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नेपाली तेल को सरसों का तेल बनाकर बेचने के पुवायां में कई ठिकाने
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पुवायां। देश भर में प्रतिबंधित नेपाली तेल की बड़ी खेप बरेली में पकड़ी जाने के बाद शाहजहांपुर जिले में इसके धड़ल्ले से बिकने का मामला सामने आया है। पुवायां क्षेत्र में इसके पांच ठिकाने हैं, जहां पर मिलावटी सरसों तेल को नामचीन कंपनियों के लेबिल से पैंकिग कर बाजार में बेचा जा रहा है। मगर बृहस्पतिवार को यहां पहुंची एफएसडीए टीम इन ठिकानों पर छापे मारने के बजाय घेराव के बहाने दोस्ती कर लौट गई।
एफएसडीएम की टीम ने बृहस्पितवार को बरेली के श्यामंगज में छापा मारकर सैकड़ों पीपा नेपाली तेल बरामद किया था। इन नेपाली तेल के पीपों पर नीलकमल, महालक्ष्मी, राजहंस आदि ब्रांड के रैपर चस्पा थे। नेपाली तेल की तस्करी जिले में आसानी से हो रही है क्योंकि यहां से नेपाल की सीमा बमुश्किल 125 किमी की दूरी पर है। सूत्रों के मुताबिक नेपाली तेल के धंधेबाजों के तार पड़ोसी जनपद लखीमपुर खीरी से जुड़े हैं और इसकी सीमाएं पुवायां से लगी हुई हैं। पुवायां में दो स्थानों पर गोदामों में राइस ब्रान में केमिकल और पोस्टर कलर अथवा मैटेलिक यलो कलर मिलाकर सरसों का तेल तैयार किया जाता है। इन गोदामों में भूमिगत टैंक भी बने हैं।
इन गोदामों से नकली तेल को खुटार, बंडा और पुवायां में देहात के कई दुकानदारों को सप्लाई किया जाता है। बाजार में ब्रांडेड तेल 110 रुपये किलो बिक रहा है, लेकिन यह तेल 70-80 रुपये किलो बिकता है। दुकानदार भी प्रति किलो 40 से 50 रुपये मुनाफा कमा रहे हैं।
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मिलावटी तेल के पीपों के रैपर की चमक-दमक ऐसी होती है कि शक भी नहीं होता। राइस ब्रान तेल में पीला रंग डालकर इसे सरसों के तेल जैसा बना दिया जाता है फिर सरसों वाली खुशबू के लिए एसेंस डाल दिया जाता है।
पुवायां में पीपों में पैक किए जा रहे नेपाली तेल पर जो रैपर लगाया जा रहा है, उस पर लखीमपुर का पता लिखा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि कभी पकड़ में आने पर यह कहकर बचा जा सके कि तेल लखीमपुर से खरीदा गया है।
अभी तक नेपाली तेल से नकली सरसों तेल बनाने का कोई मामला प्रकाश में नहीं आया है। इस बारे में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को सतर्क कर दिया गया है। - वीके वर्मा, अभिहीत अधिकारी, खाद्य सुरक्षा विभाग
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एफएसडीएम की टीम ने बृहस्पितवार को बरेली के श्यामंगज में छापा मारकर सैकड़ों पीपा नेपाली तेल बरामद किया था। इन नेपाली तेल के पीपों पर नीलकमल, महालक्ष्मी, राजहंस आदि ब्रांड के रैपर चस्पा थे। नेपाली तेल की तस्करी जिले में आसानी से हो रही है क्योंकि यहां से नेपाल की सीमा बमुश्किल 125 किमी की दूरी पर है। सूत्रों के मुताबिक नेपाली तेल के धंधेबाजों के तार पड़ोसी जनपद लखीमपुर खीरी से जुड़े हैं और इसकी सीमाएं पुवायां से लगी हुई हैं। पुवायां में दो स्थानों पर गोदामों में राइस ब्रान में केमिकल और पोस्टर कलर अथवा मैटेलिक यलो कलर मिलाकर सरसों का तेल तैयार किया जाता है। इन गोदामों में भूमिगत टैंक भी बने हैं।
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इन गोदामों से नकली तेल को खुटार, बंडा और पुवायां में देहात के कई दुकानदारों को सप्लाई किया जाता है। बाजार में ब्रांडेड तेल 110 रुपये किलो बिक रहा है, लेकिन यह तेल 70-80 रुपये किलो बिकता है। दुकानदार भी प्रति किलो 40 से 50 रुपये मुनाफा कमा रहे हैं।
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मिलावटी तेल के पीपों के रैपर की चमक-दमक ऐसी होती है कि शक भी नहीं होता। राइस ब्रान तेल में पीला रंग डालकर इसे सरसों के तेल जैसा बना दिया जाता है फिर सरसों वाली खुशबू के लिए एसेंस डाल दिया जाता है।
पुवायां में पीपों में पैक किए जा रहे नेपाली तेल पर जो रैपर लगाया जा रहा है, उस पर लखीमपुर का पता लिखा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि कभी पकड़ में आने पर यह कहकर बचा जा सके कि तेल लखीमपुर से खरीदा गया है।
अभी तक नेपाली तेल से नकली सरसों तेल बनाने का कोई मामला प्रकाश में नहीं आया है। इस बारे में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को सतर्क कर दिया गया है। - वीके वर्मा, अभिहीत अधिकारी, खाद्य सुरक्षा विभाग