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पहाड़ों पर हुई बारिश से गंगा, रामगंगा का जलस्तर बढ़ा, बाढ़ की आशंका
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शाहजहांपुर। पहाड़ों हुई वर्षा के कारण जिले से होकर बहने वाली गंगा, रामगंगा का जल स्तर बढ़ने लगा है। सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार पिछले 48 घंटे के दौरान बदायूं के कछला घाट से लेकर कलान के भैंसार बांध तक गंगा और चौबारी (बरेली) में रामगंगा का जल स्तर दस सेमी बढ़ चुका है। शहर के समीप से होकर बहने वाली गर्रा नदी अपने पेटे से बाहर आने लगी है। रामगंगा मेें पानी बढ़ने से परौर में तटबंध निर्माण का काम प्रभावित होने लगा है। नदियों के तटवर्ती गांवों के किसानों को बाढ़ आने की दशा में फसलें डूबने और कृषि भूमि के कटान की चिंता सता रही है।
नरौरा बैराज से गंगा में पानी की निकासी बहुत कम (22757 क्यूसेक) हो रही है, लेकिन भैंसार बांध पर बीते 72 घंटे में गंगा 30 सेमी बढ़कर 142 मीटर पर पहुंच गई है, जबकि खतरे का निशान एक मीटर ऊपर है। उधर, कछला में गंगा गत दो दिन से खतरे के निशान से 40 सेमी ऊपर 162.40 मीटर पर स्थिर है। चौबारी में रामगंगा का बहाव खतरे के निशान से दो मीटर नीचे 158.40 मीटर पर हो रहा है, लेकिन परौर क्षेत्र मेें तटवर्ती गांवों की ओर पानी फैलाव ले रहा है। सिंचाई विभाग के तार बाबू गिरिजा किशोर मिश्र के अनुसार कालागढ़, हरेली, खो, किच्छा और धौरा डाम से अभी रामगंगा में सिर्फ 2960 क्यूसेक पानी निकल रहा है, लेकिन कालागढ़ डाम से पानी की निकासी बढ़ने पर बाढ़ की स्थिति बन सकती है।
महानगर के किनारों पर उफनाईं गर्रा और खन्नौत
बड़ी नदियों में पानी बढ़ने के साथ महानगर के पूर्वी छोर पर खन्नौत और पश्चिमी किनारे पर बहने वाली गर्रा नदी भी उफनाने लगी है। अमूमन गर्रा में सामान्य से 30-40 सेमी पानी बढ़ने पर भी खन्नौत शांत रहती है, लेकिन पिछले दो दिन में दोनों नदियों का जल स्तर 20-20 सेमी बढ़ चुका है। मंगलवार को अजीजगंज डाम तक हिलोरें ले रही गर्रा का जल स्तर 145.60 मीटर मापा गया जो सामान्य से 50 सेमी अधिक है। खन्नौत खतरे के निशान से 2.95 मीटर नीचे 143.55 मीटर पर बह रही है, लेकिन नदी उफान लेती दिख रही है। लोधीपुर पुल के पास नदी ने फ्लड जोन मेें बनाए गए कई निर्माणाधीन मकान अपने आगोश में ले लिए और अब इंदिरानगर कॉलोनी की ओर बढ़ रही है। खन्नौत मेें बाढ़ की स्थिति बनने पर बिसरात रोड पर प्रताप एन्क्लेव कॉलोनी भी उसकी चपेट में आ जाएगी।
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रामगंगा पर तटबंधों के निर्माण का रुका काम
परौर रामगंगा के तटवर्ती गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए नाबार्ड से 9.05 करोड़ रुपये के बजट से 14 अस्थायी तटबंध बनाए जाने हैं। गत 11 जून से केवल नौ ठोकरों पर काम शुरू हुआ, लेकिन अभी तक मात्र एक ठोकर बन सकी है। इस काम की शुरुआत के दौरान करीब 400 मजदूर लगाए थे, लेकिन अब उनकी संख्या घटकर 40 के आसपास रह गई है। नदी में पानी बढने से तटबंधों का निर्माण कार्य रुक गया है और बाढ़ के हालात पैदा होने पर यहां के मजरा मोहनपुर, नरायननगर आदि में पानी घुसना तय है। सिंचाई विभाग का दावा है कि तटवर्ती गांवों की ओर से नदी की धारा मोडने भर को 50 फीसदी काम हो चुका है, लेकिन ग्रामीण अपनी फसलों और खेतों के अस्तित्व को लेकर खासे चिंतित हैं।
मेरा नदी के किनारे खेत था, जिसे रामगंगा ने पूरी तरह काट दिया। दो बीघा खेत बचा था, लेकिन वह भी ठोकर निर्माण कार्य में रेत भर जाने से तहस-नहस हो गया। अब मेहनत-मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करना पड़ रहा है।
-दोदराम कुशवाहा, नरायन नगला (परौर)
मेरे पास 20 बीघा खेत था। रामगंगा की बाढ़ ने उसे काटकर तहस-नहस कर दिया। मजदूरी के सिवाय परिवार के भरण पोषण का कोई जरिया नहीं रह गया है। चिंता इस बात की है कि बाकी बचा खेत कहीं बाढ़ में कट गया तो रोटी के लाले पड़ जाएंगे।
-मुलायम सिंह, बिचपुरी
हम चार भाई हैं। तीन सौ बीघा जमीन से मजे मेें जिंदगी कट रही थी, लेकिन वर्ष 2010 मेें आई बाढ़ ने काट दी। कुछ जमीन रामगंगा के दिशा बदलने से धारा के दूसरी ओर पड़ गई है, जिसमें रेत होने से ज्यादा पैदावार नहीं होती। यह जमीन बाढ़ में कटी तो जीने का सहारा छिन जाएगा।
-रामवीर, मोहनपुर (परौर)
जिले की नदियों में अभी बाढ़ की कोई स्थिति नहीं है। सभी नदियां अपनी सीमा मेें और खतरे के निशान से काफी नीचे हैं। बैराजों से पानी की निकासी भी सीमित हो रही है। परौर मेें तटबंधों पर इतना काम हो चुका है कि आसपास के गांवों में बाढ़ का पानी घुसने से रोका जा सके।
- आरके वर्मा, अधिशासी अभियंता (सिंचाई विभाग)
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नरौरा बैराज से गंगा में पानी की निकासी बहुत कम (22757 क्यूसेक) हो रही है, लेकिन भैंसार बांध पर बीते 72 घंटे में गंगा 30 सेमी बढ़कर 142 मीटर पर पहुंच गई है, जबकि खतरे का निशान एक मीटर ऊपर है। उधर, कछला में गंगा गत दो दिन से खतरे के निशान से 40 सेमी ऊपर 162.40 मीटर पर स्थिर है। चौबारी में रामगंगा का बहाव खतरे के निशान से दो मीटर नीचे 158.40 मीटर पर हो रहा है, लेकिन परौर क्षेत्र मेें तटवर्ती गांवों की ओर पानी फैलाव ले रहा है। सिंचाई विभाग के तार बाबू गिरिजा किशोर मिश्र के अनुसार कालागढ़, हरेली, खो, किच्छा और धौरा डाम से अभी रामगंगा में सिर्फ 2960 क्यूसेक पानी निकल रहा है, लेकिन कालागढ़ डाम से पानी की निकासी बढ़ने पर बाढ़ की स्थिति बन सकती है।
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महानगर के किनारों पर उफनाईं गर्रा और खन्नौत
बड़ी नदियों में पानी बढ़ने के साथ महानगर के पूर्वी छोर पर खन्नौत और पश्चिमी किनारे पर बहने वाली गर्रा नदी भी उफनाने लगी है। अमूमन गर्रा में सामान्य से 30-40 सेमी पानी बढ़ने पर भी खन्नौत शांत रहती है, लेकिन पिछले दो दिन में दोनों नदियों का जल स्तर 20-20 सेमी बढ़ चुका है। मंगलवार को अजीजगंज डाम तक हिलोरें ले रही गर्रा का जल स्तर 145.60 मीटर मापा गया जो सामान्य से 50 सेमी अधिक है। खन्नौत खतरे के निशान से 2.95 मीटर नीचे 143.55 मीटर पर बह रही है, लेकिन नदी उफान लेती दिख रही है। लोधीपुर पुल के पास नदी ने फ्लड जोन मेें बनाए गए कई निर्माणाधीन मकान अपने आगोश में ले लिए और अब इंदिरानगर कॉलोनी की ओर बढ़ रही है। खन्नौत मेें बाढ़ की स्थिति बनने पर बिसरात रोड पर प्रताप एन्क्लेव कॉलोनी भी उसकी चपेट में आ जाएगी।
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रामगंगा पर तटबंधों के निर्माण का रुका काम
परौर रामगंगा के तटवर्ती गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए नाबार्ड से 9.05 करोड़ रुपये के बजट से 14 अस्थायी तटबंध बनाए जाने हैं। गत 11 जून से केवल नौ ठोकरों पर काम शुरू हुआ, लेकिन अभी तक मात्र एक ठोकर बन सकी है। इस काम की शुरुआत के दौरान करीब 400 मजदूर लगाए थे, लेकिन अब उनकी संख्या घटकर 40 के आसपास रह गई है। नदी में पानी बढने से तटबंधों का निर्माण कार्य रुक गया है और बाढ़ के हालात पैदा होने पर यहां के मजरा मोहनपुर, नरायननगर आदि में पानी घुसना तय है। सिंचाई विभाग का दावा है कि तटवर्ती गांवों की ओर से नदी की धारा मोडने भर को 50 फीसदी काम हो चुका है, लेकिन ग्रामीण अपनी फसलों और खेतों के अस्तित्व को लेकर खासे चिंतित हैं।
मेरा नदी के किनारे खेत था, जिसे रामगंगा ने पूरी तरह काट दिया। दो बीघा खेत बचा था, लेकिन वह भी ठोकर निर्माण कार्य में रेत भर जाने से तहस-नहस हो गया। अब मेहनत-मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करना पड़ रहा है।
-दोदराम कुशवाहा, नरायन नगला (परौर)
मेरे पास 20 बीघा खेत था। रामगंगा की बाढ़ ने उसे काटकर तहस-नहस कर दिया। मजदूरी के सिवाय परिवार के भरण पोषण का कोई जरिया नहीं रह गया है। चिंता इस बात की है कि बाकी बचा खेत कहीं बाढ़ में कट गया तो रोटी के लाले पड़ जाएंगे।
-मुलायम सिंह, बिचपुरी
हम चार भाई हैं। तीन सौ बीघा जमीन से मजे मेें जिंदगी कट रही थी, लेकिन वर्ष 2010 मेें आई बाढ़ ने काट दी। कुछ जमीन रामगंगा के दिशा बदलने से धारा के दूसरी ओर पड़ गई है, जिसमें रेत होने से ज्यादा पैदावार नहीं होती। यह जमीन बाढ़ में कटी तो जीने का सहारा छिन जाएगा।
-रामवीर, मोहनपुर (परौर)
जिले की नदियों में अभी बाढ़ की कोई स्थिति नहीं है। सभी नदियां अपनी सीमा मेें और खतरे के निशान से काफी नीचे हैं। बैराजों से पानी की निकासी भी सीमित हो रही है। परौर मेें तटबंधों पर इतना काम हो चुका है कि आसपास के गांवों में बाढ़ का पानी घुसने से रोका जा सके।
- आरके वर्मा, अधिशासी अभियंता (सिंचाई विभाग)