद-बरेली मार्ग पर रह रहे हैं।
सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार नदियों में अतिरिक्त पानी की निकासी लगातार कम हो रही है, जिससे नदियों का जलस्तर तेजी से घट रहा है। नरौरा बैराज से गंगा में पानी की निकासी घटकर 59555 क्यूसेक रह गई है। दो दिन पहले रामगंगा में दो दिन पहले की तुलना में पानी की निकासी करीब 50 प्रतिशत कम हो गई है। ड्यूनी डाम से गर्रा में अब सिर्फ 472 क्यूसेक पानी निकल रहा है। इस कारण कलान के भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर 26 सेमी और बरेली के चौबारी घाट पर रामगंगा 54 सेमी और शहर के समीप गर्रा का जलस्तर 95 सेमी घट गया है। सिंचाई विभाग के अनुसार बीते पिछले तीन दिन में गंगा 85 सेमी, रामगंगा 1.67 मीटर, गर्रा 1.80 मीटर और खन्नौत 55 सेमी कम हो गई है, लेकिन तराई के जो निचले इलाके जलमग्न हुए हैं, वहां बाढ़ के हालात जस के तस बने हैं।
शहर के सुभाषनगर क्षेत्र में राईखेड़ा-मालगोदाम मार्ग पर डॉट वाली पुलिया के पास पानी उतर जाने से आवागमन होने लगा है। मगर इसी क्षेत्र के अन्य कई रास्तों पर अभी घुटनों तक पानी भरा होने से लोगों का आना जाना बंद है। वहां के तमाम मकान अभी बाढ़ के पानी से घिरे हैं। उधर, खन्नौत मेें पानी का उतार धीमी गति से हो रहा है, जिससे मोहल्ला लोधीपुर से लेकर बिसरात, हनुमतधाम और दलेलगंज के तटीय इलाकों में पानी भरा है।
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उधर, मिर्जापुर क्षेत्र में कोलाघाट पुल से भारी वाहनों के आवागमन पर बुधवार चौथे दिन भी रोक लगी रही। रामगंगा में जलमग्न हुए बदायूं-जलालाबाद-शाहजहांपुर स्टेट हाईवे खड्ड बन गया है। हाईवे पर कोई हादसा टालने के लिए प्रशासन ने पुल के दोनों ओर बेरीकेडिंग कर दी है। पुल के दोनों ओर की एप्रोच रोड मिट्टी कटने से कई जगह खोखला हो गया है। हाईवे पर बने गहरे गड्ढों को मिट्टी और पीली ईंटें डालकर समतल किया जा रहा है।
बाढ़ पीड़ितों की दिवाली होगी फीकी
जलालाबाद क्षेत्र के सैकड़ों गांवों अभी जलभराव है। इन गांवों में रहने वाले परिवार सड़कों पर शरण लिए हैं। अभी उन्हें घर लौटने में कई दिन लग सकते हैं। दिवाली न नजदीक हैं। बाढ़ पीड़ितों के घरों में कीचड़, पानी भरा है। इससे इनकी दिवाली फीकी हो सकती है। प्रभावित इलाके के लोग पालतू पशुओं के चारा को लेकर भी परेशान है। क्षेत्र के गांव रैपुरा, कसारी, बीघापुर,सिठौली, कटरिया, एलमनगर के अलावा खंडहर क्षेत्र के ज्यादातर गांवों के निचले इलाके अभी जलमग्न हैं।
तिकोला पुल का निर्माण कार्य रुका
जलालाबाद के तिकोला गांव के पास बहगुल तथा रामगंगा नदियों के बीच बसे करीब डेढ़ दर्जन गांवों के लोगों को आवागमन की सुविधा के लिए प्रदेश सरकार ने बहगुल नदी पर पुल की स्वीकृति दी थी। पुल निर्माण के लिए 15.50 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृति कर बीते जून माह में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इसका शिलान्यास भी कर दिया। इसके तुरंत बाद कार्यदायी संस्था सेतु निर्माण निगम की टीम ने यहां डेरा डालकर जैसे ही कामशुरू किया, पुल निर्माण के स्थल को लेकर विभिन्न गांवों के लोगों ने दो गुटों में बंटकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रशासन केसख्त रुख अपनाने के बाद आंदोलन खत्म हो गया और पुल का निर्माण कार्य तिकोला घाट से शुरू कर दिया गया। आपसी खींचातान का नतीजा यह रहा कि पुल निर्माण का कार्य दो महीने देर से शुरू हो सका। पुल के दो पिलर बनाने का कार्य चल रहा था कि बाढ़ से कार्यस्थल और कर्मचारियों के अस्थाई आवास जलमग्न होने से निर्माण कार्य रुक गया। साइड इंचार्ज किशन ने बताया कि विधिवत कार्य शुरू होने में एक माह लग सकता है।
पूर्व विधायक ने मुआवजा के लिए डीएम को लिखा पत्र
शाहजहांपुर। जलालाबाद विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रहे भाजपा नेता नीरज कुशवाहा मौर्य ने डीएम को पत्र लिखकर बाढ़ में नष्ट हुई फसलों और कच्चे घरों का आकलन करके मुआवजा देने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि भारी वर्षा के बाद नदियों में आयी भयंकर बाढ़ से क्षेत्र के किसानों की धान, गन्ना, आलू, उर्द, तिल, ज्वार-बाजरा, मक्का आदि की फसलें डूबकर बरबाद हो गईं हैं। जिससे किसानों का सामान्य जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। प्रभावित परिवार बाढ़ और अतिवृष्टि जैसी दोहरी दैवीय आपदा की मार से भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं।
