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शहर की शानः पंजाब से आकर कृषि यंत्रों के बूते विदेश तक बनाई पहचान
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पुवायां के नंदा ब्रादर्स के स्वामी धीरज शर्मा और उनका परिवार, फाइल फोटो
- फोटो : POWAYAN
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पुवायां (शाहजहांपुर)। सत्तर के दशक में पुवायां में आकर कृषि यंत्रों का कारोबार शुरू करने के बाद नंदा ब्रदर्स ने अपनी मेहनत और काबिलियत के बलबूते पहचान बनाई है। देश के कई राज्यों के अलावा नेपाल तक नंदा ब्रदर्स लिखी हुई ट्रॉलियां सड़कों पर दौड़ती दिख जाएंगी।
मूलरूप से पंजाब के जनपद फगवाड़ा के गांव लखनपाल निवासी पंडित नसीबचंद्र शर्मा बोकारो स्टील प्लांट में इंजीनियर थे। उनके पुत्र नरेंद्र कुमार शर्मा भी बोकारो जाकर ठेकेदारी करने लगे। वहां पर उनकी मुलाकात वर्ष 1965 में शाहजहांपुर के जयेंद्र प्रसाद (छोटे बाबा साहब) से हुई। जयेंद्र प्रसाद ने उनको पुवायां के कृषि प्रधान क्षेत्र होने के बारे में बताया और उनसे शाहजहांपुर आकर कृषि यंत्रों के क्षेत्र में काम करने को कहा। इसके बाद नरेंद्र शर्मा ने 1967 में सबसे पहले बाराबंकी में ठेके पर थ्रेशर बनाने का काम शुरू किया। सीतापुर में भी कमला थ्रेशर ठेके पर बनाए।
वर्ष 1971 में नरेंद्र शर्मा अपने भाई कुलदीपचंद्र शर्मा और सोमदत्त शर्मा के साथ पुवायां आ गए और नंदा ब्रदर्स के नाम से कृषि यंत्रों का काम शुरू करने का फैसला किया। सबसे पहले ट्रॉली बनाने का काम शुरू किया गया। सोमदत्त शर्मा वर्ष 1976 में आबूधाबी चले गए। नरेंद्र शर्मा ने नंदा ब्रदर्स के बैनर तले पहली दो ट्रॉलियों में एक जयेंद्र प्रसाद और दूसरी पुवायां के पूर्व ब्लाक प्रमुख प्रेमचंद्र त्रिवेदी को दीं।
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नरेंद्र शर्मा के पुत्र धीरज शर्मा (राजा नंदा) बताते हैं कि उनके पिता, चाचा ने कृषि यंत्रों का काम शुरू करते समय प्रण किया था कि गुणवत्ता से कभी भी समझौता नहीं किया जाएगा। यही कारण है कि धीरे-धीरे नंदा ब्रदर्स के कृषि यंत्र खासकर ट्रॉली की मांग बढ़ने लगी और आज नंदा की ट्रॉली उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान तक जाती है। प्रदेश के 26 जिलों में ट्रॉली की भारी मांग है। इसके अलावा नंदा की ट्रॉली नेपाल तक सप्लाई होती है। नंदा परिवार ने वर्ष 1981 में पुवायां के कमलबाग में मकान बनाया और तब से पूरा परिवार एक साथ रह रहा है।
नरेंद्र शर्मा का निधन हो चुका है। परास्नातक तक शिक्षा प्राप्त धीरज शर्मा अपने चाचा कुलदीपचंद्र शर्मा, चचेरे भाई तरुण शर्मा के साथ काम संभालते हैं। संयुक्त परिवार में वह चाची विमला शर्मा, मां सुदर्शना शर्मा, पत्नी संगीता शर्मा, पुत्र उद्धव, पुत्री अक्षिता के साथ रहते हैं। नंदा ब्रदर्स का काम देख रहे धीरज शर्मा और उनके चाचा कुलदीप चंद्र शर्मा कृषि यंत्रों की शुरुआत में स्थापित मानदंडों पर ही काम करते हैं। राजा नंदा का कहना है कि आज लोग गुणवत्ता पहले देखते हैं।
51 कन्याओं की कर चुके हैं शादी
धीरज शर्मा वर्ष 2001 में गठित मां ज्वाला जी जागरण सेवा समिति के अध्यक्ष भी हैं। समिति के बैनर तले मशहूर भजन गायक तृप्ति शाक्या, लखवीर सिंह लक्खा, राजू बावरा, मोहित चोपड़ा, विश्वास राय, हेमंत ब्रजवासी, रामऔतार शर्मा सहित टी सीरिज के तमाम कलाकार पुवायां आकर मातारानी का गुणगान कर चुके हैं। समिति वर्ष 2008 से अब तक 51 गरीब कन्याओं की अपने खर्च पर शादी करा चुकी है।
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मूलरूप से पंजाब के जनपद फगवाड़ा के गांव लखनपाल निवासी पंडित नसीबचंद्र शर्मा बोकारो स्टील प्लांट में इंजीनियर थे। उनके पुत्र नरेंद्र कुमार शर्मा भी बोकारो जाकर ठेकेदारी करने लगे। वहां पर उनकी मुलाकात वर्ष 1965 में शाहजहांपुर के जयेंद्र प्रसाद (छोटे बाबा साहब) से हुई। जयेंद्र प्रसाद ने उनको पुवायां के कृषि प्रधान क्षेत्र होने के बारे में बताया और उनसे शाहजहांपुर आकर कृषि यंत्रों के क्षेत्र में काम करने को कहा। इसके बाद नरेंद्र शर्मा ने 1967 में सबसे पहले बाराबंकी में ठेके पर थ्रेशर बनाने का काम शुरू किया। सीतापुर में भी कमला थ्रेशर ठेके पर बनाए।
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वर्ष 1971 में नरेंद्र शर्मा अपने भाई कुलदीपचंद्र शर्मा और सोमदत्त शर्मा के साथ पुवायां आ गए और नंदा ब्रदर्स के नाम से कृषि यंत्रों का काम शुरू करने का फैसला किया। सबसे पहले ट्रॉली बनाने का काम शुरू किया गया। सोमदत्त शर्मा वर्ष 1976 में आबूधाबी चले गए। नरेंद्र शर्मा ने नंदा ब्रदर्स के बैनर तले पहली दो ट्रॉलियों में एक जयेंद्र प्रसाद और दूसरी पुवायां के पूर्व ब्लाक प्रमुख प्रेमचंद्र त्रिवेदी को दीं।
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नरेंद्र शर्मा के पुत्र धीरज शर्मा (राजा नंदा) बताते हैं कि उनके पिता, चाचा ने कृषि यंत्रों का काम शुरू करते समय प्रण किया था कि गुणवत्ता से कभी भी समझौता नहीं किया जाएगा। यही कारण है कि धीरे-धीरे नंदा ब्रदर्स के कृषि यंत्र खासकर ट्रॉली की मांग बढ़ने लगी और आज नंदा की ट्रॉली उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान तक जाती है। प्रदेश के 26 जिलों में ट्रॉली की भारी मांग है। इसके अलावा नंदा की ट्रॉली नेपाल तक सप्लाई होती है। नंदा परिवार ने वर्ष 1981 में पुवायां के कमलबाग में मकान बनाया और तब से पूरा परिवार एक साथ रह रहा है।
नरेंद्र शर्मा का निधन हो चुका है। परास्नातक तक शिक्षा प्राप्त धीरज शर्मा अपने चाचा कुलदीपचंद्र शर्मा, चचेरे भाई तरुण शर्मा के साथ काम संभालते हैं। संयुक्त परिवार में वह चाची विमला शर्मा, मां सुदर्शना शर्मा, पत्नी संगीता शर्मा, पुत्र उद्धव, पुत्री अक्षिता के साथ रहते हैं। नंदा ब्रदर्स का काम देख रहे धीरज शर्मा और उनके चाचा कुलदीप चंद्र शर्मा कृषि यंत्रों की शुरुआत में स्थापित मानदंडों पर ही काम करते हैं। राजा नंदा का कहना है कि आज लोग गुणवत्ता पहले देखते हैं।
51 कन्याओं की कर चुके हैं शादी
धीरज शर्मा वर्ष 2001 में गठित मां ज्वाला जी जागरण सेवा समिति के अध्यक्ष भी हैं। समिति के बैनर तले मशहूर भजन गायक तृप्ति शाक्या, लखवीर सिंह लक्खा, राजू बावरा, मोहित चोपड़ा, विश्वास राय, हेमंत ब्रजवासी, रामऔतार शर्मा सहित टी सीरिज के तमाम कलाकार पुवायां आकर मातारानी का गुणगान कर चुके हैं। समिति वर्ष 2008 से अब तक 51 गरीब कन्याओं की अपने खर्च पर शादी करा चुकी है।