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बाढ़ घटी, संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ा
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शाहजहांपुर। गंगा और रामगंगा के जलस्तर में शनिवार को भी उतार जारी रहा। हालांकि तटवर्ती गांवों के रास्तों पर अभी पानी भरा है। बाढ़ घटने के साथ पानी में डूबी फसलें और घास सड़ने लगी है, जिससे दुर्गंध फैल रही है। इससे बाढ़ प्रभावित इलाकों में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। मगर मिर्जापुर से लेकर परौर तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष को आज सुबह प्राप्त सूचनाओं के अनुसार नरौरा बैराज से 81018 क्यूसेक पानी की निकासी की गई। अब रामगंगा का जलस्तर आठ सेमी कम होकर 158.96 मीटर हो गया है। गंगा में पानी कम होने से मिर्जापुर क्षेत्र में तटीय गांवों से पानी निकल चुका है, लेकिन घरों के आसपास और निचले रास्तों पर पानी भरा हुआ है। उसमें सड़ रहे कूड़े और घास-फूस से दुर्गंध उठ रही है।
दूसरे जलमग्न हुए हैंडपंपों से निकलने वाले दूषित पेयजल के इस्तेमाल से सर्दी, जुकाम, बुखार और चर्म रोग बढ़ रहे हैं। मगर बाढ़ प्रभावित इलाकों में इलाज की अभी तक कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। इलाज के लिए ग्रामीण गलियों और कच्चे रास्तों में भरे गंदे पानी से निकलकर झोलाछाप की शरण में जाने को मजबूर हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों से लगभग पांच किमी पृथ्वीपुर ढाई स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कोई डॉक्टर नहीं रहता। जरियनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गंगा के तटवर्ती गांवों से लगभग 12 किमी दूर होने के कारण वहां तक पहुंचना बाढ़ पीड़ितों को काफी मुश्किल हो रहा है।
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परौर में पीएचसी और पशु अस्पताल बने दिखावटी
परौर। यहां स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर, फार्मासिस्ट, एएनएम, लैब टेक्नीशियन, वार्ड ब्वॉय आदि की तैनाती होने पर लोगों को इलाज की सुविधा मिलती थी। मगर मगर वर्ष 2018 में डॉ. वीपी सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद से डॉक्टर का पद रिक्त पड़ा है। यहां अब सिर्फ सफाई कर्मचारी, एएनएम और फार्मासिस्ट तैनात हैं।
इसी तरह यहां स्थित पशु अस्पताल में वर्ष 2000 के बाद से कोई डॉक्टर नहीं है। अगर एक-दो माह के लिए पोस्टिंग की जाती है तो संबंधित डॉक्टर अपना तबादला करा लेते हैं। डॉक्टर के नहीं होने से ग्रामीणों को पशुओं का इलाज कराने में असुविधा होती है। देखरेख के अभाव में गांव के लोगों ने अस्पताल परिसर में अतिक्रमण कर वहां अपने पशु बांधने और कंडे पाथने शुरू कर दिए हैं। कहने को डॉ. सुभान अहमद तैनात हैं, लेकिन उनके पास मदनापुर और मिर्जापुर पशु अस्पतालों का अतिरिक्त प्रभार होने से वह यहां समय नहीं दे पाते हैं।
हर साल बाढ़ का प्रकोप थमने के बाद दूषित पेयजल से बीमारियां होने लगती है। सड़ी-गली घास खाने से पशुओं में भी तमाम बीमारियां होने लगती हैं, लेकिन सरकारी अस्पताल सिर्फ देखने भर को रह गए हैं। वहां डॉक्टर नहीं होने से दवाएं भी नहीं मिल रही हैं।
- रामभरोसे प्रजापति, परौर
गांव में आदमियों का इलाज होना तो दूर रहा, बीमार पशुओं को भी दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। अस्पताल जाने पर न तो डॉक्टर मिलते हैं और न ही दवाएं। दोनों सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था तत्काल सुधारी जाए, या फिर उन्हें बंद कर दिया जाना चाहिए।
- रक्षपाल सिंह, परौर
कई बार ऐसे मौके पड़े जब बीमार होने पर पीएचसी जाना पड़ा, लेकिन हर बार खाली लौटना पड़ा क्योंकि वहां डॉक्टर कभी मिलते ही नहीं हैं। तमाम भूमिहीन परिवार पशुपालन से रोजी-रोटी कमा रहे हैं, लेकिन उन्हें पशुओं के इलाज को भटकना पड़ता है।
- जय सिंह यादव, मोहनपुर
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों विशेषकर मिर्जापुर, जरियनपुर और परौर के सरकारी अस्पतालों में मौसमी बीमारियों के इलाज को सभी जरूरी दवाएं समुचित मात्रा में उपलब्ध हैं। अभी बाढ़ क्षेत्र में बीमारियां फैलने की कोई सूचना नहीं है। इन सभी अस्पतालों से अन्य निकटतम अस्पतालों के प्रभारी डॉक्टरों को संबद्घ किया गया है। आवश्यकता पड़ी तो दवाओं की अतिरिक्त खेप भेजी जाएगी और स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाए जाएंगे।
- डॉ. एसपी गौतम, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