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सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार नदियों में अतिरिक्त पानी की निकासी लगातार कम हो रही है, जिससे नदियों का जलस्तर तेजी से घट रहा है। नरौरा बैराज से गंगा में पानी की निकासी घटकर 59555 क्यूसेक रह गई है। दो दिन पहले रामगंगा में दो दिन पहले की तुलना में पानी की निकासी करीब 50 प्रतिशत कम हो गई है। ड्यूनी डाम से गर्रा में अब सिर्फ 472 क्यूसेक पानी निकल रहा है। इस कारण कलान के भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर 26 सेमी और बरेली के चौबारी घाट पर रामगंगा 54 सेमी और शहर के समीप गर्रा का जलस्तर 95 सेमी घट गया है। सिंचाई विभाग के अनुसार बीते पिछले तीन दिन में गंगा 85 सेमी, रामगंगा 1.67 मीटर, गर्रा 1.80 मीटर और खन्नौत 55 सेमी कम हो गई है, लेकिन तराई के जो निचले इलाके जलमग्न हुए हैं, वहां बाढ़ के हालात जस के तस बने हैं।
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शहर के सुभाषनगर क्षेत्र में राईखेड़ा-मालगोदाम मार्ग पर डॉट वाली पुलिया के पास पानी उतर जाने से आवागमन होने लगा है। मगर इसी क्षेत्र के अन्य कई रास्तों पर अभी घुटनों तक पानी भरा होने से लोगों का आना जाना बंद है। वहां के तमाम मकान अभी बाढ़ के पानी से घिरे हैं। उधर, खन्नौत मेें पानी का उतार धीमी गति से हो रहा है, जिससे मोहल्ला लोधीपुर से लेकर बिसरात, हनुमतधाम और दलेलगंज के तटीय इलाकों में पानी भरा है।
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उधर, मिर्जापुर क्षेत्र में कोलाघाट पुल से भारी वाहनों के आवागमन पर बुधवार चौथे दिन भी रोक लगी रही। रामगंगा में जलमग्न हुए बदायूं-जलालाबाद-शाहजहांपुर स्टेट हाईवे खड्ड बन गया है। हाईवे पर कोई हादसा टालने के लिए प्रशासन ने पुल के दोनों ओर बेरीकेडिंग कर दी है। पुल के दोनों ओर की एप्रोच रोड मिट्टी कटने से कई जगह खोखला हो गया है। हाईवे पर बने गहरे गड्ढों को मिट्टी और पीली ईंटें डालकर समतल किया जा रहा है।
बाढ़ पीड़ितों की दिवाली होगी फीकी
जलालाबाद क्षेत्र के सैकड़ों गांवों अभी जलभराव है। इन गांवों में रहने वाले परिवार सड़कों पर शरण लिए हैं। अभी उन्हें घर लौटने में कई दिन लग सकते हैं। दिवाली न नजदीक हैं। बाढ़ पीड़ितों के घरों में कीचड़, पानी भरा है। इससे इनकी दिवाली फीकी हो सकती है। प्रभावित इलाके के लोग पालतू पशुओं के चारा को लेकर भी परेशान है। क्षेत्र के गांव रैपुरा, कसारी, बीघापुर,सिठौली, कटरिया, एलमनगर के अलावा खंडहर क्षेत्र के ज्यादातर गांवों के निचले इलाके अभी जलमग्न हैं।
तिकोला पुल का निर्माण कार्य रुका
जलालाबाद के तिकोला गांव के पास बहगुल तथा रामगंगा नदियों के बीच बसे करीब डेढ़ दर्जन गांवों के लोगों को आवागमन की सुविधा के लिए प्रदेश सरकार ने बहगुल नदी पर पुल की स्वीकृति दी थी। पुल निर्माण के लिए 15.50 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृति कर बीते जून माह में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इसका शिलान्यास भी कर दिया। इसके तुरंत बाद कार्यदायी संस्था सेतु निर्माण निगम की टीम ने यहां डेरा डालकर जैसे ही कामशुरू किया, पुल निर्माण के स्थल को लेकर विभिन्न गांवों के लोगों ने दो गुटों में बंटकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रशासन केसख्त रुख अपनाने के बाद आंदोलन खत्म हो गया और पुल का निर्माण कार्य तिकोला घाट से शुरू कर दिया गया। आपसी खींचातान का नतीजा यह रहा कि पुल निर्माण का कार्य दो महीने देर से शुरू हो सका। पुल के दो पिलर बनाने का कार्य चल रहा था कि बाढ़ से कार्यस्थल और कर्मचारियों के अस्थाई आवास जलमग्न होने से निर्माण कार्य रुक गया। साइड इंचार्ज किशन ने बताया कि विधिवत कार्य शुरू होने में एक माह लग सकता है।
पूर्व विधायक ने मुआवजा के लिए डीएम को लिखा पत्र
शाहजहांपुर। जलालाबाद विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रहे भाजपा नेता नीरज कुशवाहा मौर्य ने डीएम को पत्र लिखकर बाढ़ में नष्ट हुई फसलों और कच्चे घरों का आकलन करके मुआवजा देने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि भारी वर्षा के बाद नदियों में आयी भयंकर बाढ़ से क्षेत्र के किसानों की धान, गन्ना, आलू, उर्द, तिल, ज्वार-बाजरा, मक्का आदि की फसलें डूबकर बरबाद हो गईं हैं। जिससे किसानों का सामान्य जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। प्रभावित परिवार बाढ़ और अतिवृष्टि जैसी दोहरी दैवीय आपदा की मार से भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं।