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कोरोना की सुनामी में पीड़ितों के मददगार बने उद्योगपति
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शाहजहांपुर। करोना कि दूसरी लहर में जनपद का उद्योग लगभग चौपट होने की कगार पर है। बड़े शहरों में लॉकडाउन की वजह से कच्चा माल और केमिकल नहीं आ पा रहे हैं। इसकेे बावजूद कोरोना से पीड़ित उद्यमियों के परिवार और कर्मचारी अपना दर्द भूलकर पीड़ितों की मदद को आगे आए हैं। उन्होंने इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक अग्रवाल की अपील पर फैक्ट्रियों में इस्तेमाल होने वाले बड़े सिलिंडर जमा करके प्रशासन को उपलब्ध कराने शुरू कर दिए हैं।
बता दें कि लगभग 150 औद्योगिक इकाइयों मेें विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन से लेकर मशीनों की स्थापना और उनके हिस्से काटने के लिए गैस कटर में एलपीजी समेत हर माह बड़े साइज वाले औसतन 500 ऑक्सीजन सिलिंडरों का इस्तेमाल किया जाता है। बड़े साइज के ऐसे एक सिलिंडर में सात घन मीटर गैस आती है। ऐसे एक सिलिंडर से अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले पांच-छह छोटे सिलिंडरों में गैस रिफिल की जा सकती है। सामान्य दिनों में जनपद के उद्योगों समेत आसपास के जनपदों की चीनी मिलों में 12 टन क्षमता वाले तीन टैंकर ऑक्सीजन की खपत होती रही है। इतनी ऑक्सीजन से सात घनमीटर क्षमता वाले लगभग 3200 से 3500 औद्योगिक सिलिंडर भरे जा सकते हैं।
जनपद में दो कंपनियां ऑक्सीजन का उत्पादन करने के बजाय केवल सिलिंडरों की री-फिलिंग करती है। 12 टन के ऑक्सीजन टैंकर की सीधी सप्लाई जनपद के बजाय केवल मंडल मुख्यालय बरेली को होती है और वहीं से बड़े सिलिंडरों में जनपद की री-फिलिंग कंपनियों को ऑक्सीजन की सप्लाई मिलती है। इसे देखते डीएम से अनुरोध किया है कि जिले को एक ऑक्सीजन टैंकर उपलब्ध कराने की व्यवस्था करा दें। ऐसा होने पर राजकीय मेडिकल कालेज समेत निजी अस्पतालों में एक माह तक ऑक्सीजन की उपलब्धता बनी रहेगी।
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-अशोक अग्रवाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, आईआईए
कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन की उपलब्धता बनाए रखने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। औषधि निरीक्षक को इस काम में लगाया गया है। अभी अस्पतालों में दो दिन के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध हैं। डीएम के स्तर से गैस री-फिलिंग कंपनियों के संचालकों समेत अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर सरकार एवं शासन से निर्धारित मानक के अनुसार ऑक्सीजन की उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
- रामसेवक द्विवेदी, एडीएम प्रशासन
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बता दें कि लगभग 150 औद्योगिक इकाइयों मेें विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन से लेकर मशीनों की स्थापना और उनके हिस्से काटने के लिए गैस कटर में एलपीजी समेत हर माह बड़े साइज वाले औसतन 500 ऑक्सीजन सिलिंडरों का इस्तेमाल किया जाता है। बड़े साइज के ऐसे एक सिलिंडर में सात घन मीटर गैस आती है। ऐसे एक सिलिंडर से अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले पांच-छह छोटे सिलिंडरों में गैस रिफिल की जा सकती है। सामान्य दिनों में जनपद के उद्योगों समेत आसपास के जनपदों की चीनी मिलों में 12 टन क्षमता वाले तीन टैंकर ऑक्सीजन की खपत होती रही है। इतनी ऑक्सीजन से सात घनमीटर क्षमता वाले लगभग 3200 से 3500 औद्योगिक सिलिंडर भरे जा सकते हैं।
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जनपद में दो कंपनियां ऑक्सीजन का उत्पादन करने के बजाय केवल सिलिंडरों की री-फिलिंग करती है। 12 टन के ऑक्सीजन टैंकर की सीधी सप्लाई जनपद के बजाय केवल मंडल मुख्यालय बरेली को होती है और वहीं से बड़े सिलिंडरों में जनपद की री-फिलिंग कंपनियों को ऑक्सीजन की सप्लाई मिलती है। इसे देखते डीएम से अनुरोध किया है कि जिले को एक ऑक्सीजन टैंकर उपलब्ध कराने की व्यवस्था करा दें। ऐसा होने पर राजकीय मेडिकल कालेज समेत निजी अस्पतालों में एक माह तक ऑक्सीजन की उपलब्धता बनी रहेगी।
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-अशोक अग्रवाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, आईआईए
कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन की उपलब्धता बनाए रखने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। औषधि निरीक्षक को इस काम में लगाया गया है। अभी अस्पतालों में दो दिन के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध हैं। डीएम के स्तर से गैस री-फिलिंग कंपनियों के संचालकों समेत अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर सरकार एवं शासन से निर्धारित मानक के अनुसार ऑक्सीजन की उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
- रामसेवक द्विवेदी, एडीएम प्रशासन