परौर पशु चिकित्सालय परिसर में अतिक्रमण की बात मेरे संज्ञान में नहीं है। हाल ही में एक पशु चिकित्सक को परौर भेजा गया है, लेकिन वह अवकाश पर घर गए हैं। बाढ़ क्षेत्र में पशुओं का उपचार बाधित नहीं है और उनका नियमित टीकाकरण भी कराया जा रहा है। यदि अतिक्रमण की कोई शिकायत प्राप्त होती है तो उस पर ठोस कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. आरबी सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
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बाढ़ नियंत्रण कक्ष को आज सुबह प्राप्त सूचनाओं के अनुसार नरौरा बैराज से 81018 क्यूसेक पानी की निकासी की गई। अब रामगंगा का जलस्तर आठ सेमी कम होकर 158.96 मीटर हो गया है। गंगा में पानी कम होने से मिर्जापुर क्षेत्र में तटीय गांवों से पानी निकल चुका है, लेकिन घरों के आसपास और निचले रास्तों पर पानी भरा हुआ है। उसमें सड़ रहे कूड़े और घास-फूस से दुर्गंध उठ रही है।
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दूसरे जलमग्न हुए हैंडपंपों से निकलने वाले दूषित पेयजल के इस्तेमाल से सर्दी, जुकाम, बुखार और चर्म रोग बढ़ रहे हैं। मगर बाढ़ प्रभावित इलाकों में इलाज की अभी तक कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। इलाज के लिए ग्रामीण गलियों और कच्चे रास्तों में भरे गंदे पानी से निकलकर झोलाछाप की शरण में जाने को मजबूर हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों से लगभग पांच किमी पृथ्वीपुर ढाई स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कोई डॉक्टर नहीं रहता। जरियनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गंगा के तटवर्ती गांवों से लगभग 12 किमी दूर होने के कारण वहां तक पहुंचना बाढ़ पीड़ितों को काफी मुश्किल हो रहा है।
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परौर में पीएचसी और पशु अस्पताल बने दिखावटी
परौर। यहां स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर, फार्मासिस्ट, एएनएम, लैब टेक्नीशियन, वार्ड ब्वॉय आदि की तैनाती होने पर लोगों को इलाज की सुविधा मिलती थी। मगर मगर वर्ष 2018 में डॉ. वीपी सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद से डॉक्टर का पद रिक्त पड़ा है। यहां अब सिर्फ सफाई कर्मचारी, एएनएम और फार्मासिस्ट तैनात हैं।
इसी तरह यहां स्थित पशु अस्पताल में वर्ष 2000 के बाद से कोई डॉक्टर नहीं है। अगर एक-दो माह के लिए पोस्टिंग की जाती है तो संबंधित डॉक्टर अपना तबादला करा लेते हैं। डॉक्टर के नहीं होने से ग्रामीणों को पशुओं का इलाज कराने में असुविधा होती है। देखरेख के अभाव में गांव के लोगों ने अस्पताल परिसर में अतिक्रमण कर वहां अपने पशु बांधने और कंडे पाथने शुरू कर दिए हैं। कहने को डॉ. सुभान अहमद तैनात हैं, लेकिन उनके पास मदनापुर और मिर्जापुर पशु अस्पतालों का अतिरिक्त प्रभार होने से वह यहां समय नहीं दे पाते हैं।
हर साल बाढ़ का प्रकोप थमने के बाद दूषित पेयजल से बीमारियां होने लगती है। सड़ी-गली घास खाने से पशुओं में भी तमाम बीमारियां होने लगती हैं, लेकिन सरकारी अस्पताल सिर्फ देखने भर को रह गए हैं। वहां डॉक्टर नहीं होने से दवाएं भी नहीं मिल रही हैं।
- रामभरोसे प्रजापति, परौर
गांव में आदमियों का इलाज होना तो दूर रहा, बीमार पशुओं को भी दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। अस्पताल जाने पर न तो डॉक्टर मिलते हैं और न ही दवाएं। दोनों सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था तत्काल सुधारी जाए, या फिर उन्हें बंद कर दिया जाना चाहिए।
- रक्षपाल सिंह, परौर
कई बार ऐसे मौके पड़े जब बीमार होने पर पीएचसी जाना पड़ा, लेकिन हर बार खाली लौटना पड़ा क्योंकि वहां डॉक्टर कभी मिलते ही नहीं हैं। तमाम भूमिहीन परिवार पशुपालन से रोजी-रोटी कमा रहे हैं, लेकिन उन्हें पशुओं के इलाज को भटकना पड़ता है।
- जय सिंह यादव, मोहनपुर
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों विशेषकर मिर्जापुर, जरियनपुर और परौर के सरकारी अस्पतालों में मौसमी बीमारियों के इलाज को सभी जरूरी दवाएं समुचित मात्रा में उपलब्ध हैं। अभी बाढ़ क्षेत्र में बीमारियां फैलने की कोई सूचना नहीं है। इन सभी अस्पतालों से अन्य निकटतम अस्पतालों के प्रभारी डॉक्टरों को संबद्घ किया गया है। आवश्यकता पड़ी तो दवाओं की अतिरिक्त खेप भेजी जाएगी और स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाए जाएंगे।
- डॉ. एसपी गौतम, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
परौर पशु चिकित्सालय परिसर में अतिक्रमण की बात मेरे संज्ञान में नहीं है। हाल ही में एक पशु चिकित्सक को परौर भेजा गया है, लेकिन वह अवकाश पर घर गए हैं। बाढ़ क्षेत्र में पशुओं का उपचार बाधित नहीं है और उनका नियमित टीकाकरण भी कराया जा रहा है। यदि अतिक्रमण की कोई शिकायत प्राप्त होती है तो उस पर ठोस कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. आरबी सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी