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सीने में ही रह गया बेटी के हाथ पीले करने का अरमान

Wed, 09 Jun 2021 01:20 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 09 Jun 2021 01:20 AM IST
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शाहजहांपुर। पिता का अरमान होता है कि वह अपनी बिटिया के हाथ पीले करने के बाद ही दुनिया से रुखसत हो, जिससे कन्यादान के फर्ज का निर्वहन हो सके। लेकिन कोरोना संक्रमण काल में कई पिता इस अरमान को सीने में दबाए ही चल बसे। यूपीएस हथिनी नगरिया के सहायक अध्यापक और एआरपी मुरारी लाल यादव भी जल्द बिटिया के हाथ पीला करना चाहते थे पर यह अरमान उनका पूरा नहीं हो सका।
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परिजनों ने बताया कि मुरारी लाल यादव 26 अप्रैल को चुनाव के लिए प्रशिक्षण लेने गए थे। जहां से लौटने के बाद उनको बुखार आया। सामान्य बुुखार समझकर उन्होंने पहले ऐसे ही दवा ले ली। लेकिन उससे लाभ होने की बजाय उनकी तबीयत और बिगड़ती चली गई। सांस लेने में तकलीफ होने पर पांच अप्रैल को परिजन उनको लेकर बरेली भागे। जहां प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया। जांच कराए जाने पर उनकी रिपोर्ट कोरोना संक्रमित आई। अस्पताल में भर्ती रहने के बावजूद मुरारी लाल को कोई फायदा नहीं हुआ। जिस पर परिजनों ने उनको दूसरे अस्पताल में ले जाने का निर्णय लिया। सात अप्रैल को दूसरे अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही सांस उखड़ने से उनका निधन हो गया। वह अपने पीछे पत्नी रेनू यादव, बेटी रुचि यादव (20), दो बेटों अजय यादव (17) व राहुल यादव (15) को छोड़ गए। बेटी रुचि बीटीसी कर रही हैं, लेकिन उसके ब्याह की चिंता मुरारी लाल को होने लगी थी। जबकि अजय 12वीं और राहुल 11वीं कक्षा के छात्र हैं।
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बेटे ने कहा-पिता की मौत से पूरा परिवार टूटा
मुरारी लाल यादव के बड़े बेटे अजय यादव ने बताया कि उनके पिता का कुछ महीने पहले ही एआरपी के पद पर प्रमोशन हुआ था। परिवार में सब बहुत खुश थे। लेकिन कोरोना संक्रमण काल में पिताजी का पंचायत चुनाव के लिए प्रशिक्षण लेने जाना उनके परिवार के लिए कभी न कम होने वाला दर्द दे गया। पिता की मौत से पूरा परिवार टूट चुका है। उनके जाने के बाद परिवार में कोई भी कमाने वाला नहीं बचा है। अब हमारे सामने सिर्फ अपने गांव नौगवां कुंडरिया वापस जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है। वर्तमान में हमारा परिवार कलान कस्बे में ही निवास कर रहा है। अजय ने बताया कि उनके पिता का व्यवहार सभी के लिए सहयोगात्मक था। वह दूसरों की मदद के लिए हमेशा आगे रहते थे। संवाद
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